आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को अब उस 'जेन ज़ी पर आंख मूंदकर भरोसा है' जिससे मोदी सरकार त्रस्त है। इसी जेन ज़ी के आंदोलन के कारण मोदी सरकार को झुकना पड़ा और धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफ़ा देना पड़ा। इसी जेन ज़ी के मुद्दे पर घिरे पीएम मोदी और अमित शाह पर आरोप लग रहा है कि जवाब देने से बचने के लिए वे संसद में नहीं जा पा रहे हैं। और इसी जेन ज़ी के जंतर मंतर आंदोलन को संघ के एक बड़े नेता आरएसएस के सह-कार्यवाह अतुल लिमये ने कुछ दिन पहले 'एंटी नेशनल' बता दिया था। इस बीच अब संघ प्रमुख मोहन भागवत ने जेन ज़ी को लुभाने के लिए आउटरीच प्रोग्राम की योजना बना डाली है। अब वह विरोध की आवाज़, प्रदर्शन के अधिकार, जेन ज़ी समर्थन, लोकतांत्रिक संवाद, लोकतंत्र और शिक्षा सुधार की बात कर रहे हैं। वह सवाल पूछने और तार्किक जवाब की बात कर रहे हैं।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने जेन ज़ी पर भरोसा जताते हुए कहा कि किसी भी आंदोलन को केवल इसलिए 'देश-विरोधी' नहीं कहा जा सकता है क्योंकि लोग अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरते हैं। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी की नीयत और सोच पर उन्हें पूरा विश्वास है। उन्होंने कहा, 'मैं जेन ज़ी पर आंख मूंदकर भरोसा करूंगा।' भागवत ने कहा कि उन्हें हाल के छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई की पूरी सच्चाई की जानकारी नहीं है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें देश के युवाओं पर भरोसा है।

'आंदोलन लोकतंत्र में संवाद का माध्यम है'

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव का नाम नहीं है, बल्कि संवाद और सहमति बनाने की प्रक्रिया भी है। उन्होंने कहा, 'लोकतंत्र में चर्चा के बाद सहमति बनती है। यदि लोगों की शिकायतें वास्तविक हैं तो उन पर संवाद होना चाहिए।' उन्होंने माना कि देश की शिक्षा व्यवस्था में कई कमियां हैं और उनमें सुधार की जरूरत है। इसलिए छात्रों की आवाज सुनना जरूरी है।

मोहन भागवत ने कहा कि पहले की पीढ़ियां सरकार या व्यवस्था से ज्यादा सवाल नहीं पूछती थीं, लेकिन आज की पीढ़ी तर्क चाहती है। उन्होंने कहा, 'हम पहले अधिकारियों से सवाल नहीं करते थे, लेकिन जेन ज़ी और जेन अल्फा सवाल पूछते हैं और प्यार से तार्किक जवाब चाहते हैं।' उनके मुताबिक यह बदलाव लोकतंत्र के लिए सकारात्मक है।

युवा आंदोलन की बात करने लगे भागवत

मोहन भागवत ने साफ़ कहा कि वह कभी युवाओं को आंदोलन करने से नहीं रोकेंगे। उन्होंने कहा, 'मैं कभी नहीं कहूंगा कि जेन ज़ी आंदोलन न करे। लेकिन लोकतंत्र में आंदोलन करने का एक उचित तरीका भी होना चाहिए।' 

मोहन भागवत ने कहा कि अगर युवा अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठा रहे हैं तो उसका उद्देश्य व्यवस्था में सुधार होना चाहिए, न कि केवल विरोध करना।

जंतर-मंतर आंदोलन को लेकर कुछ संगठनों द्वारा लगाए गए 'देश-विरोधी' के आरोपों पर टिप्पणी करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि हर प्रदर्शन को राष्ट्र-विरोधी कहना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा, 'कोई आंदोलन केवल इसलिए देश-विरोधी नहीं हो जाता क्योंकि लोग सड़क पर उतरकर अपनी बात कह रहे हैं।' उन्होंने कहा कि असहमति और सुधार की मांग लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा है।

युवाओं की तारीफ़ क्यों करने लगे भागवत?

अचानक से मोहन भागवत अब युवाओं यानी जेन ज़ी की तारीफ़ करने लगे हैं। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी ईमानदार है और उसकी बात ध्यान से सुनी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, 'आज की पीढ़ी सबसे ईमानदार पीढ़ी है। उन्हें केवल सुनना ही नहीं, बल्कि यह महसूस भी कराना चाहिए कि उनकी बात सुनी जा रही है।'
हाल के छात्र आंदोलनों में पैलेट गन और आंसू गैस इस्तेमाल किए जाने की खबरों पर मोहन भागवत ने कहा कि उनके पास इसकी प्रमाणिक जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, 'अगर मुझे किसी पर भरोसा करना होगा तो मैं जेन ज़ी पर भरोसा करूंगा। लेकिन हमारे पास पूरी प्रमाणिक जानकारी नहीं है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि आंदोलन में कुछ असामाजिक तत्व शामिल थे। इसलिए पूरी सच्चाई जाने बिना कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।'

शिक्षा सुधार की बात भी करने लगे

मोहन भागवत ने शिक्षा व्यवस्था पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि शिक्षा कभी भी व्यापार नहीं बननी चाहिए। उनके अनुसार, शिक्षा का खर्च लगातार बढ़ रहा है। शिक्षकों के बेहतर प्रशिक्षण की जरूरत है। शिक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने लंबे समय से चली आ रही मांग दोहराते हुए कहा कि देश के बजट का 6 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा पर खर्च किया जाना चाहिए।

अतुल लिमये ने प्रोटेस्ट को बताया था 'देश विरोधी'

संघ के सह-कार्यवाह अतुल लिमये ने पिछले हफ़्ते ही जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन और कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में चले आंदोलन को 'देश विरोधी' और 'संविधान-विरोधी' बताते हुए कहा था कि इसकी पूरी 'केस स्टडी' की जानी चाहिए, ताकि इसके पीछे की कार्यप्रणाली, समर्थन तंत्र और वैचारिक आधार को समझा जा सके। लिमये ने कहा था कि शुरुआत में छात्रों का आंदोलन NEET पेपर लीक जैसे शिक्षा से जुड़े मुद्दे पर स्वाभाविक था, लेकिन बाद में यह अपने मूल उद्देश्य से भटक गया।

लिमये ने कहा था कि सीजेपी आंदोलन को केवल एक विरोध प्रदर्शन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसकी पूरी प्रक्रिया का अध्ययन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन सवालों पर गंभीरता से विचार करने की ज़रूरत है कि आंदोलन की शुरुआत कैसे हुई? इसकी कार्यप्रणाली क्या थी? किन संगठनों और समूहों का समर्थन मिला? इसके पीछे वैचारिक आधार क्या था? और आंदोलन अचानक बड़े स्तर पर कैसे पहुंच गया?

संघ नेता अतुल लिमये ने जंतर मंतर प्रोटेस्ट को एंटी नेशनल बताया

टीजी मोहनदास का आपत्तिजनक बयान

इससे पहले केरल में संघ के बड़े नेता टीजी मोहनदास ने हाल ही में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही महिलाओं और वामपंथी विचारधारा वाली छात्राओं को लेकर बेहद विवादित और हिंसक बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि 'अगर उनके पास अधिकार होता तो वे प्रदर्शनकारियों पर कर्फ्यू लगाकर गोलीबारी का आदेश देते। जंतर मंतर पर बैठी छात्राओं का रेप करवाते।' टीजी मोहनदास के खिलाफ केरल में एफआईआर दर्ज हो चुकी है। दिल्ली में बीजेपी के पूर्व सांसद रमेश बिधूड़ी ने और भी ज़हरीला बयान दिया। बिधूड़ी ने कहा था कि जंतर मंतर पर पंक्चर लगाने वालों की संख्या ज्यादा थी।

छात्र आंदोलन के बीच आया बयान

बहरहाल, मोहन भागवत का यह बयान तब आया है जब जंतर-मंतर छात्र आंदोलन, कथित नीट पेपर लीक, पुलिस कार्रवाई और छात्रों पर बल प्रयोग को लेकर देशभर में बहस जारी है। विपक्ष लगातार केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर जवाब मांग रहा है। वहीं आरएसएस प्रमुख ने युवाओं पर भरोसा जताते हुए लोकतांत्रिक संवाद, शिक्षा सुधार और आंदोलनों को लोकतंत्र का हिस्सा बताया है।