लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने देश में महंगाई की नई लहर आने की आशंका जताते हुए रुपये की तेज गिरावट और ईंधन की बढ़ती कीमतों को बड़ा कारण बताया। उन्होंने कहा कि यूएस-इसराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल बढ़ी है, जिसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
राहुल गांधी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि डॉलर के मुकाबले रुपये का लगातार कमजोर होना और औद्योगिक ईंधन की कीमतों में तेज उछाल सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि आने वाली महंगाई के स्पष्ट संकेत हैं। उनका यह बयान उस दिन के बाद आया जब रुपया 64 पैसे टूटकर डॉलर के मुकाबले 93.53 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुआ। विशेषज्ञों के मुताबिक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक निवेशकों के “रिस्क-ऑफ” रुख ने इस गिरावट को और तेज किया है।

हर घर की जेब पर असर

राहुल गांधी ने कहा कि करंसी में गिरावट और ईंधन महंगा होने का असर पूरे आर्थिक ढांचे पर “श्रृंखलाबद्ध तरीके से” पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इसे सामान्य बताने की कोशिश कर रही है, जबकि जमीनी हकीकत अलग है। उन्होंने चार सीधे असर गिनाए-
  • उत्पादन और परिवहन की लागत बढ़ेगी
  • MSME सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित होगा
  • रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम बढ़ेंगे
  • विदेशी संस्थागत निवेश (FII) तेजी से बाहर जाएगा, जिससे शेयर बाजार पर दबाव बढ़ेगा
उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम विधानसभा चुनावों के बाद पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी होगी और वो “सिर्फ कुछ समय की बात” है। यानी चार राज्यों में विधानसभा चुनाव के बाद सरकार पेट्रोल, डीजल महंगा कर देगी।
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सरकार पर सीधा हमला

केंद्र की अगुआई कर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी ने कहा कि मौजूदा आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार के पास न दिशा है और न ही स्पष्ट रणनीति। उन्होंने कहा, “सरकार क्या कह रही है, यह मुद्दा नहीं है।असल सवाल यह है कि आपकी थाली में क्या बचा है।”

एलपीजी संकट से बढ़ी चिंता

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के बीच देश में एलपीजी को लेकर भी चिंता बढ़ी है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने वाणिज्यिक एलपीजी उपभोक्ताओं से जहां संभव हो पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) अपनाने की अपील की है, ताकि सिलेंडर की आपूर्ति पर दबाव कम हो सके। हालांकि मोदी सरकार एलपीजी संकट को नकार रही है, लेकिन गांवों, छोटे कस्बों से लेकर दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नैई, अहमदाबाद, लखनऊ, पटना आदि में लोग एलपीजी सिलिंडर ब्लैक में भरवा रहे हैं। दिल्ली एनसीआर में एक किलो एलपीजी डोमेस्टिक सिलिंडरों में ढाई सौ रुपये किलो बेची जा रही है। एलपीजी गैस एजेंसियों के बाहर पुलिस खड़ी है लेकिन सब कुछ व्यवस्थित ढंग से चल रहा है और जनता को सरेआम लूटा जा रहा है। सरकार हकीकत से मुंह मोड़ रही है। टीवी मीडिया जमीनी हकीकत नहीं बता रहा। 
सरकार पर्याप्त स्टॉक होने का दावा कर रही है, लेकिन कई शहरों में एलपीजी डिपो पर लंबी कतारों के वीडियो लोग सोशल मीडिया पर डाल रहे हैं। खासकर यूपी, बिहार, केरल में स्थिति अधिक गंभीर बताई जा रही है, जहां सिलेंडर की कमी के कारण कई रेस्तरां और होटल अस्थायी रूप से बंद करने पड़े हैं। रेहड़ी पर एलपीजी सिलिंडर लगाकर चाय बेचने वाले, मजदूर वर्ग के लिए खाना सप्लाई करने वाले ठेले वालों का कारोबार बंद हो गया है। जहां कहीं भी उपलब्ध है, वहां रेट महंगे हैं, क्योंकि उन लोगों को एलपीजी बहुत महंगे दामों पर ब्लैक में खरीदनी पड़ रही है।

शशि थरूर कर रहे मोदी सरकार की वकालत

नेता विपक्ष राहुल गांधी जहां महंगाई, एलपीजी संकट को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोल रहे हैं, वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर मोदी सरकार का समर्थन कर रहे हैं। थरूर ने रुपये की गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय कारकों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि यह गिरावट “ऐसी वैश्विक ताकतों के कारण है जो हमारी सरकार के नियंत्रण से बाहर हैं।” साथ ही उन्होंने याद दिलाया कि जब कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान भी रुपया कमजोर हुआ था, तब मौजूदा सत्तारूढ़ बीजेपी ने इसे लेकर तीखी आलोचना की थी।
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थरूर ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए केंद्र सरकार को “इतनी उदारता दिखानी चाहिए” कि वह पहले लगाए गए राजनीतिक आरोपों पर पुनर्विचार करे। कुल मिलाकर, रुपये की ऐतिहासिक गिरावट, बढ़ती ऊर्जा लागत और वैश्विक युद्ध की अनिश्चितताओं के बीच देश में महंगाई और आर्थिक दबाव को लेकर राजनीतिक बहस तेज होती जा रही है।