किसानों के आंदोलन ने मोदी सरकार को बैकफ़ुट पर धकेल दिया। सरकार को समझ आ गया था कि यह आंदोलन उसकी सियासी ज़मीन को खिसका सकता है, इसलिए उसने किसानों की मांगों को मान लिया।
किसानों ने भारत बंद से लेकर रेल रोको जैसे कई आयोजन किए तो आंदोलन में आने वाला कोई भी शख़्स भूखा-प्यासा न रहे, कम के कम सिंघु, ग़ाज़ीपुर और टिकरी बॉर्डर पर इसका पूरा ध्यान रखा।
सोशल मीडिया पर भी किसान आंदोलन के समर्थकों ने बीजेपी के कार्यकर्ताओं और नेताओं को बैकफ़ुट पर धकेल दिया था।