students question Satya Niketan death toll- दिल्ली के सत्य निकेतन PG हादसे में 7 लोगों की मौत के बाद छात्रों ने मृतकों के आंकड़े पर सवाल उठाए और कुछ छात्रों के लापता होने का दावा किया। MCD ने पड़ोसी असुरक्षित इमारत को गिराने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
दिल्ली के सत्य निकेतन में छात्र प्रदर्शन करते हुए। वे लापता छात्रों को तलाशने की मांग कर रहे हैं।
दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी इमारत ढहने से हुई सात लोगों की मौत के बाद अब हादसे में मृतकों की संख्या को लेकर सवाल उठने लगे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के करीब 150 से अधिक छात्रों ने दावा किया है कि कुछ छात्र अब भी लापता हैं और सरकार ने हादसे में हुई मौतों का पूरा आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया है। छात्रों ने मंगलवार से अनिश्चितकालीन प्रदर्शन शुरू कर दिया और घटना की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।
छात्रों के इन आरोपों के बीच दिल्ली नगर निगम (MCD) ने हादसे के आसपास मौजूद असुरक्षित इमारतों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। मंगलवार को सत्य निकेतन में हादसे वाली इमारत से सटी एक जर्जर इमारत को गिराने की कार्रवाई शुरू की गई। यह इमारत भी छात्राओं के लिए पीजी के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी। प्रशासन ने यहां रहने वाले छात्रों को पहले ही बाहर निकाल दिया था।
छात्रों का दावा- तीन-चार छात्र अब भी लापता
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि कम से कम तीन-चार छात्र ऐसे हैं, जिनका अभी तक पता नहीं चल पाया है। AISA के प्रतिनिधि उन्नयन के मुताबिक, कुछ लापता छात्रों के माता-पिता ने AIIMS और सफदरजंग अस्पतालों में जाकर अपने बच्चों के बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें वहां भी अपने बच्चों का पता नहीं चला। छात्रों ने आशंका जताई कि लापता लोगों की संख्या इससे अधिक भी हो सकती है।छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि हादसे वाली इमारत का बेसमेंट अभी पूरी तरह खाली नहीं कराया गया है और वहां मजदूरों के फंसे होने की आशंका हो सकती है। हालांकि, यह छात्रों का आरोप है और पुलिस तथा अग्निशमन विभाग की ओर से आधिकारिक रूप से सात मौतों के बाद तलाशी एवं बचाव अभियान पूरा किए जाने की बात कही गई है।
छात्रों ने सरकार से हादसे में मरने वालों और लापता लोगों का पूरा और सत्यापित आंकड़ा जारी करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने मृतकों के परिवारों के लिए एक करोड़ रुपये मुआवजे, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई, इलाके के सभी पीजी भवनों का सुरक्षा ऑडिट और विस्थापित छात्रों के लिए हॉस्टल की व्यवस्था की मांग की है।
हादसे के बाद खाली होने लगा सत्य निकेतन
सत्य निकेतन की गलियों में मंगलवार को सामान्य दिनों की छात्र-चहल-पहल की जगह सामान समेटते छात्र दिखाई दिए। आसपास के कई पीजी में रहने वाले छात्र अपने सूटकेस और जरूरी सामान लेकर इलाका छोड़ने लगे। यह कदम उन इमारतों को खाली कराने की कार्रवाई के बीच उठाया गया है, जिन्हें प्रशासन असुरक्षित या नियमों के उल्लंघन वाला मान रहा है।कई छात्र ऐसे भी थे जो हादसे के समय पीजी में मौजूद नहीं थे। उनके परिवार या दोस्त सामान लेने पहुंचे। एक रिश्तेदार ने बताया कि उनकी भतीजी ने करीब एक महीने पहले मैत्रेयी कॉलेज में दाखिला लिया था और सत्य निकेतन में पीजी लिया था। परिवार गुवाहाटी में रहता है और तुरंत दिल्ली नहीं पहुंच सकता था, इसलिए वह उसका सामान लेने आए। छात्रों ने यह भी शिकायत की कि पीजी खाली करने के बाद कुछ लोगों को अब तक सिक्योरिटी डिपॉजिट और पहले से दिए गए किराए का रिफंड नहीं मिला है। ऐसे में हादसे के बाद सुरक्षा के साथ-साथ छात्रों के सामने रहने की जगह और आर्थिक नुकसान का संकट भी खड़ा हो गया है।
पड़ोसी इमारत पर MCD का बुलडोजर
इसी बीच MCD ने सत्य निकेतन में हादसे वाली इमारत से लगी एक अन्य खतरनाक इमारत को गिराने का काम शुरू किया। MCD के अधिकारी के मुताबिक, इमारत को खतरनाक घोषित किया गया था और मंगलवार को नियंत्रित तरीके से उसे गिराने की कार्रवाई शुरू हुई। शाम को काम रोक दिया गया और बुधवार सुबह इसे फिर शुरू किया जाना था। इस इमारत में छात्राओं के लिए पीजी चल रहा था। हादसे के बाद इसे खाली करा दिया गया था। MCD ने 6 सितंबर को ही संपत्ति संख्या 13 के मालिक या कब्जाधारी को इमारत गिराने का निर्देश दिया था। आदेश में कहा गया था कि इमारत वहां रहने वाले लोगों, राहगीरों और आसपास की इमारतों के लिए खतरा पैदा कर रही है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई। मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक, छात्रों का सामान दिल्ली फायर सर्विस के कर्मचारियों की मदद से सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला जा रहा है और छात्रों तथा स्थानीय निवासियों से प्रशासन का सहयोग करने की अपील की गई है।हादसे में सात लोगों की मौत
सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत 6 सितंबर की दोपहर करीब 1.30 बजे ढह गई थी। इसमें 'Hostel Daze' नाम से पीजी चल रहा था। हादसे में पांच छात्रों समेत सात लोगों की मौत हुई। 12 लोगों को मलबे से सुरक्षित निकाला गया, जबकि पांच लोग घायल हुए। लगभग 50 वर्ष पुरानी इस इमारत में हादसे के समय मरम्मत का काम भी चल रहा था। पुलिस के मुताबिक, बेसमेंट में आठ से दस दिनों से मरम्मत का काम चल रहा था। बारिश के दौरान जमा हुए कचरे को हटाने के साथ-साथ ग्राउंड फ्लोर पर व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए निर्माण और विस्तार का काम भी किया जा रहा था। पुलिस की जांच में सामने आया कि पीजी में चार मंजिलों पर सात कमरे थे- पहली, दूसरी और तीसरी मंजिल पर दो-दो कमरे तथा चौथी मंजिल पर एक कमरा। चौथी मंजिल के कमरे को तीन छात्रों के रहने के लिए एक कमरे के आवास में बदला गया था। ग्राउंड फ्लोर पर दो दुकानें और बेसमेंट था।PG संचालक समेत कई गिरफ्तार
हादसे के मामले में पुलिस ने अब पीजी संचालक सुधांशु को गिरफ्तार किया है। वह 'Hostel Daze' पीजी चलाने वाले दो साझेदारों में से एक था। दूसरे संचालक शुभम त्यागी की तलाश जारी है। दोनों ने अगस्त 2025 में यह संपत्ति लीज पर ली थी। इससे पहले पुलिस ने संपत्ति के मालिक 81 वर्षीय हरिराम बंसल, उनकी पत्नी 75 वर्षीय उर्मिला गुप्ता और उनके 52 वर्षीय बेटे महेश गुप्ता को गिरफ्तार किया था। दंपती को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया, जबकि महेश को दो दिन की पुलिस हिरासत मिली। पुलिस ने मरम्मत का काम देख रहे मजदूर ठेकेदार सानोज को उत्तर प्रदेश के कासगंज से पकड़ा था। एक बिल्डिंग कॉन्ट्रैक्टर और राजमिस्त्री को भी अदालत में पेश किया जाना है।अब सुप्रीम कोर्ट भी करेगा मामले की सुनवाई
सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली में पीजी और छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले का असर अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि वह सत्य निकेतन पीजी हादसे से जुड़े मुद्दे को देशभर में अवैध और असुरक्षित इमारतों के नियमन के संदर्भ में देख सकता है। मामले को 10 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। दिल्ली सरकार ने भी हादसे के बाद पीजी आवासों की जांच का फैसला किया है। वहीं, MCD ने अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के संकेत दिए हैं।नेहरू विहार में भी जर्जर इमारतों को लेकर चिंता
सत्य निकेतन की घटना के बाद दिल्ली के दूसरे इलाकों से भी असुरक्षित इमारतों की शिकायतें सामने आने लगी हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, उत्तर दिल्ली के नेहरू विहार में स्थानीय लोगों ने एक इमारत के बार-बार एक तरफ झुकने की शिकायत की है। उनका आरोप है कि सीवर लाइन की समस्या के कारण करीब एक दशक से यह स्थिति बनी हुई है।स्थानीय लोगों का दावा है कि इमारत को पहले एक बार गिराकर दोबारा बनाया गया, लेकिन कुछ साल बाद समस्या फिर सामने आ गई। निवासियों ने MCD और दिल्ली जल बोर्ड पर शिकायतों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। एक निवासी ने आसपास गांधी विहार के एफ ब्लॉक में करीब 400 मकानों के किसी न किसी दिशा में झुकने का दावा भी किया है। हालांकि, संबंधित विभागों ने इन आरोपों पर तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी है।
सत्य निकेतन हादसे ने एक साथ तीन बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं- दिल्ली के छात्र इलाकों में पीजी भवनों की सुरक्षा कितनी सुनिश्चित है, अवैध या असुरक्षित निर्माण पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं होती और हादसे के बाद सामने आने वाले मृतकों तथा लापता लोगों के आंकड़ों में पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की जाए। फिलहाल सात मौतों का आधिकारिक आंकड़ा कायम है, लेकिन छात्रों के आरोपों ने मामले की जांच और बचाव अभियान की पारदर्शिता पर नया सवाल खड़ा कर दिया है।