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पेगासस को सीबीआई, ईडी, आईटी शाखा के रूप में देखा जाएगा: शिवसेना

शिवसेना ने पेगासस स्पाइवेयर को लेकर केंद्र सरकार की तीखी आलोचना की है। जिस सीबीआई, ईडी और आईटी को विपक्षी दलों के ख़िलाफ़ इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगता रहा है, शिवसेना ने उससे जोड़ते हुए पेगासस के मामले में हमला किया। इसने गुरुवार को कहा, 'देश के लोग पेगासस को केंद्रीय जाँच ब्यूरो यानी सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय ईडी और आयकर विभाग यानी आईटी की एक अन्य संबद्ध शाखा के रूप में देखेंगे।'

शिवसेना की यह प्रतिक्रिया तब आई है जब पूरा विपक्ष पेगासस से नागरिकों की कथित जासूसी कराए जाने के मामले की जाँच की मांग कर रहा है। विपक्षी दल या तो संयुक्त संसदीय कमेटी से या फिर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जाँच की मांग कर रहे हैं। 

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पेगासस स्पाइवेयर के मामले में आरोप लगाए जा रहे हैं कि इसके माध्यम से दुनिया भर में लोगों पर जासूसी कराई गई। 'द गार्डियन', 'वाशिंगटन पोस्ट', 'द वायर' सहित दुनिया भर के 17 मीडिया संस्थानों ने पेगासस स्पाइवेयर के बारे में खुलासा किया है। एक लीक हुए डेटाबेस के अनुसार इजरायली निगरानी प्रौद्योगिकी फर्म एनएसओ के कई सरकारी ग्राहकों द्वारा हज़ारों टेलीफोन नंबरों को सूचीबद्ध किया गया था। 'द वायर' के अनुसार इसमें 300 से अधिक सत्यापित भारतीय मोबाइल टेलीफोन नंबर शामिल हैं। जो नंबर पेगासस के निशाने पर थे वे विपक्ष के नेता, मंत्री, पत्रकार, क़ानूनी पेशे से जुड़े, व्यवसायी, सरकारी अधिकारी, वैज्ञानिक, अधिकार कार्यकर्ता और अन्य से जुड़े हैं।

इसी को लेकर शिवसेना के मुखपत्र सामना में संपादकीय छपा है। इसमें आरोपों की जाँच के लिए एक पैनल गठित करने के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की प्रशंसा की गई है। 

शिवसेना की ओर से कहा गया है कि अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी नागरिकों के अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा करनी चाहिए। संपादकीय में सामना ने कहा है कि ममता ने सभी को जगाने का काम किया है।

बता दें कि इस मामले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को ही दो रिटायर्ड जजों की एक कमेटी गठित कर दी है, जो पेगासस जासूसी मामले की जाँच करेगी। जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस ज्योतिर्मय भट्टाचार्य इसके सदस्य बनाए गए हैं। ममता बनर्जी के भतीजे और तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी भी इस जासूसी के निशाने पर थे। पेगासस मामले में तृणमूल कांग्रेस ने भी जाँच की माँग की लेकिन केंद्र सरकार इस पर राज़ी नहीं हुई। पेगासस से जासूसी करने के मामले की यह पहली आधिकारिक जाँच कमेटी है, जिसका गठन किसी सरकार ने किया है।

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शिवसेना ने अपने मुखपत्र में लिखा है, 'इसलिए ममता बनर्जी का साहसिक क़दम महत्वपूर्ण है। उन्होंने एक न्यायिक आयोग का गठन किया और इसकी जाँच शुरू की। उन्होंने वही किया जो केंद्र को करना चाहिए था। इसलिए पश्चिम बंगाल में ममता ने बाघिन की तरह लड़ाई लड़ी और वहाँ जीत हासिल की। अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों को नागरिकों के अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा करनी चाहिए।'

संपादकीय में लिखा गया है, 'संसद के सुचारू कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए विपक्ष के बजाय सत्ताधारी दल की ज़िम्मेदारी है। इसलिए लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा ख़तरा यह है कि सरकार नहीं चाहती कि संसद चले और मुद्दों पर चर्चा हो। देश के लोग पेगासस को सीबीआई, ईडी और आयकर विभाग की एक अन्य संबद्ध शाखा के रूप में देखेंगे क्योंकि केंद्र इस मुद्दे पर संज्ञान नहीं ले रहा है।'

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