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ये कैसा राष्ट्रवाद! यूरोपीय सांसदों के दौरे पर सोशल मीडिया पर ज़बरदस्त प्रतिक्रिया

यूरोपीय संसद के 23 सदस्यों के जम्मू-कश्मीर दौरे पर सोशल मीडिया पर ज़बरदस्त प्रतिक्रिया हो रही है। ट्विटर पर #ये_कैसा_राष्ट्रवाद  ट्रेंड कर रहा है, जिससे सैकड़ों लोग जुड़ गए हैं। ज़्यादातर लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि अपने ही देश के सांसदों को जम्मू-कश्मीर जाने की इजाज़त नहीं दी गई, पर विदेश से आए सांसदों को अनुमति ही नहीं दी गई, उन्हें पूरी सुविधाएँ मुहैया कराई गईं हैं। 

वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने ट्वीट कर कहा, 'यह अजीब है कि हम अपने ही सांसदों को कश्मीर जाकर लोगों से पूरी आज़ादी से मिलने नहीं देते हैं, पर यूरोपीय संघ के सदस्यों को वहाँ जाने की अनुमति देने में ज़्यादा दिलचस्पी लेते हैं। निश्चित तौर पर हमें अपने सांसदों से पहले यूरोपीय संघ के सर्टिफिकेट की ज़रूरत नहीं है!'
वरिष्ठ पत्रकार सुहासिनी हैदर (@suhasinih) ने ट्वीट कर कहा है कि अनाम ग़ैर सरकारी संगठन ने इन यूरोपीय सांसदों की यात्रा का खर्च उठाया है, उन्होंने प्रधानमंत्री के साथ लंच किया और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने उनसे मुलाक़ात कर उन्हें कश्मीर की स्थिति से अवगत कराया। हैदर ने इसके आगे कहा कि ऐसा तो भ्रमण पर आए राष्ट्राध्यक्षों का साथ भी नहीं होता है। 
कैनेडियन भारत (@indcheated2014) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं और उसी क्रम में यूरोपीय सांसदों के दौरे की भी बात की है। 

शर्मिष्ठा मुखर्जी (@Sharmistha_GK) ने भी भारतीय सांसदों को अनुमति नहीं देने और यूरोपीय सांसदों का स्वागत करने का मुद्दा उठाया है। इसके अलावा उन्होंने यह जानकारी दी है कि यूरोपीय संघ ने ख़ुद को इस दौरे से अलग कर लिया है। 
मंजू जाधव ने बेहद अहम सवाल उठाया है। उन्होंने कहा है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, ऐसे में बाहर के लोगों को वहाँ क्यों ले जाया गया, जहाँ भारतीय भी नहीं जा सकते?
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