गीतांजलि आंग्मो ने कहा, 'मेरा सफदरजंग सरकारी अस्पताल से भरोसा उठ गया है। अस्पताल ने हमें बताया कि वांगचुक का पोटैशियम लेवल गिरकर 2.9 हो गया है, जिसे उन्होंने चिंताजनक और जानलेवा बताया। फिर भी, अपने पब्लिक हेल्थ बुलेटिन में उन्होंने जान-बूझकर असल आंकड़ा नहीं बताया'।
सोनम वांगचुकः जंतर मंतर पर आमरण अनशन का 18वां दिन
पिछले तीन सप्ताह से भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक को निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग को लेकर उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने रविवार को दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अदालत से मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की है। गीतांजलि आंग्मो का कहना है कि उन्हें अब सफदरजंग अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था पर भरोसा नहीं रहा। उन्होंने अस्पताल की मेडिकल रिपोर्टों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए हैं।
सोनम वांगचुक पिछले तीन सप्ताह से दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक पर रोक और युवाओं के मुद्दों को लेकर भूख हड़ताल कर रहे थे। उनकी तबीयत बिगड़ने की ख़बरों के बीच दिल्ली पुलिस ने उन्हें सफदरजंग अस्पताल में ले गई। वांगचुक समर्थकों का दावा है कि पुलिस उन्हें जबरन धरने से उठाकर अस्पताल ले गई है और वह अभी भी अनशन पर हैं। जबकि दिल्ली पुलिस दावा कर रही है कि दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। वांगचुक के समर्थक आरोप लगा रहे हैं कि संसद के मानसून सत्र के दौरान 20 मार्च को उनके संसद मार्च से पहले सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शन को जबरन ख़त्म करना चाहती है। इसी बीच अब सोनम वांगचुक की पत्नी ने बड़ा आरोप लगाया है।
पत्नी ने मेडिकल रिपोर्ट पर उठाए सवाल
गीतांजलि आंग्मो ने एक्स पर लिखा कि अस्पताल ने उन्हें बताया था कि सोनम वांगचुक के शरीर में पोटैशियम का स्तर 2.9 तक गिर गया है, जिसे डॉक्टरों ने बेहद खतरनाक और जानलेवा बताया। लेकिन उनका आरोप है कि अस्पताल ने अपने सार्वजनिक स्वास्थ्य बुलेटिन में वास्तविक आंकड़ा नहीं बताया और सिर्फ इतना लिखा कि 'पोटैशियम का स्तर घट रहा है।'
आंग्मो ने दावा किया कि करीब 10 घंटे बाद और कई बार अनुरोध करने के बाद रात 10:30 बजे उन्हें स्वतंत्र लैब में खून की जांच कराने की अनुमति मिली, जहां रिपोर्ट में पोटैशियम 3.5 आया, जो सामान्य सीमा के भीतर माना जाता है।'निजी अस्पताल ले जाने की अनुमति नहीं दी जा रही'
गीतांजलि आंग्मो ने आरोप लगाया कि परिवार की बार-बार मांग के बावजूद अस्पताल प्रशासन सोनम वांगचुक को छुट्टी नहीं दे रहा और न ही उन्हें किसी निजी अस्पताल में ले जाने की अनुमति दी जा रही है। उन्होंने कहा, 'अब मुझे सफदरजंग अस्पताल पर भरोसा नहीं रहा। हम अपनी पसंद के निजी अस्पताल में इलाज कराना चाहते हैं, लेकिन इसकी अनुमति नहीं दी जा रही।'
यह इलाज नहीं, अवैध हिरासत है: आंग्मो
गीतांजलि ने अस्पताल में भारी पुलिस बल की मौजूदगी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अस्पताल की जिस मंजिल पर सोनम वांगचुक भर्ती हैं, वहां करीब 30 पुलिसकर्मी तैनात हैं, जबकि पूरे अस्पताल में 100 से अधिक पुलिसकर्मी मौजूद हैं।
उन्होंने आरोप लगाया, 'हमारी आवाजाही पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। यह चिकित्सा नहीं, बल्कि अवैध हिरासत जैसी स्थिति है।'आंग्मो ने चेतावनी दी कि यदि सोनम वांगचुक को कोई नुकसान होता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन और सरकार की होगी।
दिल्ली हाईकोर्ट से लगाई गुहार
गीतांजलि अंगमो ने बताया कि उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर तत्काल सुनवाई की मांग की है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया है कि सोनम वांगचुक की तबीयत और खराब होने से पहले उन्हें परिवार की पसंद के निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा, 'किसी भी परिवार को अपने प्रियजन का इलाज कहां होगा, यह तय करने के लिए व्यवस्था से लड़ना नहीं पड़ना चाहिए।'
अस्पताल ने क्या कहा?
दूसरी ओर, सफदरजंग अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि सोनम वांगचुक पूरी तरह होश में हैं और उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर है। हालांकि अस्पताल ने बताया कि उनके शरीर में पानी की कमी के संकेत हैं और डॉक्टरों की लगातार सलाह के बावजूद वह मुंह से या नसों के जरिए तरल पदार्थ लेने से इनकार कर रहे हैं।
गीतांजलि अंगमो ने शनिवार को भी आरोप लगाया था कि जो डॉक्टर भूख हड़ताल शुरू होने के बाद से लगातार सोनम वांगचुक की निगरानी कर रहे थे, उन्हें अब उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी अनुमति के बिना सोनम वांगचुक को न तो कोई दवा दी जाए और न ही कोई तरल पदार्थ।अस्पताल से भी आंदोलन का संदेश
इस बीच गीतांजलि अंगमो ने सोनम वांगचुक का एक संदेश भी साझा किया। इसमें उन्होंने 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च का समर्थन करते हुए लोगों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की।
संदेश में लिखा गया, 'संसद की ओर मार्च करें। इसे सफल बनाइए। यह भारत का दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन है।' सोनम वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने और उनकी पत्नी द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट का रुख करने के बाद अब इस पूरे मामले पर अदालत की सुनवाई और सरकार की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।