जेईई का एक अभ्यर्थी।
उनकी दलीलें हैं कि देशभर में आईआईटी के लिए 10 लाख से ज़्यादा छात्रों ने फ़ॉर्म भरे हैं जबकि नीट की परीक्षा के लिए 16 लाख से ज़्यादा छात्रों ने आवेदन दिया है। ऐसे में यदि इनके एक-एक अभिभावक भी परीक्षा स्थल पर छात्र के साथ आए तो 52 लाख लोग बाहर निकलेंगे जिनमें कई डायबिटीज़, हार्ट डिज़ीज जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित हो सकते हैं। ऐसे में उनके लिए ख़तरा रहेगा।छात्रों की एक अन्य दलील है कि परीक्षा केंद्र को दोगुना कर देने के बाद भी भीड़ काफ़ी होगी और कोविड नियमों का पालन नहीं हो सकेगा जैसा कि हाल में आयोजित कई परीक्षाओं में देखने को मिला है।
छात्र पूछते हैं कि गंभीर हालत में कोरोना पॉजिटिव मरीज़ छात्र कैसे परीक्षा में शामिल होंगे। परीक्षा के दौरान स्टाम्प या दस्तख़त देने के दौरान इनविजिलेटर से लेकर अलग-अलग छात्र तक उसे छुएँगे। ऐसे में संक्रमण बढ़ने का ख़तरा रहेगा।
लॉकडाउन की वजह से पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा अधिकतर राज्यों या जगहों पर नहीं है। ख़ासकर कंटेनमेंट ज़ोन में तो घर से निकलना भी मुश्किल है। यदि पब्लिक ट्रांसपोर्ट मिलता भी है तो संक्रमण फैलने का ख़तरा बहुत ज़्यादा रहेगा।इसके अलावा भी छात्रों ने कई दलीलें रखी हैं। उनका कहना है कि महाराष्ट्र, आँध्र प्रदेश, तमिलनाडु जैसे राज्यों में काफ़ी ज़्यादा संक्रमण के मामले हैं, बिहार और असम जैसे राज्यों में बाढ़ की स्थिति है। ऐसे में छात्र और उनके अभिभावक कैसे परीक्षा दे पाएँगे।