एसवाईएल नहरः कब बुझेगी हरियाणा की प्यास
हरियाणा के लिए एसवाईएल का मुद्दा बहुत ही महत्वपूर्ण है। दक्षिण हरियाणा का इलाका किसी नदी के अभाव में नहरी पानी से पूरी तरह वंचित है। एसवाईएल नहर पूरी होने पर इसका सबसे ज्यादा फायदा दक्षिण हरियाणा के भिवानी, चरखीदादरी, मेवात, महेन्द्रगढ़, गुड़गांव की प्यास बुझाई जा सकती है। गर्मी में हर साल गुड़गांव में पेयजल को लेकर प्रदर्शन होते हैं। हालांकि फरीदाबाद भी दक्षिण हरियाणा का पार्ट है लेकिन वहां यमुना का पानी रैनीवेल के जरिए लाकर कुछ हद तक कमी को पूरा किया गया है। इसके बावजूद गुड़गांव के बाद फरीदाबाद भी पेयजल संकट से जूझता रहता है।
एसवाईएल पर हरियाणा का बहुत स्पष्ट स्टैंड है कि एसवाईएल नहर का निर्माण और पानी की उपलब्धता का आपस में कोई संबंध नहीं है। पानी का आवंटन पानी की उपलब्धता के आधार पर उसी अनुपात के आधार पर किया जाएगा, जैसा 1981 के समझौते में प्रावधान किया गया था।
8 अप्रैल, 1982 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने एसवाईएल योजना की शुरुआत पंजाब के पटियाला जिले के कपुरई गांव से किया। एसवाईएल की ज़रूरत हरियाणा के किसानों को ज़्यादा थी लेकिन पंजाब के किसान इसलिए परेशान थे कि अगर हरियाणा को उसके हिस्से का पानी मिल जाएगा तो पंजाब के खेतों के लिए पानी कम पड़ जाएगा।