टीएमसी की बुधवार को भिड़ंत हो गई। किसी राजनीतिक पार्टी से नहीं, बल्कि चुनाव आयोग से ही। टीएमसी ने आरोप लगाया कि इसके प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग के साथ बैठक की तो उनको बोल दिया गया 'गेट लॉस्ट' यानी 'दफ़ा हो जाओ'। चुनाव आयोग ने भी टीएमसी नेताओं पर चिल्लाने का आरोप लगाया। लेकिन असली भिड़ंत तो चुनाव आयोग की एक्स पर पोस्ट से हुई। चुनाव आयोग ने पोस्ट में लिख दिया, 'चुनाव आयोग की तृणमूल कांग्रेस को दो टूक'। इस पोस्ट पर टीएमसी ने तो हमला किया ही, एक्स यूज़रों ने भी तंज में ईसीआई से कह दिया कि क्या अब नकाब भी उतार फेंक दिया! कई यूजरों ने लिखा कि 'आपको हर बार जाहिर करने की जरूरत नहीं है, देश को समझ आता है कि आप किस टीम से बैटिंग कर रहे हैं।

बैठक में हुआ बवाल

दरअसल, तृणमूल कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल की बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त सहित पूरे चुनाव आयोग के साथ बैठक सिर्फ सात मिनट में ही नोकझोंक तक पहुँच गई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। टीएमसी का कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने उनसे कहा- 'दफ़ा हो जाओ'। वहीं चुनाव आयोग के सूत्रों ने दावा किया कि टीएमसी सांसद डेरेक ओब्रायन चिल्ला रहे थे और उन्होंने आयुक्तों से बात न करने को कहा।
ताज़ा ख़बरें

क्या हुआ बैठक में?

टीएमसी के राज्‍यसभा सांसद डेरेक ओब्रायन ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नौ पत्र मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सौंपे। इन पत्रों में चुनाव अधिकारियों के भाजपा से कथित संबंधों की शिकायत की गई थी। ओब्रायन ने कहा, 'बैठक सुबह 10:02 बजे शुरू हुई और 10:07 बजे ख़त्म हो गई। जब हमने अधिकारियों के ट्रांसफर और निष्पक्ष चुनाव कराने की बात की तो उन्होंने कहा- 'दफा हो जाओ'। आठ-नौ बार हम चुनाव आयोग से मिल चुके हैं, लेकिन मुख्य आयुक्त के अलावा किसी ने कुछ नहीं बोला।'

मुख्य चुनाव आयुक्त को बधाई!

उन्होंने आगे कहा कि बैठक से बाहर निकलते समय उनके एक साथी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को बधाई दी कि वे भारत के इकलौते ऐसे मुख्य आयुक्त हैं, जिनके खिलाफ लोकसभा और राज्यसभा दोनों में हटाने का नोटिस लाया गया है। टीएमसी ने चुनाव आयोग पर संस्थागत पूर्वग्रह का आरोप लगाया। उन्होंने दो मुख्य मुद्दे उठाए-
  • ममता बनर्जी के नौ पत्रों पर चुनाव आयोग का लंबे समय से चुप रहना।
  • नंदीग्राम में मुख्य चुनाव अधिकारी और एक वरिष्ठ भाजपा नेता के बीच कथित सांठगांठ।
डेरेक ओब्रायन ने कहा, 'चुनाव आयोग ने हमें अपमानित किया और परिसर छोड़ने को कहा। फिर उन्होंने सोशल मीडिया पर झूठी जानकारी फैलाई। यह भाजपा की साजिश है। लोकतंत्र की आत्मा पर हमला है।'

चुनाव आयोग की पोस्ट पर बवाल

बैठक को लेकर हुए विवाद के बाद चुनाव आयोग ने एक्स पर पोस्ट किया और टीएमसी का नाम लेकर कहा इसको दो टूक कहा गया। इसने पोस्ट में लिखा,
"चुनाव आयोग की तृणमूल कांग्रेस को दो टूक
पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव:
भय रहित,
हिंसा रहित,
धमकी रहित,
प्रलोभन रहित,
छापा रहित,
बूथ एवं सोर्स जामिंग रहित होकर ही रहेंगे।"
चुनाव आयोग की पोस्ट पर टीएमसी नेता सागरिका घोष ने लिखा, "झूठ। सरासर झूठ। आज सुबह जब हम मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आोयग से मिले, तो चार सदस्यों वाले टीएमसी प्रतिनिधिमंडल डेरेक ओब्रायन, मेनका गुरुस्वामी, साकेत गोखले और मुझे— इनमें से कुछ भी नहीं कहा गया। मुख्य चुनाव आयुक्त Vanish Kumar ने हमसे सिर्फ़ दो बातें कहीं। पहली बात- 'आपका अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता कहाँ है?' और दूसरी, सबसे ज़्यादा शर्मनाक दो शब्द- 'दफ़ा हो जाओ'।"

टीएमसी की चुनौती

टीएमसी ने चुनाव आयोग को चुनौती दी है कि बैठक का वीडियो या ऑडियो रिकॉर्डिंग सार्वजनिक करे। ओब्रायन ने कहा, 'मैं चुनौती देता हूं कि जो हुआ उसका वीडियो या ऑडियो जारी करें।' टीएमसी सांसद साकेत गोखले ने भी चुनाव आयोग के बयान को झूठ बताया और कहा कि वह खुद बैठक में थे और कुछ भी ऐसा नहीं हुआ जैसा चुनाव आयोग बता रहा है।

चुनाव आयोग का जवाब

चुनाव आयोग के सूत्रों ने टीएमसी के आरोपों से इनकार किया। ईटी की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि डेरेक ओब्रायन ने चिल्लाकर बात की और मुख्य चुनाव आयुक्त से कहा- 'हम आपकी बात सुनने नहीं आए हैं।' रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने ओब्रायन से शिष्टाचार बनाए रखने को कहा और बताया कि 'चुनाव आयोग के कमरे में चिल्लाना और अनुचित व्यवहार ठीक नहीं है।' टीएमसी प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी और फिर वह बैठक से बाहर चला गया।

सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया यूज़रों ने चुनाव आयोग पर पूर्वग्रह से ग्रसित होने का आरोप लगाया। प्रभात प्रणीत नाम के यूज़र ने लिखा, 'गजब, यह चुनाव आयोग की भाषा है। अर्थात अब निष्पक्षता का अभिनय भी नहीं करना है। मुझे विश्वास नहीं हुआ कि यह हिंदुस्तान के चुनाव आयोग का ऑफिसियल हैंडल है। चंद वर्षों में इस देश की सारी संवैधानिक संस्थाएं बर्बाद हो गई है। अंधभक्त और गोदी मीडिया की इस पाप में बरबाद की भागीदारी है।'
अजीत सिंह नाम के यूज़र ने लिखा है, 'क्या बेवकूफी वाली ट्वीट है यार, विशेष पार्टी का नाम ना लेकर, "सभी पार्टियों को दो टूक बोल देते भाई"। करेक्शन कर लो भाई और सोशल मीडिया वाले बंदे को हटा के मुझे ही रख लो तुम्हारे साथ मेरा भी भला हो जाएगा।"
अमरेंद्र बाहुबली नाम के पैरोडी हैंडल से लिखा गया, "ज्ञानेश जी, देश को समझ आता है कि आप किस टीम से बैटिंग कर रहे हो! आपको हर बार जाहिर करने की जरूरत नहीं है। जय भाजपा, तय भाजपा। अबकी बार, ज्ञानेश की चुनी सरकार। (जनता जाए भाड़ में, साहेब की संतुष्टि जरूरी है)"।

आगे क्या?

डेरेक ओब्रायन ने बताया कि आज यानी बुधवार शाम 4-4:30 बजे संविधान क्लब में सभी विपक्षी पार्टियां संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगी। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग की मांग पर चर्चा होगी।

यह घटना पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच बढ़ते तनाव को दिखाती है। दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं और राजनीतिक गर्मी तेज हो गई है। अभी तक न तो बैठक की रिकॉर्डिंग जारी हुई है और न ही कोई स्पष्ट तस्वीर सामने आई है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात पर अड़े हुए हैं।