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बढ़े दाम पर तंज- 'टमाटर की चटनी खाने वालों पर होगी आयकर विभाग की नज़र!'

अब टमाटर के बढ़े दाम पर हंगामा मचा है। वैसे, तो पिछले कई दिनों से इसके दाम बढ़ रहे थे, लेकिन इस पर बवाल तब मचा जब ख़बर आई कि टमाटर 160 रुपये प्रति किलो पहुँच गया। हालाँकि उत्तर भारत में अधिकतर जगहों पर टमाटर के दाम 80-120 रुपये प्रति किलो मिल रहे हैं, लेकिन हाल ही में बाढ़ से प्रभावित रहे चेन्नई में इसकी क़ीमत 160 रुपये प्रति किलो तक पहुँच गयी। 

देश के ज्यादातर क्षेत्रों में किसानों को औसतन 20 से लेकर 50 रुपये प्रति किलो तक का दाम मिल रहा है। कुछ ही क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ इससे ज़्यादा दाम किसानों को मिल रहे हैं। बाढ़ के मौक़े का अधिकतर फायदा बिचौलिए और खुदरा विक्रेता उठा रहे हैं।

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दिल्ली में कई जगहों पर खुदरा में टमाटर 120 रुपये प्रति किलो तक मिल रहे हैं। उत्तराखंड में टमाटर के दाम 80 रुपये पहुँच गए हैं। थोक कारोबारियों के अनुसार सर्दियों के मौसम में टमाटर औसत रूप से 20 रुपये प्रति किलो मिलते थे, लेकिन इस बार यह दाम अप्रत्याशित है। बढ़ रहे टमाटर के दामों ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। मध्य वर्ग की थाली से टमाटर ग़ायब हो गया है। 

टमाटर के इतने महंगे होने पर हंगामा तो मचना ही था! क्या विपक्ष और क्या सोशल मीडिया यूज़र, सबने अलग-अलग तरह से इस पर तंज कसे हैं।

कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा है, 'आज टमाटर और प्याज की ये स्थिति है कि जैसे किचन में इन दोनों पर धारा 144 लगी हो, इन्हें 4 से ज्यादा नहीं रख सकते। ये इतने अधिक महंगे हो चुके हैं।'

सेवानिवृत्त आईएएस ने बढ़ी महंगाई पर तंज कसा है और लिखा है, 'टमाटर की चटनी खाने वालों पर भी होगी आयकर विभाग की नजर।'

इस पर प्रतिक्रिया में पत्रकार रोहिणी सिंह ने लिखा है, 'शेर पालना है तो चटनी का बलिदान देना होगा!'

उमाशंकर सिंह ने गिनती से टमाटर बिकने की एक ख़बर को ट्वीट कर लिखा है 'गनीमत है अभी चम्मच से नहीं बिक रहा!'

परंजॉय गुहा ठाकुरता ने कंगना रनौत की एक मीम को ट्वीट किया है जिस पर लिखा है '2 किलो टमाटर खरीद कर घर लौटते हुए'। 

देश में टमाटर की सबसे ज्यादा पैदावार आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में होती है। लेकिन हाल में इन प्रदेशों में तेज बारिश की वजह से टमाटर की पैदावार पर असर पड़ा है। आंध्र प्रदेश में इसका सबसे ज़्यादा उत्पादन चित्तूर और अनंतपुर जिलों में होता है, लेकिन ये ज़िले बाढ़ से सबसे ज़्यादा प्रभावित रहे। आपूर्ति कम होने से दाम बढ़ गए। 
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