दिल्ली दंगों की कथित 'बड़ी साजिश' से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया। इस फैसले के बाद उमर खालिद की दोस्त के ज़रिए उनकी प्रतिक्रिया सामने आई है। कोर्ट ने एक्टिविस्ट उमर खालिद और शारजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी, जबकि पांच अन्य सह-आरोपियों को सशर्त जमानत दे दी। कोर्ट ने कहा कि उमर खालिद और शारजील इमाम पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है और अन्य आरोपियों के मुकाबले वो 'अलग स्थिति' में हैं।

उमर खालिद की प्रतिक्रिया

जमानत खारिज होने के बाद उमर खालिद की पार्टनर बनज्योत्सना लाहिड़ी ने सोशल मीडिया पर उनकी बातचीत साझा की। लाहिड़ी के अनुसार, उमर ने कहा, "मैं वाकई उन लोगों के लिए खुश हूं जिन्हें जमानत मिली! बहुत राहत महसूस कर रहा हूं।" जब लाहिड़ी ने कहा कि वह मंगलवार को जेल मुलाकात के लिए आएंगी, तो उमर ने जवाब दिया, "अच्छा-अच्छा, आ जाना। अब यही जिंदगी है।"

इससे पहले उमर खालिद के पिता सैयद कासिम रसूल इलियास ने फैसले पर गहरी निराशा जताई। उन्होंने कहा, "यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। फैसला आ गया है, इसके बारे में मैं कुछ नहीं कहना चाहता। पूरा फैसला आप लोगों के सामने है।"

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सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले शामिल थे, ने फैसले में स्पष्ट किया कि खालिद और इमाम की कथित साजिश में भूमिका 'केंद्रीय और निर्देशक' स्तर की थी, जबकि अन्य आरोपियों की भूमिका कम थी। जमानत पाने वाले पांच आरोपी हैं- गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद। इन पर सख्त शर्तें लगाई गई हैं, जैसे गवाहों को प्रभावित न करना और सबूतों से छेड़छाड़ न करना।

फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक घायल हुए थे। दंगे में मारे गए लोगों में सबसे ज्यादा संख्या मुस्लिमों की थी। हालांकि दिल्ली पुलिस ने उमर खालिद, शारजील इमाम सहित कई लोगों पर दंगों की 'बड़ी साजिश' रचने का आरोप लगाया। इन पर यूएपीए और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराएं लगाई गई हैं। आरोपी इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं। उमर खालिद पिछले पांच वर्षों से अधिक समय से जेल में हैं, जबकि ट्रायल अभी शुरू भी नहीं हुआ है। 

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सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ट्रायल में देरी जमानत पाने के लिए 'जादुई कार्ड' नहीं बन सकती। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यूएपीए जैसे विशेष कानून में जमानत की शर्तें सख्त हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा तथा सार्वजनिक व्यवस्था को ध्यान में रखा जाना चाहिए। हालांकि, खालिद और इमाम को एक साल बाद या संरक्षित गवाहों की परीक्षा पूरी होने पर फिर जमानत याचिका दाखिल करने की छूट दी गई है।