अमेरिकी सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज कमीशन ने 14 महीनों तक समन तामील नहीं हो पाने के बाद अदालत का दरवाजा खटखटाया है। क्या मोदी सरकार को दरकिनार कर अडानी को समन भेजने की अनुमति मिलेगी?
मोदी सरकार पर अडानी को बचाने का आरोप तो देश में लगता रहा है, लेकिन अब अमेरिकी सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड कमिशन ने अदालत में यही बात खुले तौर पर कही है। एक रिपोर्ट के अनुसार इसने कहा है कि गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी को क़ानूनी नोटिस भेजने के बावूजद मोदी सरकार 14 महीने से रोक रही है। अब आयोग ने अमेरिकी फेडरल कोर्ट में अर्जी देकर कहा है कि भारत सरकार के रास्ते यानी हेग कन्वेंशन से काम नहीं बन रहा, इसलिए इसने कोर्ट से अनुमति मांगी है कि अडानी को सीधे उनके अमेरिकी वकीलों के ज़रिए और ईमेल से समन भेजा जा सके।
यह मामला नवंबर 2024 में शुरू हुआ था, जब अमेरिका के सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड कमिशन यानी एसईसी ने गौतम अडानी और सागर अडानी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने अडानी ग्रीन एनर्जी कंपनी के ज़रिए भारतीय अधिकारियों को करोड़ों रुपये की रिश्वत दी या देने का वादा किया। यह सब सोलर पावर प्रोजेक्ट हासिल करने के लिए किया गया। कंपनी ने 2021 में 750 मिलियन डॉलर के बॉन्ड जारी किए थे, जिसमें अमेरिकी निवेशकों से क़रीब 175 मिलियन डॉलर जुटाए गए। एसईसी का कहना है कि बॉन्ड बेचते समय कंपनी ने अपनी भ्रष्टाचार-रोधी नीतियों के बारे में गलत और भ्रामक जानकारी दी।
इसके साथ ही अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने आपराधिक केस भी दर्ज किया था, जिसमें सिक्योरिटीज फ्रॉड, वायर फ्रॉड जैसे गंभीर आरोप हैं। अडानी ग्रुप ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया था और कहा था कि वे कानूनी तरीके से लड़ेंगे।
हेग कन्वेंशन के ज़रिए कोशिशें नाकाम
अमेरिका और भारत दोनों हेग सर्विस कन्वेंशन के सदस्य हैं। यह कन्वेंशन विदेश में क़ानूनी दस्तावेज भेजने का अंतरराष्ट्रीय तरीक़ा है। द वायर की रिपोर्ट के अनुसार एसईसी ने फ़रवरी 2025 में भारत के क़ानून मंत्रालय को समन भेजने की रिक्वेस्ट दी थी। एसईसी के समन को क़ानून मंत्रालय ने अहमदाबाद की सत्र अदालत को भेजा, लेकिन अप्रैल 2025 में वापस कर दिया। कारण बताया गया कि कवर लेटर पर सील और हस्ताक्षर नहीं हैं। एसईसी ने कहा कि हेग कन्वेंशन में ऐसी ज़रूरत नहीं है।
इसके बाद एसईसी ने मई 2025 में दोबारा रिक्वेस्ट भेजी, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। रिपोर्ट है कि कई फॉलो-अप ईमेल भी बिना जवाब के रहे। दिसंबर 2025 में मंत्रालय ने नयी आपत्ति जताई और कहा कि एसईसी के अपने नियम 5(बी) के आधार पर यह मामला उन श्रेणियों में नहीं आता जहां समन भेजा जा सकता है। एसईसी ने इसे बेबुनियाद बताया और कहा कि यह नियम कन्वेंशन से जुड़ा नहीं है, बल्कि एसईसी की आंतरिक प्रक्रिया का है।
एसईसी ने कोर्ट को बताया, 'मंत्रालय की स्थिति और इतना समय बीत जाने के बाद हम उम्मीद नहीं करते हैं कि हेग कन्वेंशन से यह पूरा हो पाएगा। भारत या अंतरराष्ट्रीय क़ानून में कोई दूसरा तरीक़ा भी नहीं दिख रहा।'
अब क्या करेगा अमेरिकी आयोग?
अमेरिकी आयोग ने न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट फेडरल कोर्ट में 21 जनवरी 2026 को याचिका दाखिल की। द वायर की रिपोर्ट के अनुसार जज निकोलस जी. गरौफिस से अनुरोध किया कि फ़ेडरल रूल्स ऑफ़ सिविल प्रोसीजर के नियमों के तहत वैकल्पिक तरीक़े की इज़ाज़त दी जाए।
रिपोर्ट के अनुसार सागर अडानी ने लॉ फर्म Hecker Fink LLP को हायर किया है, जिसके वकील ने दिसंबर 2024 में इसकी पुष्टि की। गौतम अडानी ने Kirkland & Ellis LLP और Quinn Emanuel Urquhart & Sullivan LLP को रखा है। इनके वकीलों ने फरवरी 2025 में एसईसी से संपर्क किया था। एसईसी का तर्क है कि इन वकीलों के माध्यम से 'नोटिस मिलना लगभग तय' है, क्योंकि वे अडानी केस के बारे में जानते हैं।
ईमेल से क़ानूनी नोटिस के लिए एसईसी ने कहा कि जाँच में 100 से ज़्यादा दस्तावेज मिले हैं, जो दिखाते हैं कि दोनों अडानी अपने कॉर्पोरेट ईमेल इस्तेमाल करते हैं। ये ईमेल बिजनेस से जुड़े हैं, बॉन्ड ऑफरिंग से संबंधित हैं और मार्च 2024 तक के हैं। एसईसी को लगता है कि ये ईमेल अभी भी एक्टिव और मॉनिटर किए जा रहे हैं।
अडानी के सार्वजनिक बयानों, रेगुलेटरी फ़ाइलिंग्स और वकील रखने से साफ़ है कि वे केस के बारे में पूरी तरह जानते हैं।
अब कोर्ट फ़ैसला करेगा कि क्या ईमेल और वकीलों के ज़रिए क़ानूनी नोटिस मान्य होगा। अगर हाँ तो केस आगे बढ़ सकता है। यह मामला भारत-अमेरिका संबंधों और बड़े बिजनेस पर असर डाल सकता है। अडानी ग्रुप ने अभी तक एसईसी की इस नई याचिका पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन पहले आरोपों को खारिज किया था।