सोनिया गांधी
यह बिल मुसलमानों को हाशिए पर धकेलने और उनके निजी कानूनों व संपत्ति अधिकारों को हड़पने का हथियार है। RSS, BJP और उनके सहयोगियों द्वारा संविधान पर यह हमला आज मुसलमानों पर है, लेकिन भविष्य में अन्य समुदायों को भी निशाना बनाएगा।
विपक्षी दलों ने इस बिल को "असंवैधानिक" और "मुस्लिम-विरोधी" करार दिया। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे "ध्रुवीकरण की चाल" करार दिया और कहा कि यह BJP के लिए "वाटरलू" साबित होगा। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, "यह बिल संविधान को कमजोर करने, अल्पसंख्यक समुदायों को बदनाम करने, भारतीय समाज को बाँटने और अल्पसंख्यकों को उनके अधिकारों से वंचित करने का प्रयास है।" AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रतीकात्मक विरोध के तौर पर बिल की प्रति फाड़ दी।