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क्या कमर्शल एलपीजी सिलेंडर महंगा करने तक ही रुकेगी मोदी सरकार ?

होटलों, दुकानों, रेस्टोरेंट, छोटे कल-कारखानों में इस्तेमाल होने वाले कमर्शल (व्यावसायिक) एपीजी सिलेंडर की कीमतें आज से बढ़ा दी गईं। इस बढ़ोतरी की आंच आम लोगों तक तो पहुंचेगी ही, इसके साथ ही पेट्रोल-डीजल, घरेलू एलपीजी सिलेंडर, सीएनजी के दामों में भी 7 मार्च के बाद किसी भी समय रेट बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। कहा जा रहा है कि यूपी चुनाव के आखिरी चरण का मतदान 7 मार्च को है, उसके बाद सरकार इन चीजों के रेट बढ़ा सकती है। वजह ये है कि यूक्रेन-रूस युद्ध की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती चली जा रही हैं। लेकिन भारत में सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों को चुनाव की वजह से स्थिर रखा हुआ है। 1 मार्च से कमर्शल एलपीजी सिलेंडर दिल्ली में प्रति 19 किलोग्राम 105 रुपये बढ़ गया। इस बदलाव के बाद राजधानी दिल्ली में 19 किलो सिलेंडर की कीमत 2,012 रुपये प्रति यूनिट हो गई है।
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1 मार्च, 2022 से 5 किलो के सिलेंडर की कीमत को भी बदल कर 569 रुपये प्रति यूनिट कर दिया गया। गैर-सब्सिडी वाले 14.2 किलोग्राम सिलेंडर की कीमत, हालांकि मौजूदा स्तरों पर ही रखी गई थी। 

फिलहाल दिल्ली और मुंबई में बिना सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडर की कीमत 899.5 रुपये प्रति 14.2 किलोग्राम है। कोलकाता में, कीमत 926 रुपये प्रति सिलेंडर है, और चेन्नई में यह 915.5 रुपये प्रति सिलेंडर है।एलपीजी की दरें हर शहर में अलग-अलग होती हैं और मासिक आधार पर इसकी समीक्षा की जाती है। कीमतों में कोई भी बदलाव हर महीने के पहले दिन से लागू किया जाता है।

बहरहाल, फरवरी से ठीक पहले, सिर्फ पांच महीनों में ही कमर्शल एलपीजी कीमतों में पांच गुणा बढ़ोतरी देखी गई। कीमतों में आखिरी बार 1 नवंबर को और उससे पहले 15 अक्टूबर को बढ़ोतरी की गई थी।
तमाम मीडिया रिपोर्टों में इस बात के संकेत दिए जा रहे हैं कि अप्रैल 2022 से रसोई गैस की कीमतों में तेज वृद्धि हो सकती है। रसोई गैस सिलेंडर के अलावा, सीएनजी, पीएनजी और यहां तक ​​कि बिजली की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है। सीएनजी, बिजली और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी से ट्रांसपोर्ट लागत और ऑपरेशन खर्च में वृद्धि हो सकती है। रसोई गैस, सीएनजी, पीएनजी और अन्य पेट्रोलियम सामानों की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से उपभोक्ताओं को दैनिक वस्तुओं और सेवाओं के लिए अधिक भुगतान करना पड़ सकता है।

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रूस-यूक्रेन संकट भी आम आदमी के संकट को बढ़ाने वाला है। क्योंकि पूर्व यूरोपीय देश भी पाइपलाइनों के जरिए गैस का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता है। इस संकट से सप्लाई बाधित हो सकती है। इसके अलावा, बढ़ता युद्ध संकेत कर रहा है गैस और पेट्रोलियम की कीमतों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।

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