जुलाई, 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद कारखाना उत्पादन वृद्धि गिर कर 0.3 प्रतिशत तक जा पहुँची थी। हालाँकि आईआईपी में बढोतरी दर्ज़ की गई थी, लेकिन भारत की रेटिंग से यह साफ़ था कि औद्योगिक स्थिति अच्छी नहीं है।
पहले अनुमान था कि विकास दर 7.1% रह सकती है। विश्व बैंक ने इसके बारे में 7.5%का अनुमान लगाया था, लेकिन ख़ुद भारत सरकार के स्टेटेस्टिक्स और प्रोग्राम इम्पलीमेंटेशन मंत्रालय ने जबसे 2018-19 की दूसरी तिमाही के नतीजे को 6.6% बताया, दुनियाँ चौंक पड़ी और सब अपने काग़ज़ दुरुस्त करने लगे। पहली तिमाही में यह दर 7% थी।