निशिथ देसाई एसोसिएट्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि “अनिवासी निवेशकों को सभी प्रकार की संपत्तियों पर एलटीसीजी टैक्स की उच्च दर से नुकसान होगा। यहां तक कि एफपीआई के लिए भी, सूचीबद्ध प्रतिभूतियों के लिए टैक्स की दर एलटीसीजी के मामले में 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत और एसटीसीजी के मामले में 15 फीसदी से 20 फीसदी कर दी गई है।”