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शेयर गिरने से अडानी समूह को 82 ख़रब रुपये का नुक़सान

अडानी समूह की कंपनियों के शेयर गुरुवार को भी धड़ाम गिरे। अधिकतर कंपनियों का शेयर लोअर सर्किट पर बंद हुआ। समूह की सबसे प्रमुख कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज में भी आज लगातार दूसरे दिन बड़ी गिरावट आई। दोपहर डेढ़ बजे तक इसके शेयर में 19 फ़ीसदी से ज़्यादा गिरावट आई। एक दिन पहले यानी बुधवार को तो इसके शेयरों में 28 फ़ीसदी से ज़्यादा गिरावट आई थी। 

हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के बाद से अडानी कंपनियों के शेयरों की क़ीमतें धड़ाम गिरी हैं और इससे अब तक 1 ख़रब डॉलर यानी क़रीब 82 ख़रब रुपये का नुक़सान हुआ है। यह गिरावट अब कई कंपनियों में 40 फ़ीसदी से ज़्यादा हो गई है। हिंडनबर्ग अमेरिका स्थित निवेश रिसर्च फर्म है जिसे एक्टिविस्ट शॉर्ट-सेलिंग में महारत हासिल है। हिंडनबर्ग रिसर्च ने उद्योगपति गौतम अडानी की कंपनियों पर स्टॉक में हेरफेर और लेखा धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हमने अपनी रिसर्च में अडानी समूह के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों सहित दर्जनों व्यक्तियों से बात की, हजारों दस्तावेजों की जांच की और इसकी जांच के लिए लगभग आधा दर्जन देशों में जाकर साइट का दौरा किया।

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यह रिपोर्ट अडानी समूह की प्रमुख कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज की 20,000 करोड़ रुपये की फॉलो-ऑन शेयर बिक्री से पहले आई। समूह का फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर यानी एफपीओ 31 जनवरी को बंद हो गया। हालाँकि तय समय में यह पूरी तरह सब्सक्राइब्ड हो गया था, लेकिन इस बीच समूह ने शेयर बाज़ार में उथल-पुथल के बीच अपने एफ़पीओ को वापस लेने यानी रद्द करने की घोषणा कर दी है। 

एफ़पीओ रद्द किए जाने के बाद भी अडानी की कंपनियों के शेयरों की क़ीमतें गिरनी जारी रहीं। दोपहर डेढ़ बजे तक अडानी ट्रांसमिशन, अडानी टोटल गैस, अडानी ग्रीन एनर्जी और अडानी गैस के शेयर लोअर सर्किट के स्तर पर 10 फ़ीसदी गिरे। 

अडानी विल्मर लिमिटेड लोअर सर्किट के स्तर पर 5 फ़ीसदी और अडानी पावर 4.98 फ़ीसदी पर रहा। अडानी पोर्ट के शेयर क़रीब साढ़े पाँच फ़ीसदी नीचे चल रहे हैं। अडानी समूह के ही एनडीटीवी के शेयर लोअर सर्किट पर 4.99 फ़ीसदी नीचे रहे।
विवादों में घिरे अरबपति गौतम अडानी ने गुरुवार को जोर देकर कहा है कि उनके समूह के फंडामेंटल मजबूत थे। लेकिन इसके बावजूद अमेरिकी फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा पिछले सप्ताह किए गए दावों के बाद अडानी के साम्राज्य को 1 ख़रब डॉलर से अधिक का नुक़सान हुआ है।
अडानी एंटरप्राइजेज में एफ़पीओ लाने यानी शेयरों की बिक्री का उद्देश्य कर्ज के स्तर को कम करने में मदद करने के लिए लगभग 2.5 बिलियन डॉलर जुटाना था। लेकिन इससे छोटे निवेशक दूर रहे क्योंकि बाजार मूल्य प्रस्ताव सीमा से नीचे गिर गया था। हालाँकि, कई बड़े निवेशकों ने कंपनी के शेयर खरीदने के लिए आवेदन किया और एफ़पीओ पूरी तरह सब्सक्राब्ड हो गया था। 
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इस बीच अडानी एंटरप्राइजेज के शेयर की क़ीमत बुधवार को मुंबई में 28.45 प्रतिशत गिर गई। समझा जाता है कि यह गिरावट इसलिए आई क्योंकि ब्लूमबर्ग ने रिपोर्ट दी कि स्विस बैंकिंग दिग्गज क्रेडिट सुइस ने निजी बैंकिंग ग्राहकों को दिए गए ऋणों के लिए अडानी के बॉन्ड को स्वीकार करना बंद कर दिया था।

शेयरों में ऐसी गिरावट के बीच ही अडानी एंटरप्राइजेज बोर्ड ने देर रात के एक बयान में कहा कि उसने "अपने ग्राहकों के हित में" एफ़पीओ को वापस लेने का फ़ैसला किया है और सभी भुगतान वापस कर दिए जाएंगे। हालाँकि इस घोषणा के बाद भी अडानी के शेयरों में गिरावट जारी है। 

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क़मर वहीद नक़वी
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