वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार 1 फरवरी को केंद्रीय बजट 2026 पेश करने जा रही है। इनकम टैक्स में राहत से लेकर नौकरियां पैदा तक, एक आम भारतीय को इससे क्या उम्मीदें हैं, जानिएः
रविवार यानी 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करेंगी। आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) ने देश की अर्थव्यवस्था की सुनहरी तस्वीर पेश की है, लेकिन दूसरी ओर आम आदमी की निगाहें अपनी जेब और रसोई के बजट पर टिकी हैं। उसके बच्चों को नौकरियां मिलेंगी या नहीं। कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य की स्थिति अगले वित्तीय वर्ष में क्या रहने वाली है।
नौकरीपेशा वर्ग को क्या चाहिए?
सैलरी पाने वाले मध्यम वर्ग के लिए सबसे बड़ा मुद्दा हमेशा की तरह इनकम टैक्स ही है। अप्रैल से नया आयकर अधिनियम लागू होने जा रहा है, ऐसे में टैक्स देने वाले लोग बड़े बदलावों के बजाय राहत की उम्मीद कर रहे हैं। एक सर्वे में यह बात सामने आई है कि तमाम नौकरीपेशा लोगों ने कहा है कि उन्हें नई टैक्स व्यवस्था पसंद है, लेकिन महंगाई को देखते हुए स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) में बढ़ोतरी की जरूरत है।स्टैंडर्ड डिडक्शन: लोग चाहते हैं कि इसे 75,000 रुपये से बढ़ाकर कम से कम 1 लाख रुपये किया जाए।
टैक्स स्लैब में सुधार: 12 लाख से 20 लाख रुपये तक की आय वालों के लिए टैक्स की दरें थोड़ी कम हों ताकि हाथ में आने वाली सैलरी (Take-home pay) बढ़ सके।
नियमों का सरलीकरण: टीडीएस (TDS) के नियमों को आसान बनाया जाए ताकि आम लोगों को टैक्स भरने के लिए विशेषज्ञों के चक्कर न काटने पड़ें।
महंगाई और स्वास्थ्य पर चिंता
सिर्फ टैक्स ही नहीं, बल्कि आम परिवारों के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य का खर्च भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। मुंबई से लेकर दिल्ली तक लोगों की शिकायत है कि स्कूल की फीस और रोजमर्रा के सामान की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।लोग उम्मीद कर रहे हैं कि हेल्थ इंश्योरेंस पर मिलने वाली छूट बढ़ाई जाए। पीएफ (PF) और एनपीएस (NPS) जैसे बचत माध्यमों पर बेहतर इंसेंटिव मिले। बढ़ते मेडिकल खर्चों को देखते हुए सरकार अस्पताल के बिलों पर कुछ विशेष राहत दे।
चुनाव और रोजगार का असर
इस साल पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में चुनाव होने वाले हैं। जानकारों का मानना है कि बजट में इन राज्यों के लिए हाईवे, शहरों के विकास और रोजगार से जुड़ी नई योजनाओं का ऐलान हो सकता है। युवाओं को उम्मीद है कि सरकार सिर्फ घोषणाएं नहीं करेगी, बल्कि MSME (छोटे उद्योगों) की मदद कर के असल में नौकरियां पैदा करेगी।आर्थिक सर्वेक्षण बनाम जमीनी हकीकत
हाल ही में पेश हुए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में जीडीपी (GDP) विकास दर 7.4% रहने का अनुमान लगाया गया है। सरकार भले ही अर्थव्यवस्था को लेकर उत्साहित हो, लेकिन आम आदमी के लिए बजट की कामयाबी इस बात से तय होगी कि उसके घर का राशन सस्ता होता है या नहीं और उसकी सैलरी में कितनी बचत होती है।पिछले साल इनकम टैक्स में क्या मिला था
स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction): पिछले साल नौकरीपेशा लोगों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन को 50,000 रुपये से बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया गया था।
टैक्स स्लैब में बदलाव: नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) के तहत स्लैब को संशोधित किया गया था, जिससे मध्यम वर्ग को टैक्स में बचत हुई। अब 7 लाख रुपये तक की सालाना आय पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ता (छूट के साथ यह सीमा और बढ़ जाती है)।
नया इनकम टैक्स कानून: सरकार ने पिछले साल ही पुराने इनकम टैक्स एक्ट की समीक्षा और एक नए सरल आयकर अधिनियम (Income Tax Act) की नींव रखी थी, जो इस साल अप्रैल 2026 से प्रभावी होने जा रहा है।
सोशल सेक्टर और सब्सिडी: प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत मुफ्त राशन को जारी रखने का प्रावधान किया गया था।
खेती और किसानों के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सहायता राशि (PM-Kisan) पर जोर दिया गया था।
पिछले साल कैपिटल गेन टैक्स (Capital Gains Tax) के नियमों में कुछ बदलाव किए गए थे, जिसमें शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म गेन की दरों को सरल बनाने की कोशिश की गई थी।
सरकार ने बुनियादी ढांचे (रेलवे, सड़क) पर खर्च बढ़ाया था ताकि अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर पैदा हों। इस साल (2026-27) भी लोग इन्हीं बदलावों को और आगे बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं, जैसे स्टैंडर्ड डिडक्शन को 1 लाख रुपये तक ले जाना।