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अर्थव्यवस्था में चौतरफा गिरावट, जीडीपी के और कम होने की आशंका

बजाज ऑटो प्रमुख राहुल बजाज के बाद अब लार्सन एंड टूब्रो के अध्यक्ष ए. के. नायक ने आर्थिक मुद्दों पर सरकार की आलोचना की है। उन्होंने साफ़ कहा कि सरकार जिस जीडीपी वृद्धि दर का दावा कर रही है, उससे कम वृद्धि दर रहेगी। इसके साथ ही उन्होंने निवेश पर चिंता जताई। इतना नहीं, नायक ने साफ़ शब्दों में कह दिया कि सरकार के आँकड़ों पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। 
देश की प्रमुख इंजीनियरिंग कंपनी लार्सन एंड टूब्रो के प्रमुख ने कहा कि सकल घरेलू उत्पाद बढ़ने की दर इस साल 6.50 प्रतिशत के आस पास रहेगी। उन्होंने कहा कि हालाँकि सरकार 7 प्रतिशत का दावा करती है, पर यदि हमारी तक़दीर अच्छी रही तो यह 6.5 प्रतिशत तक रह सकती है। इसके साथ ही उन्होंने निवेश पर चिंता जताई और कहा कि निवेश के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण समय है। 

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‘सरकारी आँकड़ों पर भरोसा नहीं’

नायक ने सरकारी आँकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि आंकड़ों पर लोगों को अपनी बुद्धि-विवेक से ही काम लेना पड़ेगा। नायक की बातों से यह साफ़ है कि कॉरपोरेट जगत सरकार के कामकाज से खुश नहीं है, उस पर भरोसा नहीं करता है और अब खुल कर बोलने भी लगा है। 

‘मुख्यमंत्री रहते मोदी ने जो किया, अब नहीं कर रहे’

नायक ने नरेंद्र मोदी की तारीफ़ की और यह संकेत भी दिया कि वे पहले की तरह काम नहीं कर पा रहे हैं।

जब टाटा ने गुजरात में मोटर कारखाना लगाना चाहा, सरकार के अफ़सर दिन रात कंपनी में बैठे रहे और हफ़्ते भर में तमाम प्रक्रिया पूरी हो गई। पर अब ऐसा नहीं हो रहा है। पर किसी परियोजना को सालों लटकाए नहीं रखा जा सकता।


ए. के. नायक, अध्यक्ष, लार्सन एंड टूब्रो

जीडीपी दर होगी कम : क्रिसिल

नायक की ये चिंता बेबुनियाद नहीं हैं। उन्होंने जीडीपी वृद्धि और निवेश कम होने की बात ऐसे समय कही है जब अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेन्सी क्रिसिल ने भी कहा है कि भारत में जीडीपी वृद्धि की दर उम्मीद से कम होगी। क्रिसिल ने कहा है कि कम खपत और माँग की वजह से इस साल भारत में सकल घरेलू उत्पाद बढ़ने की दर 6.9 प्रतिशत होगी। पहले कंपनी ने इसे 7.1 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया था। 
क्रिसिल ने कहा कि भारत में इस साल आर्थिक मंदी  उतनी बुरी नहीं होगी, जितनी वित्तीय वर्ष 2012-13 और 2013-14 के दौरान थी। साल 2020 की मंदी साल 2009 की तरह होगी, जब तेज़ी से सुधार भी हुआ था। 

निर्यात गिरने से हाल बदतर

क्रिसिल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ऑटो सेक्टर में बुरा हाल तो है ही, निर्यात सेक्टर के भी अच्छा कामकाज नहीं करने से दिक्क़तें बढ़ी हैं। इसने यह भी कहा है कि मानसून के ख़राब होने से कृषि क्षेत्र भी बहुत अच्छा नहीं कर पाएगा। लेकिन क्रिसिल को यह उम्मीद है कि सरकार खर्च बढ़ाएगी और बुनियादी ढाँचे पर खर्च करेगी, जिससे स्थिति सुधरेगी।

ऑटो सेक्टर में बिक्री का गिरना जारी

देश की बड़ी मोटर कंपनियों ने अपनी मासिक बिक्री के आँकड़े बृहस्पतिवार को जारी किए। बिक्री में कमी लगातार नौवें महीने देखी गई और जून में भी पैसेंजर कारों और दोपहिया वाहनों की बिक्री पहले से कम रही। 

मारुति की बिक्री 1 लाख के आँकड़े को भी नहीं छू पाई, इसकी बिक्री में 33.5 प्रतिशत की कमी देखी  गई। इसी तरह महिंद्रा एंड महिंद्रा की बिक्री 15 प्रतिशत गिरी। दुपहिया वाहनों की स्थित इससे बदतर ही रही है। टीवीएस मोटर की बिक्री में 13 फ़ीसदी तो रॉयल एनफ़ील्ड की बिक्री में 22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। 

कर उगाही कम

आर्थिक विकास की दर गिरने से यह स्वाभाविक है कि कर राजस्व की उगाही भी कम होगी। प्रत्यक्ष कर उगाही में वृद्धि बीते 10 के न्यूनतम स्तर पर है। अप्रैल-जून की कर उगाही कुल 4,00,421 करोड़ रुपए थी, यह पिछली तिमाही की कर उगाही से सिर्फ़ 1.36 प्रतिशत ज़्यादा है। कम्प्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल की रिपोर्ट के मुताबिक़ बीते साल इस दौरान प्रत्यक्ष कर उगाही में बढ़ोतरी 22.4 प्रतिशत थी। 

अर्थव्यवस्था सातवें स्थान पर

जिस अर्थव्यवस्था की स्थिति इतनी बुरी हो, पूरी अर्थव्यवस्था ही सुस्त हो चुकी हो, निवेश, निर्यात, माँग,खपत सब कुछ कम हो रहा हो, उसका क्या हश्र होगा, यह भी सबके सामने है। भारतीय अर्थव्यवस्था अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बुरी तरह फिसली है। यह पहले पाँचवे स्थान पर थी, बृहस्पतिवार को जारी आँकड़ों के हिसाब से यह सातवें स्थान पर आ गई। विश्व बैंक की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारत का सकल घरेलू उत्पाद 2.72 खरब डॉलर है। एक साल पहले भारत की जीडीपी 2.65 खरब डॉलर थी। इस समय भारत के ऊपर छठे स्थान पर फ्रांस (2.77 खरब डॉलर) और पाँचवे स्थान पर ब्रिटेन (2.82 खरब डॉलर) है। 

साफ़ है कि देश की अर्थव्यवस्था बेहद बुरे दौर से गुजर रही है। सरकार चाहे जो दावे करे, मंदी छाई हुई है, निवेश कम हो रहा है, निर्यात गिरा है, माँग-खपत कम हो रही है, कर उगाही कम हो रही है और देश की अर्थव्यवस्था विश्व में पाँचवें पायदान से गिर कर सातवें पर पहुँच गई है। यह सरकार को देखना होगा कि वह इस फिसलन को कैसे थामती है। 

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