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औद्योगिक उत्पादन गिरने से सेंसेक्स 624 अंक टूटा

बंबई स्टॉक एक्सचेंज का संवेदनशील सूचकांक यानी सेंसेक्स मंगलवार को 624 अंक टूट कर 36,958 पर बंद हुआ। सेंसेक्स बीते कुछ समय से 37,000 के ऊपर चल रहा था। कारखानों का उत्पादन कम होने और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक यानी आईआईपी में गिरावट की वजह से सेंसेक्स में यह गिरावट दर्ज की गई। 
सूचकांक ने एक दिन में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की है। समझा जाता है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज में ज़बरदस्त बढ़ोतरी नहीं हुई होती आज सेंसेक्स अंत में 1,000 अंक गिर सकता था। 
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हालाँकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंदी से जूझ रही अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए ज़रूरी कदम उठाने का भरोसा कॉरपोरेट जगत को शुक्रवार को ही दिया था, समझा जाता है कि कोई  ठोस बात नहीं कहने की वजह से लोग आश्वस्त नहीं हुए। लगभग इसी समय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक जारी हुआ और उसका बाज़ार पर बहुत ही बुरा असर पड़ा। 
शुक्रवार को जारी आँकड़ों से यह साफ़ हो गया कि कारखानों का उत्पादन गिर कर 2 प्रतिशत पर आ गया। यह बहुत बड़ी गिरावट थी। इसका साफ़ असर उसके बाद के पहले कारोबारी दिवस मंगलवार को दिखा।
मंगलवार को बाज़ार की स्थिति इतनी ख़राब हुई कि सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 27 कंपनियों के शेयरों की कीमतें गिरीं। ऑटो सेक्टर का हाल बुरा था, क्योंकि बीते दिनों इस सेक्टर से लगातार बुरी ख़बरें आ रही हैं। कंपनियों के घाटे में चलने, गाड़ियों की बिक्री कम होने और 3.50 लाख लोगों की नौकरियाँ जाने की वजह से यह सेक्टर बदहाल है। मारुति, महिंद्रा एंड महिंद्रा समेत तमाम कंपनियाँ गिरीं। 
सबसे बड़ा एकल निवेशक रिलायंस में होने की ख़बर ने इसे बहुत बड़ा सहारा दिया। सऊदी अरमको ने रिलायंस की 20 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने और उसमें 75 अरब डॉलर के निवेश का एलान किया है। इससे उसकी स्थिति सुधरी। 

निर्यात गिरने से हाल बदतर

 अर्थव्यवस्था की स्थिति इसके पहले से ही ख़राब है। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेन्सी क्रिसिल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ऑटो सेक्टर में बुरा हाल तो है ही, निर्यात सेक्टर के भी अच्छा कामकाज नहीं करने से दिक्क़तें बढ़ी हैं। इसने यह भी कहा है कि मानसून के ख़राब होने से कृषि क्षेत्र भी बहुत अच्छा नहीं कर पाएगा। लेकिन क्रिसिल को यह उम्मीद है कि सरकार खर्च बढ़ाएगी और बुनियादी ढाँचे पर खर्च करेगी, जिससे स्थिति सुधरेगी।

ऑटो सेक्टर में बिक्री का गिरना जारी

देश की बड़ी मोटर कंपनियों ने अपनी मासिक बिक्री के आँकड़े बृहस्पतिवार को जारी किए। बिक्री में कमी लगातार नौवें महीने देखी गई और जून में भी पैसेंजर कारों और दोपहिया वाहनों की बिक्री पहले से कम रही। 
मारुति की बिक्री 1 लाख के आँकड़े को भी नहीं छू पाई, इसकी बिक्री में 33.5 प्रतिशत की कमी देखी  गई। इसी तरह महिंद्रा एंड महिंद्रा की बिक्री 15 प्रतिशत गिरी। दुपहिया वाहनों की स्थित इससे बदतर ही रही है। टीवीएस मोटर की बिक्री में 13 फ़ीसदी तो रॉयल एनफ़ील्ड की बिक्री में 22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। 

कर उगाही कम

आर्थिक विकास की दर गिरने से यह स्वाभाविक है कि कर राजस्व की उगाही भी कम होगी। प्रत्यक्ष कर उगाही में वृद्धि बीते 10 के न्यूनतम स्तर पर है। अप्रैल-जून की कर उगाही कुल 4,00,421 करोड़ रुपए थी, यह पिछली तिमाही की कर उगाही से सिर्फ़ 1.36 प्रतिशत ज़्यादा है। कम्प्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल की रिपोर्ट के मुताबिक़ बीते साल इस दौरान प्रत्यक्ष कर उगाही में बढ़ोतरी 22.4 प्रतिशत थी। 

अर्थव्यवस्था सातवें स्थान पर

जिस अर्थव्यवस्था की स्थिति इतनी बुरी हो, पूरी अर्थव्यवस्था ही सुस्त हो चुकी हो, निवेश, निर्यात, माँग,खपत सब कुछ कम हो रहा हो, उसका क्या हश्र होगा, यह भी सबके सामने है। भारतीय अर्थव्यवस्था अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बुरी तरह फिसली है। यह पहले पाँचवे स्थान पर थी, बृहस्पतिवार को जारी आँकड़ों के हिसाब से यह सातवें स्थान पर आ गई। विश्व बैंक की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारत का सकल घरेलू उत्पाद 2.72 खरब डॉलर है। एक साल पहले भारत की जीडीपी 2.65 खरब डॉलर थी। इस समय भारत के ऊपर छठे स्थान पर फ्रांस (2.77 खरब डॉलर) और पाँचवे स्थान पर ब्रिटेन (2.82 खरब डॉलर) है। 
साफ़ है कि देश की अर्थव्यवस्था बेहद बुरे दौर से गुजर रही है। सरकार चाहे जो दावे करे, मंदी छाई हुई है, निवेश कम हो रहा है, निर्यात गिरा है, माँग-खपत कम हो रही है, कर उगाही कम हो रही है और देश की अर्थव्यवस्था विश्व में पाँचवें पायदान से गिर कर सातवें पर पहुँच गई है। ऐसे में शेयर बाज़ार का खराब होना और सेंसेक्स का गिरना स्वाभाविक है। 
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