अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने इस्तीफ़े का एलान करने वाले अपने ख़त में लिखा है कि हुर्रियत के घटक दल जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म होने के बाद लोगों का नेतृत्व करने में असफल रहे हैं।
दूसरी बार सत्ता में आते ही बीजेपी ने राष्ट्रवाद के अपने एजेंडे पर काम शुरू किया। इसमें सबसे पहला काम जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाना था। जनसंघ के दौर से ही वह अपने इस वादे को दोहराते और घोषणापत्र में शामिल करती रही थी।
अनुच्छेद 370 हटाने के बाद मोदी सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्रियों फ़ारूक़ अब्दुल्ला, उमर, महबूबा मुफ़्ती सहित सैकड़ों नेताओं को नज़रबंद कर दिया और बहुत से लोगों को जेल में डाल दिया। पूरे कश्मीर में लंबे समय तक लॉकडाउन रहा और आज भी हालात बहुत बेहतर नहीं हैं।