गुलाम नबी आजाद
ऐसा क्यों हुआः दरअसल, जब गुलाम नबी आजाद ने अनंतनाग-राजौरी सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा की तो घाटी में यह चर्चा शुरू हो गई कि आजाद दरअसल भाजपा की ओर से लड़ेंगे। भाजपा यहां सिर्फ मौजूदगी दिखाने के लिए रहेगी। गुलाम नबीं आजाद चुनाव जीतने के बाद पार्टी सहित भाजपा में चले जाएंगे। यह चर्चा आजाद पर भारी पड़ी और वो भाग खड़े हुए। इसी तरह भाजपा को भी एहसास हो गया कि इस चुनाव में मतदाता उसे अलग-थलग कर देंगे। इससे पहले की उसके धारा 370 हटाने का जवाब सामने आए, वो भी पीछे हट गई। लेकिन उसने चाल यह चली कि अब मांग रख दी है कि अभी फिलहाल इस सीट पर चुनाव टाला जाए।
भाजपा भी भागीः बीजेपी ने नामांकन पत्र दाखिल करने की समय सीमा से कुछ दिन पहले संकेत दिया था कि वह कश्मीर से चुनाव नहीं लड़ सकती है। 16 अप्रैल को अपनी जम्मू यात्रा के दौरान, गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था: "घाटी में कमल अपने आप खिल जाएगा" और "पार्टी जल्दी में नहीं है"। भाजपा नेता अल्ताफ ठाकुर का कहना है कि चुनाव से बचना एक रणनीतिक कदम है।