जम्मू-कश्मीर की चुनी हुई सरकार को गिराने का आरोप बीजेपी पर लगा है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का दावा है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों को 30 करोड़ रुपये और मंत्री पद का लालच दिया जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर उनकी सरकार को गिराने और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) को तोड़ने की साजिश रचने का बेहद गंभीर आरोप लगाया है। उमर अब्दुल्ला का दावा है कि उनके विधायकों को पाला बदलने के लिए 20 से 30 करोड़ रुपये, मंत्री पद और यहाँ तक कि राज्य का दर्जा (स्टेटहुड) बहाल कराने का लालच दिया जा रहा है। इस आरोप पर बीजेपी ने उनसे कहा है कि या तो वे उस बीजेपी नेता का नाम बताएं जो कथित तौर पर NC विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर रहा है, या फिर सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगें। ऐसा नहीं करने पर क़ानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
बहरहाल, खरीद-फरोख्त का यह विस्फोटक बयान मुख्यमंत्री ने श्रीनगर के हजरतबल (नसीम बाग) में अपनी दादी बेगम अकबर जहां (मदर-ए-मेहरबान) की 26वीं पुण्यतिथि पर आयोजित एक कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए दिया। 1990 के दशक के बाद यह पहला मौका था जब नेशनल कॉन्फ्रेंस ने पार्टी संस्थापकों के मजार पर इतनी बड़ी रैली का आयोजन किया था।
मुख्य आरोप: "बंद कमरों में विधायकों को खरीदने की कोशिश"
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने रैली में मौजूद कार्यकर्ताओं के सामने दावा किया कि भाजपा धनबल के दम पर उनकी सरकार को अस्थिर करना चाहती है। उन्होंने किसी विधायक का नाम लिए बिना जम्मू क्षेत्र के एक विधायक का उदाहरण साझा किया।उमर अब्दुल्ला ने कहा: "खुदा गवाह है, जम्मू के हमारे एक विधायक ने मेरे कमरे में आकर खुद मुझे यह बात बताई। भाजपा के एक पदाधिकारी ने, जो सुप्रीम कोर्ट के वकील भी हैं, उन्हें एक बंद कमरे में बुलाया और पाला बदलने के बदले 20 से 30 करोड़ रुपये, कैबिनेट मंत्री का पद और राज्य का दर्जा दिलाने का ऑफर दिया। वे सोचते हैं कि हमारे लोगों का ईमान इतना सस्ता है।"
उन्होंने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि मंच पर बैठा नेशनल कॉन्फ्रेंस का कोई भी विधायक 30 करोड़ क्या, 100 करोड़ रुपये में भी अपना जमीर नहीं बेचेगा। उन्होंने कहा, "भाजपा पिछले दरवाजे से सत्ता की कुर्सी तक पहुँचने के सपने देखना छोड़ दे। जनता ने तुम्हें पीछे का रास्ता दिखाया है और तुम वहीं रहोगे।"
डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने भी जताई सहमति
सम्मेलन में मौजूद नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने भी उमर अब्दुल्ला के आरोपों का समर्थन किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि पार्टी को तोड़ने की ऐसी कोशिशें कोई नई बात नहीं हैं, अतीत में भी ऐसे प्रयास किए गए हैं लेकिन नेशनल कॉन्फ्रेंस हमेशा मजबूत होकर उभरी है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से बिना डरे एकजुट रहने की अपील की।राज्य के दर्जे (Statehood) को लेकर केंद्र पर तीखा हमला
रिपोर्ट्स के अनुसार, मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने में जानबूझकर देरी करने का आरोप भी मढ़ा। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस को बहुमत देने की सजा यहाँ की जनता को दी जा रही है।बीजेपी का पलटवार
जम्मू-कश्मीर बीजेपी ने अब्दुल्ला के उस आरोप का जवाब दिया है जिसमें कहा गया था कि पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार गिराने की कोशिश कर रही है। बीजेपी ने उनसे कहा है कि या तो वे उस बीजेपी नेता का नाम बताएं जो कथित तौर पर NC विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर रहा है, या फिर सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगें। पार्टी ने यह भी चेतावनी दी कि अगर अब्दुल्ला अपने दावों को साबित नहीं कर पाए तो उनके ख़िलाफ़ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बीजेपी प्रवक्ता और विधायक आरएस पठानिया ने मुख्यमंत्री पर आरोप लगाया कि वे बीजेपी पर 'बेबुनियाद' आरोप लगाकर अपनी सरकार की कथित प्रशासनिक नाकामियों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। PTI के मुताबिक, उन्होंने कहा, 'मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को उन विधायकों के नाम बताने चाहिए जिन्हें कथित तौर पर पैसे की पेशकश की गई थी, इसमें शामिल बीजेपी नेताओं की पहचान करनी चाहिए और यह भी बताना चाहिए कि ये कथित पेशकश कब और कहाँ की गई थीं।' उन्होंने आगे कहा, 'अगर ऐसी कोई गंभीर घटना हुई थी तो इसकी जानकारी जांच एजेंसियों को क्यों नहीं दी गई? एक चुने हुए मुख्यमंत्री अधिकारियों के सामने सबूत पेश किए बिना ऐसे आरोप नहीं लगा सकते।'लद्दाख बनाम जम्मू-कश्मीर का मुद्दा
उमर अब्दुल्ला ने सवाल उठाया कि केंद्र सरकार लद्दाख के नेताओं से विशेष दर्जे (अनुच्छेद 371) पर बात करने के लिए तैयार है, लेकिन जम्मू-कश्मीर के मामले में 'उचित समय' (appropriate time) की आड़ लेकर टालमटोल कर रही है। उन्होंने केंद्र से पूछा कि वह इस 'उचित समय' की परिभाषा स्पष्ट करे।
उन्होंने केंद्र को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने टकराव के बजाय बातचीत का रास्ता चुना है, लेकिन हमारी इस चुप्पी और शालीनता को कमजोरी समझने की भूल न की जाए।
20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर महाप्रदर्शन
जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की अपनी मांग को तेज करते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एक बड़े कदम का ऐलान किया है। संसद के मानसून सत्र के पहले दिन, यानी 20 जुलाई को नेशनल कॉन्फ्रेंस नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बड़ा विरोध प्रदर्शन करेगी।विपक्ष को भी न्योता
इस प्रदर्शन के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस ने विभिन्न दलों के 52 प्रमुख नेताओं और वर्तमान व पूर्व विधायकों को आमंत्रित किया है। उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के सभी राजनीतिक दलों से अगले तीन साल के लिए चुनावी मतभेदों को भुलाकर राज्य के दर्जे की इस लड़ाई में एकजुट होने की अपील की है।
अनुमति को लेकर विवाद
उमर अब्दुल्ला ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इस प्रदर्शन को नाकाम करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि 'कॉकरोच पार्टी' जैसी छोटी पार्टियों को प्रदर्शन की अनुमति 24 घंटे में मिल जाती है, जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस पिछले 4-5 दिनों से दिल्ली में अनुमति मिलने का इंतजार कर रही है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अनुमति मिले या न मिले, उनका 20 जुलाई का दिल्ली कार्यक्रम हर हाल में होकर रहेगा।