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कश्मीर में पोस्टपेड मोबाइल फ़ोन सेवा शुरू, इंटरनेट अभी भी बंद

5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाये जाने के बाद से राज्य में बंद मोबाइल फ़ोन सेवाओं को सोमवार से खोल दिया गया है। राज्य के प्रशासन ने बीते शनिवार को इस बात की घोषणा की थी। लगभग 40 लाख पोस्टपेड मोबाइल फ़ोन आज से चालू हो गये हैं जबकि 20 लाख प्रीपेड मोबाइल फ़ोन और इंटरनेट सेवाओं को अभी निलंबित ही रखा गया है। 

पीटीआई के मुताबिक़, राज्यपाल सत्यपाल मलिक के सलाहकार फ़ारुक़ ख़ान ने पत्रकारों से कहा कि फ़ोन सेवा के शुरू होने से एक बार फिर राज्य में पर्यटकों के आने की उम्मीद है। ख़ान ने इस बात पर जोर दिया कि जम्मू-कश्मीर में कट्टरता के लिए कोई जगह नहीं है और घाटी के युवाओं ने पाकिस्तान के कश्मीर को बर्बाद करने की पूरी कोशिशों के बाद भी कट्टरता की राह को नहीं पकड़ा है। 

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जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने हालात सामान्य करने की कोशिश करते हुए 3 अक्टूबर से सभी स्कूलों को खोलने का निर्देश दिया था और स्कूलों के निदेशकों को यह भी निर्देश दिया था कि वे किसी भी छात्र से अगस्त और सितंबर महीने की ट्यूशन फ़ीस और बस फ़ीस न लें। अनुच्छेद 370 हटाने के बाद से राज्य में लगे प्रतिबंधों के बीच प्रशासन ने कई बार स्कूलों को खोलने की कोशिश की लेकिन ख़राब माहौल के बीच माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते थे। 

शनिवार को श्रीनगर की हरि सिंह स्ट्रीट में हुए ग्रेनेड बम धमाके को लेकर पूछे जाने पर ख़ान ने कहा कि इस तरह के हमलों का कोई असर नहीं होगा। इस हमले में सात लोग घायल हो गए थे।

पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में शांति के माहौल को ख़त्म करने की कोशिशों को जारी रखेगा लेकिन हम भी इसका माक़ूल जवाब देने के लिए तैयार हैं।


फ़ारुक़ ख़ान, सलाहकार, राज्यपाल सत्यपाल मलिक

5 अगस्त के बाद से ही राज्य में कई पाबंदियां लागू हैं और अब तक हालात सामान्य नहीं हो सके हैं। हालांकि जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने कहा था कि पथराव की छिटपुट घटनाओं को छोड़कर कश्मीर घाटी में माहौल शांतिपूर्ण रहा है और 2016 में बुरहान वानी की मौत के बाद जैसा माहौल था, वैसा इस बार नहीं है और उससे कहीं कम विरोध प्रदर्शन हुए हैं। लेकिन सुरक्षा बलों का एक आतंरिक दस्तावेज़ हाल ही में सामने आया था और यह केंद्र और राज्य प्रशासन के दावों को पूरी तरह ग़लत साबित करता है।
आतंरिक दस्तावेज़ से पता चला है कि कश्मीर में पिछले दो महीने में पत्थरबाज़ी की 306 घटनाएं हुई हैं और इन घटनाओं में सुरक्षा बलों के लगभग 100 जवान भी घायल हुए हैं। घायल हुए जवानों में सेंट्रल पैरामिलिट्री फ़ोर्स के 89 जवान शामिल हैं।

बीडीसी चुनाव का बहिष्कार

ख़बरों के मुताबिक़, राज्यपाल की ओर से घाटी में पर्यटकों की आवाजाही को खोलने के आदेश के बाद भी कोई पर्यटक यहां नहीं आया है। इसके अलावा बीडीसी चुनावों को लेकर भी राजनीतिक दलों के बीच कोई उत्साह नहीं है और बीजेपी को छोड़कर बाक़ी सभी राजनीतिक दलों ने घोषणा की है कि वे इस चुनाव में हिस्सा नहीं लेंगे। 

केंद्र ने अनुच्छेद 370 हटाने के फ़ैसले से पहले राज्य में बड़ी संख्या में जवानों को तैनात कर दिया था। इसके बाद राज्य के पूर्व मुख्यमंत्रियों फ़ारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती को हिरासत में ले लिया था और अभी तक ये तीनों प्रमुख नेता हिरासत में हैं।

सरकार को लिखे गये ख़त

इस बीच, देश भर से केंद्र सरकार को कश्मीर को लेकर लोगों ने खत लिखे। हाल ही में देश के 284 प्रबुद्ध नागरिकों के एक समूह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को ख़त लिख कर कहा था कि कश्मीर की स्थिति अस्वीकार्य है। ख़त पर दस्तख़त करने वालों में पत्रकार, अकादमिक जगत के लोग, राजनेता और समाज के दूसरे वर्गों के लोग शामिल हैं। ख़त में केरल हाई कोर्ट के उस फ़ैसले का भी हवाला दिया गया है, जिसमें इंटरनेट को मौलिक अधिकार माना गया है। 

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कश्मीरियों के साथ लगातार हो रही सख़्ती पर अब भारतीय तकनीकी संस्थान (आईआईटी) के 132 शिक्षकों, पूर्व छात्रों ने सरकार को ख़त लिखा है। ख़त में कहा गया है कि कश्मीरियों के साथ हो रही 'क्रूरता' ख़त्म हो।
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