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श्रीनगर : संदिग्ध आतंकवादियों ने गोली मार कर वकील की हत्या की

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के पुराने दिन एक बार फिर लौट रहे हैं। गुरुवार की शाम संदिग्ध आतंकवादियों ने श्रीनगर में एक वकील को गोली मार दी, जिन्हें अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। 

राजधानी श्रीनगर के हवाल इलाक़े में एडवोकेट बाबर कादरी को अज्ञात लोगों ने उनके घर में गोली मार दी। उन्हें शेर-ए-कश्मीर इंस्टीच्यूट ऑफ़ मेडिकल साइसेंज ले जाया गया, लेकिन बचाया नहीं जा सका। 

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने इस वारदात की निंदा करते हुए कहा कि यह 'अधिक दुखद इसलिए भी है कि उन्होंने खुद इस तरह की धमकी मिलने की बात कही थी, उनका अंतिम ट्वीट इस चेतावनी से ही जुड़ा हुआ था।'
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कादरी ने 21 सितंबर को ट्वीट कर पुलिस से कहा था कि 'शाह नज़ीर नामक व्यक्ति के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज किया जाना चाहिए क्योंकि वह ग़लत बात फैला रहा है कि मैं एजंसियों के लिए काम करता हूं।' कादरी ने कहा था कि इस झूठ से उनकी जान को ख़तरा हो सकता है।
इसके एक दिन पहले यानी बुधवार की रात बडगाम ज़िले के खाग इलाक़े के ब्लॉक डेवलपमेंट कौंसिल के सदस्य भूपिंदर सिंह की हत्या गोली मार कर दी गई। संदिग्द आतंकवादियों ने उनके पैतृक गाँव दलवेश में उनकी हत्या कर दी। 

निशाने पर आम लोग

पिछले कुछ समय से एक बार फिर संदिग्ध आतंकवादी आम नागरिकों को अपने निशाने पर ले रहे हैं। वे उन लोगों पर हमले कर रहे हैं जो सरकार या मौजूदा व्यवस्था के प्रति सहानुभूति रखते हुए दिखते हैं। इसके पहले जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा में भारतीय जनता पार्टी के 3 स्थानीय नेताओं को आतंकवादियों ने 10 जुलाई को मार डाला। शेख वसीम बारी को 4 जून को पार्टी के प्रशिक्षण विभाग का कश्मीर प्रभारी नियुक्त किया गया था।
उसके बाद ही संदिग्ध आतिकंवादियों ने जम्मू-कश्मीर के कुलगाम ज़िले में बीजेपी के एक सरपंच की हत्या कर दी थी। अखराँ गाँव के इस सरपंच की हत्या के दो दिन बाद ही एक और सरपंच की हत्या कर दी गई थी।
इसके  पहले कुलगाम जिले में दमहाल हांजीपोरा के साथ सटे नाडीमर्ग में रात के अंधेरे में स्वचालित हथियारों से लैस चार-पांच आतंकवादियों ने ग़ुलाम हसन वागे और सिराजुदीन गोरसी नामक दो ग्रामीणों को उनके घरों से बाहर निकाल उन पर गोलियों की बौछार कर दी थी। सिराजुदीन गोरसी कुछ समय पहले ही बीजेपी में शामिल हुए थे। कुछ वर्ष पूर्व आतंकियों ने उनकी मां और बीबी को भी निशाना बनाया था। वहीं, गुलाम हसन वागे जम्मू कश्मीर वन विभाग का एक सेवानिवृत्त कर्मी था।

पिछले महीने ही बारामुला के स्थानीय बीजेपी नेता और म्युनिसपल कमेटी वाटरगाम के उपाध्यक्ष मेराजुद्दीन मल्ला का अपहरण कर लिया गया था।

बांदीपोरा हत्याकांड के पहले जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के हमले में बीजेपी के दो कार्यकर्ता मारे गए। ये दोनों हत्याएं पुलवामा-शोपियां में हुईं थीं।

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