झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड लोक सेवा आयोग यानी जेपीएससी की दो भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के हेमंत सोरेन सरकार के फ़ैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत के इस आदेश से इन परीक्षाओं में सफल हुए अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। जब तक मामले की अगली सुनवाई नहीं होती तब तक सरकार का परीक्षा रद्द करने का फैसला लागू नहीं होगा।

छात्रों के लंबे विरोध-प्रदर्शन के बाद झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने JPSC के साथ ही JSSC-CGL परीक्षा के नतीजों और टेस्टिंग एजेंसी द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की थी।
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हाईकोर्ट ने जिन परीक्षाओं को लेकर सरकार के आदेश पर रोक लगाई है, उनमें 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा यानी जेपीएससी परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती परीक्षा शामिल हैं। इन परीक्षाओं के अभ्यर्थियों ने सरकार के फ़ैसले को अदालत में चुनौती दी थी।

अदालत ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि वह अपना पक्ष काउंटर एफिडेविट के साथ 15 दिन के भीतर पेश करे। अदालत के अंतरिम आदेश के अनुसार परीक्षा रद्द करने का सरकारी आदेश फिलहाल प्रभावी नहीं रहेगा। इन परीक्षाओं से जुड़े याचिकाकर्ता अभ्यर्थी तत्काल अपने काम पर लौट सकेंगे।

कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के आरोपों के बाद बड़ा फैसला लिया था। सरकार ने घोषणा की थी कि जेपीएससी की 22 भर्ती परीक्षाएं रद्द की जाएंगी। 2014 से अब तक हुई 23 अन्य परीक्षाओं की जांच कराई जाएगी।

यह जाँच जेपीएससी, जेएसएससी और आउटसोर्स एजेंसी द्वारा आयोजित परीक्षाओं से जुड़ी होगी। सरकार का कहना था कि भर्ती प्रक्रिया में लोगों का भरोसा बहाल करने के लिए यह क़दम ज़रूरी है।

26 दिन तक चला था छात्र आंदोलन

परीक्षाओं को रद्द करने का सरकार का यह फ़ैसला जेपीएससी-जेएसएससी सुधार मंच के नेतृत्व में चले 26 दिन लंबे छात्र आंदोलन के बाद आया था। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप था कि भर्ती परीक्षाओं में कई तरह की गड़बड़ियां हुई हैं। उन्होंने निष्पक्ष जांच और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग की थी। सरकार और आंदोलनकारियों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद प्रदर्शन स्थगित कर दिया गया। आंदोलनकारियों ने सरकार को अपनी मांगें पूरी करने के लिए दो महीने का समय दिया है। इस दौरान अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे तीन छात्रों ने भी अपना अनशन ख़त्म कर दिया।

सफल अभ्यर्थियों ने भी किया था विरोध

सरकार के परीक्षा रद्द करने के फ़ैसले के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया था। क़रीब 2000 सफल अभ्यर्थियों, खासकर जेएसएससी संयुक्त स्नातक स्तरीय यानी सीजीएल परीक्षा में चयनित उम्मीदवारों ने फैसले का विरोध किया। इन अभ्यर्थियों का कहना था कि उन्होंने पूरी मेहनत और योग्यता के आधार पर परीक्षा पास की है। यदि कहीं गड़बड़ी हुई है तो दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन निर्दोष उम्मीदवारों को सजा नहीं मिलनी चाहिए।

कई चयनित उम्मीदवारों ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर अपने नियुक्ति अधिकारों की रक्षा की मांग की। परीक्षा रद्द होने के विरोध में कई सफल अभ्यर्थी झारखंड सचिवालय भी पहुंचे। पुलिस की चेतावनी और निषेधाज्ञा के बावजूद कुछ उम्मीदवार सचिवालय परिसर में प्रवेश कर गए। उनका कहना है कि 'हमने अपनी मेहनत और योग्यता के दम पर परीक्षा पास की है। यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी सजा हमें नहीं मिलनी चाहिए।'
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उम्मीदवारों का कहना है कि उनमें से कई पहले ही वित्त, गृह, सड़क परिवहन, श्रम और सूचना एवं जनसंपर्क जैसे सरकारी विभागों में काम शुरू कर चुके हैं।

फिलहाल हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद जेपीएससी की इन दो परीक्षाओं को रद्द करने का फ़ैसला रोक दिया गया है। अब सभी की नज़र राज्य सरकार के जवाब और हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर रहेगी। दूसरी ओर, भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जाँच और छात्र संगठनों की मांगों को लेकर सरकार की प्रक्रिया भी जारी रहेगी।