झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ छात्र आंदोलन के 14वें दिन भूख हड़ताल पर बैठे एक छात्र की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें रांची के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस बीच, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी एआईएसए भी आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए प्रदर्शन में शामिल हुईं हालाँकि, उनके आने पर कुछ हंगामा भी हुआ और उनपर स्याही फेंकी गयी। बाद में वह छात्रों के साथ मंच पर दिखीं। इधर, छात्र संगठनों ने विधानसभा मार्च का ऐलान किया है, जबकि प्रशासन ने विधानसभा परिसर के आसपास निषेधाज्ञा लागू कर दी है।

यह आंदोलन 25 जुलाई से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी-जेएसएससी सुधार मंच के बैनर तले चल रहा है। इसे हाल के वर्षों में झारखंड के सबसे बड़े छात्र आंदोलनों में से एक माना जा रहा है। छात्रों का आरोप है कि 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग यानी जेपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा, जेएसएससी सीजीएल, जेएसएससी जेई, पीजीटी सहित कई भर्ती परीक्षाओं में गंभीर गड़बड़ियाँ हुई हैं। इसी के विरोध में छह छात्र लगातार आमरण अनशन पर बैठे हैं।
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भूख हड़ताल पर बैठे छात्र की तबीयत बिगड़ी

भूख हड़ताल कर रहे एक छात्र की तबीयत शुक्रवार को खराब होने पर उसे जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से तुरंत सदर अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा है। हालाँकि, बाकी छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और उनका कहना है कि जब तक सरकार ठोस फैसला नहीं लेती, आंदोलन जारी रहेगा।

क्या हैं छात्रों की मुख्य मांगें?

आंदोलनकारी छात्रों ने सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखी हैं। उनकी मांग है कि 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा रद्द की जाए। जेएसएससी सीजीएल, जेएसएससी जेई और पीजीटी सहित 2019 के बाद हुई सभी विवादित परीक्षाएं रद्द हों। पूरे मामले की सीबीआई जाँच कराई जाए या राज्य के बाहर के सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के पैनल से स्वतंत्र जांच कराई जाए।

छात्रों की मांग है कि भर्ती घोटालों में शामिल अधिकारियों, एजेंसियों और कथित माफिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो। सभी अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट, रिस्पॉन्स शीट और श्रेणीवार कट-ऑफ़ सार्वजनिक की जाए। यूपीएससी और एसएससी की तर्ज पर नियमित भर्ती कैलेंडर जारी किया जाए।

वार्ता के लिए बना 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा बातचीत का प्रस्ताव दिए जाने के बाद छात्रों ने 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बनाया है। इस प्रतिनिधिमंडल में आठ छात्र, एक वकील और दो तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं। हालाँकि छात्रों का कहना है कि वे केवल अधिकारियों से नहीं, बल्कि सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बातचीत चाहते हैं और अपनी मांगों पर सार्वजनिक आश्वासन चाहते हैं।

AISA ने दिया आंदोलन को समर्थन

आंदोलन को उस समय और मजबूती मिली जब एआईएसए की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा शुक्रवार को प्रदर्शन स्थल पहुंचीं। उन्होंने कहा कि झारखंड के छात्रों की लड़ाई पूरे देश के युवाओं की लड़ाई है। नेहा बोरा ने कहा कि जेपीएससी में लंबे समय से भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं और अब 14वीं जेपीएससी परीक्षा को तुरंत रद्द कर दोबारा परीक्षा की तारीख़ घोषित की जानी चाहिए। उन्होंने जेएसएससी सीजीएल परीक्षा को भी रद्द कर नई परीक्षा कराने की मांग का समर्थन किया।

नेहा बोरा ने कहा कि जो छात्र पिछले कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं, उनका संघर्ष पूरे देश के छात्र देख रहे हैं और एआईएसए उनके साथ मज़बूती से खड़ी है।

विधानसभा मार्च का ऐलान

एआईएसए और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन यानी एआईएसएफ़ ने झारखंड विधानसभा तक मार्च निकालने का ऐलान किया है। हालांकि, विधानसभा का मानसून सत्र चलने के कारण प्रशासन ने 6 अगस्त से 12 अगस्त तक विधानसभा भवन के 750 मीटर के दायरे में धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है। सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक किसी भी प्रकार के प्रदर्शन या रैली पर रोक रहेगी।

विधानसभा में भी गूंजा मामला

भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा झारखंड विधानसभा में भी उठा। मानसून सत्र के पहले ही दिन विपक्षी विधायकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और छात्रों की मांगों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को छात्र प्रतिनिधियों से बातचीत की थी। उन्होंने छात्रों को भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों को राज्य सरकार के सामने उठाया जाएगा और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी। कांग्रेस झारखंड में झामुमो के नेतृत्व वाली सरकार की सहयोगी पार्टी है।

झारखंड बीजेपी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा कि यदि वे वास्तव में छात्रों के साथ हैं तो उन्हें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर सीबीआई जांच कराने का दबाव डालना चाहिए। केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने भी राहुल गांधी की आलोचना करते हुए कहा कि आंदोलन शुरू होने के लगभग दो सप्ताह बाद कांग्रेस ने छात्रों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि छात्रों की मुख्य मांग सीबीआई और ईडी जांच तथा विवादित परीक्षाओं को रद्द करने की है। यदि कांग्रेस वास्तव में छात्रों के साथ है तो उसे अपनी सहयोगी सरकार से तुरंत यह फैसला करवाना चाहिए।
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झामुमो का क्या कहना है?

झामुमो सांसद विजय कुमार हांसदाक ने कहा कि राज्य सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालने में विश्वास रखती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि छात्रों को न्याय मिलेगा, भर्ती व्यवस्था को और पारदर्शी बनाया जाएगा तथा भविष्य में ऐसी शिकायतों को रोकने के लिए आवश्यक सुधार किए जाएंगे।

भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब राज्यव्यापी मुद्दा बन चुका है। एक ओर छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, वहीं सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात कर रही है। यदि जल्द समाधान नहीं निकलता है तो विधानसभा मार्च और अन्य विरोध कार्यक्रमों से आंदोलन और तेज होने की संभावना है।