डीके शिवकुमार की ताजपोशी की तारीख तय हो गई है और वह 3 जून को कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण की तैयारियाँ शुरू हो गई हैं। शपथ ग्रहण समारोह लोक भवन के ग्लास हाउस में होगा। यह एक सादा समारोह होगा।

शिवकुमार के साथ शुरू में 8 से 10 नए मंत्रियों के शपथ लेने की संभावना है। माना जा रहा है कि बाद में कैबिनेट का विस्तार होगा, खासकर राज्यसभा चुनाव के बाद। पूरी कैबिनेट में पुराने मंत्रियों में से आधे से ज्यादा को हटाने की तैयारी है ताकि नए और युवा चेहरों को मौक़ा मिल सके।
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उपमुख्यमंत्री की चर्चा

नई सरकार में 4 उपमुख्यमंत्री बनाने की चर्चा जोरों पर है। कांग्रेस पार्टी जाति और क्षेत्रीय समीकरण साधने के लिए यह क़दम सोच रही है। माना जा रहा है कि कांग्रेस के लिए वोकलिगा, लिंगायत, दलित, पिछड़े वर्ग और अल्पसंख्यक समुदायों का संतुलन बनाना ज़रूरी है। इससे पार्टी के अलग-अलग गुटों और समर्थकों को भी संतुष्ट किया जा सकेगा। लेकिन डीके शिवकुमार खुद 4 उपमुख्यमंत्री बनाने के पक्ष में नहीं हैं। वे मानते हैं कि इससे प्रशासन में उलझन बढ़ेगी और फैसले लेने में दिक्कत आएगी। वे कम उपमुख्यमंत्री या बिना उपमुख्यमंत्री के कैबिनेट चलाना चाहते हैं। रिपोर्ट है कि अभी हाईकमान को इस पर अंतिम फैसला लेना बाक़ी है।

कैबिनेट में कौन-कौन शामिल हो सकते हैं?

डीके शिवकुमार की कैबिनेट में पुराने मंत्रियों में से आधे को ही बरकरार रखे जाने की संभावना है। नयी कैबिनेट में नए चेहरे शामिल किए जा सकते हैं। इनके नामों की चर्चा है-
  • जी. परमेश्वर, एचके पाटिल, कृष्णा बायरे गोव्‍दा, प्रियंक खरगे- ये अनुभवी नेता हैं और कैबिनेट में इनके बने रहने की संभावना है।
  • सिद्धारमैया के बेटे यतिंद्र सिद्धारमैया जैसे नए चेहरे भी शामिल हो सकते हैं। एनए हारिस, महंतेश कौजलगी, श्रीनिवास माने, रूपकला शशिधर जैसे नये नाम भी शामिल हो सकते हैं।
  • कांग्रेस हाईकमान कैबिनेट में एक तिहाई सिद्धारमैया गुट को, एक तिहाई शिवकुमार गुट को और बाकी सीटें हाईकमान के चुने हुए लोगों को देने की योजना बना रहा है। इससे पार्टी में संतुलन बना रहेगा।

CLP नेता कैसे चुने गए शिवकुमार?

शनिवार रात को कर्नाटक कांग्रेस विधायक दल की बैठक हुई। बैठक में सर्वसम्मति से डीके शिवकुमार को नेता चुना गया। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने खुद शिवकुमार का नाम प्रस्तावित किया। जी. परमेश्वर ने उसका समर्थन किया। सभी विधायकों ने एकमत से इसे मंजूर कर लिया। एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला हाईकमान की तरफ़ से बैठक में मौजूद थे। 

सीएलपी बैठक के बाद शिवकुमार, सिद्धारमैया समेत अन्य नेताओं ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात की और सरकार बनाने का दावा पेश किया। राज्यपाल ने 3 जून को शपथ लेने का निमंत्रण दिया।

शिवकुमार के लिए चुनौतियां क्या?

नई सरकार और कांग्रेस पार्टी के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं-
  • 2028 चुनाव: कर्नाटक में पिछले 40 साल से कोई भी सरकार दोबारा नहीं जीती। कांग्रेस के सामने यह ट्रेंड तोड़ने की चुनौती है।
  • सिद्धारमैया गुट को संभालना: सिद्धारमैया के समर्थकों को नाराज न होने देना।
  • जाति और क्षेत्रीय समीकरण: वोकलिगा, AHINDA (अल्पसंख्यक, पिछड़े, दलित) का संतुलन बनाना।
  • कल्याणकारी योजनाएं: गारंटी स्कीमों को जारी रखना लेकिन राज्य की वित्तीय स्थिति सुधारना।
  • विरोधी दलों का दबाव: भाजपा-जद(एस) गठबंधन आक्रामक रहेगा।
  • बेंगलुरु का विकास: शहर की सड़कें, ट्रैफिक और इंफ्रास्ट्रक्चर की समस्याएँ सुलझाना।
  • निवेश और रोजगार: युवाओं को नौकरियां देना और उद्योगों को आकर्षित करना।
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डीके शिवकुमार अनुभवी नेता और संगठनकर्ता हैं। उन्होंने कहा है कि वे सिद्धारमैया के सहयोग से पार्टी को मजबूत करेंगे और 2028 में कांग्रेस की जीत सुनिश्चित करेंगे। पूरा फोकस अब 3 जून के शपथ ग्रहण और नई कैबिनेट पर है। यह बदलाव कांग्रेस के लिए एकता और नई शुरुआत का प्रतीक माना जा रहा है, लेकिन इसके सामने बड़ी चुनौतियाँ भी हैं।