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कर्नाटक: बीजेपी का शानदार प्रदर्शन, 15 में से 12 सीटें जीतीं

कर्नाटक में 15 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन किया है। इन सीटों पर 6 दिसंबर को वोट डाले गए थे। बीजेपी को 12 सीटों पर जीत मिली है जबकि कांग्रेस को 2 और एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी को जीत मिली है। मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को अपनी सरकार को बचाने के लिए इन 15 सीटों में से कम से कम 7 सीटों पर जीतना ज़रूरी था। इसलिए उन्होंने चुनाव जीतने के लिए पूरा जोर लगा दिया था। 224 सीटों वाली कर्नाटक विधानसभा में अभी 2 सीटें खाली हैं। इस तरह 222 सीटों में से बीजेपी के विधायकों की संख्या 117 हो गई है। जनता दल (सेक्युलर) का प्रदर्शन बेहद ख़राब रहा है और उसे एक भी सीट नहीं मिली है। कांग्रेस के विधायकों की संख्या 68 हो गई है और जेडीएस के पास 34 विधायक ही हैं। 

राज्य में गोकक, कागवाड, अथानी, येल्लापुर, हिरेकेरूर, रानीबेन्नुर, शिवाजी नगर, होसकोटे, हंसुर, विजय नगर, केआर पुरम, चिकबल्लापुर, केआर पेट, यशवंतपुर और महालक्ष्मी लायुत विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुआ है। 

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कर्नाटक की जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि अब कर्नाटक में जोड़-तोड़ की राजनीति नहीं चलेगी और वहां की जनता ने एक स्थिर और मजबूत सरकार को ताकत दे दी है। चुनाव नतीजे आने के बाद मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने भी ख़ुशी जताते हुए कहा है कि अब बीजेपी कर्नाटक में स्थिर सरकार देगी। 
चुनाव नतीजों को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार ने कहा, ‘हमें इन 15 विधानसभा क्षेत्रों के मतदाताओं के जनादेश से सहमत होना होगा। मतदाताओं ने दलबदलुओं को स्‍वीकार कर लिया है। हमने अपनी हार स्‍वीकार कर ली है लेकिन मैं सोचता हूँ कि हमें निराश होने की कोई ज़रूरत नहीं है।’
चुनाव में सिर्फ़ 2 सीटें मिलने पर कांग्रेस विधायक दल के नेता सिद्धारमैया ने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। सिद्धारमैया ने कहा, ‘विधायक दल का नेता होने के नाते मुझे लोकतंत्र का सम्मान करना चाहिए। मैंने कांग्रेस विधायक दल के नेता के पद से इस्तीफ़ा दिया है। मैंने अपना इस्तीफ़ा पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी को भेज दिया है।’ इसके अलावा कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष दिनेश गुंडू राव ने भी पार्टी के ख़राब प्रदर्शन की जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। 

कर्नाटक में राजनीतिक संकट तब शुरू हुआ था जब कांग्रेस और जेडीएस के 17 विधायकों ने बग़ावत कर इस्तीफ़ा दे दिया था। इसके बाद इस साल जुलाई में कुमारस्वामी सरकार द्वारा पेश विश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 99 और विरोध में 105 मत पड़े थे और सरकार गिर गई थी। कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की यह सरकार 14 महीने तक ही चल सकी थी। विधानसभा अध्यक्ष ने इन बाग़ी विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया था। विधानसभा अध्यक्ष के फ़ैसले को विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा था कि सभी 17 अयोग्य विधायक चुनाव लड़ सकते हैं। 

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