कर्नाटक में लंबे इंतज़ार और खींचतान के बाद हुए मंत्रिमंडल विस्तार के तुरंत बाद कांग्रेस सरकार के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। मंत्री पद नहीं मिलने से नाराज़ कई कांग्रेस विधायक खुलकर पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बोलने लगे हैं। दो विधायकों ने विधानसभा से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है, जबकि कई अन्य नेताओं और उनके समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार अब नाराज विधायकों को मनाने में जुट गए हैं। पार्टी नेतृत्व भी डैमेज कंट्रोल की कोशिश कर रहा है ताकि असंतोष बड़े राजनीतिक संकट में न बदल जाए।

19 नए मंत्रियों ने ली शपथ

कर्नाटक मंत्रिमंडल में 19 नए मंत्रियों को सोमवार को शपथ दिलाई गई। जून 2026 में डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद से कैबिनेट में 20 पद खाली थे। पिछले कई सप्ताह से कांग्रेस नेतृत्व और राज्य के नेताओं के बीच लगातार बैठकों के बाद आखिरकार मंत्रिमंडल विस्तार किया गया। बताया जा रहा है कि करीब 45 विधायक मंत्री बनने की दौड़ में थे, लेकिन सीमित पद होने के कारण बड़ी संख्या में नेताओं को निराशा हाथ लगी।
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मंत्री पद नहीं मिलने से नाराज इंडी विधानसभा सीट के विधायक यशवंतरायगौड़ा पाटिल ने विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। हालाँकि उन्होंने साफ़ किया है कि फिलहाल उन्होंने कांग्रेस छोड़ने का कोई फैसला नहीं लिया है। उनका कहना है कि उन्होंने केवल विधायक पद से इस्तीफा दिया है और आगे का निर्णय बाद में करेंगे।

सिर्फ़ सीएम, मंत्री के बेटों को मौक़ा: गोपालकृष्ण

सागर से कांग्रेस विधायक बेलूर गोपालकृष्ण ने भी मंगलवार को विधानसभा से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, 'क्या मंत्री बनने का अधिकार सिर्फ पूर्व मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों के बेटों के लिए है? अगर आप किसी बड़े नेता के बेटे नहीं हैं तो आपको मौका नहीं मिलेगा।' उनके इस बयान ने कांग्रेस के भीतर परिवारवाद को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

कई विधायक और समर्थक भी नाराज़

मंत्रिमंडल विस्तार के बाद कई अन्य कांग्रेस नेताओं ने भी अपनी नाराजगी सार्वजनिक कर दी। ईटी की रिपोर्ट के अनुसार बागेपल्ली विधायक एसएस सुब्बा रेड्डी ने मंत्री नहीं बनाए जाने के बाद अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया। उनके समर्थकों ने 5 अगस्त को बंद का आह्वान किया है।

चिंतामणि विधायक एमसी सुधाकर ने कहा कि कोलार और चिक्कबल्लापुर जिलों को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व नहीं मिला। गांधीनगर विधायक दिनेश गुंडू राव ने भी मंत्री नहीं बनाए जाने पर गहरी निराशा जताई।

समर्थकों का प्रदर्शन

कई जगहों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। ईटी की रिपोर्ट के अनुसार बंगारपेट विधायक एसएन नारायणस्वामी के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया। सिंधनूर विधायक हम्पनगौड़ा बदरली के समर्थक भी सड़क पर उतर आए। कोप्पल विधायक राघवेंद्र हितनाल के समर्थकों ने भी प्रदर्शन किया। वहीं मैसूर के विधायक तनवीर सैत के एक समर्थक ने कथित तौर पर आत्महत्या की कोशिश की। इन घटनाओं ने कांग्रेस नेतृत्व की चिंता और बढ़ा दी है।

आखिरी समय में बदली गई मंत्रियों वाली सूची!

कुछ रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि मंत्रिमंडल की सूची में शपथ ग्रहण से ठीक पहले बदलाव भी किया गया। भटकल विधायक मंकाला वैद्य का नाम हटाकर दावणगेरे नॉर्थ के विधायक एसएस मल्लिकार्जुन को मंत्री बनाया गया। वहीं एमएलसी गायत्री शांतिगौड़ा का नाम भी अंतिम समय में सूची से हटा दिया गया। कांग्रेस ने इन बदलावों की आधिकारिक वजह नहीं बताई है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर दूसरे दावेदारों का काफी दबाव था।

राहुल गांधी ने सुझाया समाधान

रिपोर्ट में पार्टी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री को सलाह दी है कि जिन विधायकों को मंत्री नहीं बनाया जा सका है, उन्हें कैबिनेट रैंक वाले बोर्ड और निगमों का अध्यक्ष बनाकर संतुष्ट किया जाए। सूत्रों के हवाले से यह भी कहा गया है कि जो नेता यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं करना चाहते, उन्हें इस्तीफा देने की छूट भी दी जा सकती है।

डीके शिवकुमार बोले- सभी को मिलेगा मौका

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने नाराज नेताओं से धैर्य रखने की अपील की। उन्होंने कहा, 'हर विधायक को समय आने पर मौका मिलेगा।' अपने राजनीतिक सफर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 में उन्हें भी मंत्री नहीं बनाया गया था। 2013 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद भी उन्हें इंतजार करना पड़ा, लेकिन धैर्य रखने का परिणाम यह हुआ कि आज वे मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने विधायकों से जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेने की अपील की।

कांग्रेस नेतृत्व ने विधानसभा और विधान परिषद के प्रमुख पदों के लिए भी नाम तय कर दिए हैं। जीएस पाटिल को विधानसभा अध्यक्ष बनाया जाएगा। एएस पोन्नन्ना उपाध्यक्ष होंगे। वरिष्ठ एमएलसी सलीम अहमद विधान परिषद के सभापति बनाए जाएंगे। उमाश्री को उपसभापति बनाया जाएगा।
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हालाँकि बीजेपी के वरिष्ठ विधायक एस सुरेश कुमार ने इन नियुक्तियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि विधानसभा के पीठासीन अधिकारियों के नाम कांग्रेस हाईकमान द्वारा घोषित करना लोकतांत्रिक परंपराओं के लिहाज से सही नहीं है।

कर्नाटक मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए कांग्रेस ने क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन बनाने की कोशिश की है। नए मंत्रिमंडल में लिंगायत और वोक्कालिगा समुदायों को प्रमुख प्रतिनिधित्व दिया गया है, जबकि सिद्धारमैया सरकार के कई पुराने मंत्रियों को इस बार बाहर रखा गया है। लेकिन मंत्री पद से वंचित नेताओं की नाराजगी अब खुलकर सामने आ चुकी है। ऐसे में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और कांग्रेस हाईकमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती असंतुष्ट विधायकों को मनाकर सरकार और संगठन में एकजुटता बनाए रखने की होगी।