कर्नाटक में भी बंगाल के पैटर्न पर फॉर्म 7 के ज़रिए वोटरों के नाम हटवाने के लिए आवेदन किये गये हैं। द हिन्दू ने अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। लेकिन पूरा मामला विवादित है। क्योंकि भारी संख्या में मतदाता उन पतों पर पाये गये।
कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने के लिए Form-7 आवेदन दाखिल किए जाने का मामला सामने आया है। The Hindu की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के कई विधानसभा क्षेत्रों में 4,000 से अधिक मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई है। Form-10 में दर्ज आंकड़े Form-7 के तहत दाखिल आपत्तियों का आधिकारिक संकलन होते हैं। इन आवेदनों में बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाताओं के नाम बताए गए हैं। कुछ मामलों में यह भी सामने आया कि आवेदन फॉर्म पर जिस मतदाता का नाम आपत्तिकर्ता के तौर पर दर्ज था, उसके विवरण हाथ से लिखे गए थे, जबकि जिस मतदाता का नाम हटाने की मांग की गई, उसका विवरण पहले से प्रिंटेड था।
बाबलेश्वर में 1,373 आवेदन, सिर्फ 10 लोगों ने दाखिल किए
विजयपुरा जिले के बाबलेश्वर विधानसभा क्षेत्र में 22 सितंबर को अकेले 1,373 Form-7 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 1,363 आवेदन सिर्फ 10 लोगों ने दाखिल किए। रिपोर्ट के अनुसार, इन आवेदनों में बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई और कई मामलों में संबंधित मतदाता उन्हीं मतदान केंद्रों के मतदाता नहीं थे जहां से उनके खिलाफ आपत्ति दाखिल की गई थी।बाबलेश्वर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के मंत्री एम.बी. पाटिल विधायक हैं। आंकड़ों के अनुसार, 22 और 23 सितंबर के दौरान यहां बड़े पैमाने पर Form-7 आवेदन दाखिल किए गए। इनमें एक मतदाता हुचप्पा गणिगेर ने 493 आवेदन दाखिल किए, इनमें 423 आवेदन 22 सितंबर को और 70 आवेदन 23 सितंबर को दाखिल किए गए। एक अन्य व्यक्ति गोविंदराज मुंदर ने 23 सितंबर को 413 आवेदन दाखिल किए। ये आवेदन लगभग 30 से अधिक मतदान केंद्रों से जुड़े थे और बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई थी।
भालकी में 1,700 से अधिक नामों पर आपत्ति
बीदर जिले के भालकी विधानसभा क्षेत्र में भी इसी तरह की बड़ी संख्या में आपत्तियां सामने आईं। यहां कम से कम 30 लोगों ने 23 सितंबर को 1,700 से अधिक मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की। इनमें से कई लोगों ने इसके एक दिन पहले भी बड़ी संख्या में Form-7 आवेदन दाखिल किए थे। भालकी का प्रतिनिधित्व कर्नाटक सरकार के मंत्री ईश्वर खंड्रे करते हैं। बाद में 24 सितंबर को भी यहां 525 अतिरिक्त Form-7 आपत्तियां दाखिल होने की जानकारी सामने आई। रिपोर्टों के मुताबिक, इन 525 आवेदनों में से लगभग सभी में जिन मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई, वे मुस्लिम समुदाय से थे और 20 लोगों ने इनमें से 523 आवेदन दाखिल किए थे।
बीजेपी के कब्जे वाली सीटों पर भी ऐसे मामले
यह मामला केवल कांग्रेस विधायकों वाली सीटों तक सीमित नहीं रहा। बसवकल्याण और बेलथंगडी, दोनों बीजेपी प्रतिनिधित्व वाले विधानसभा क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर Form-7 आवेदन सामने आए। बसवकल्याण में एक दिन प्राप्त हुए 37 Form-7 आवेदनों में से 32 आवेदन सिद्धप्पा नाम के एक मतदाता ने दाखिल किए। इन सभी आपत्तियों में एक ही मतदान केंद्र पार्ट नंबर 163 के मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई। इसी तरह दक्षिण कन्नड़ के बेलथंगडी में मतदाता उमेश बांगेरे ने 21 आवेदन दाखिल किए। ये सभी आवेदन एक ही मतदान केंद्र पार्ट नंबर 47 के मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने से संबंधित थे। दोनों क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व बीजेपी के विधायक करते हैं।नाम हटाने के लिए एक ही कारण- ‘Absent/Permanently Shifted’
इन Form-7 आवेदनों में मतदाताओं के नाम हटाने के लिए प्रमुख आधार “Absent/Permanently Shifted”, यानी मतदाता के अनुपस्थित होने या स्थायी रूप से दूसरी जगह चले जाने का बताया गया। Form-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में किसी व्यक्ति के नाम के शामिल होने पर आपत्ति दर्ज कराने और उसका नाम हटाने की मांग करने के लिए किया जाता है। SIR के दौरान दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम अवधि 24 सितंबर तक थी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, बड़ी संख्या में आवेदन अंतिम दो-तीन दिनों में अचानक सामने आए।कुछ फॉर्म पहले से प्रिंटेड होने का भी मामला
भालकी में दाखिल कुछ Form-7 आवेदन प्रक्रिया को लेकर अतिरिक्त सवाल खड़े करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ फॉर्म में आपत्तिकर्ता की जानकारी हाथ से लिखी गई थी, जबकि जिस मतदाता का नाम हटाने की मांग की गई, उसका विवरण पहले से प्रिंटेड था। ऐसे ही कई आवेदनों में विष्णुवर्धन कोटे का नाम आपत्तिकर्ता के तौर पर दर्ज था। लेकिन जब The Hindu ने उनसे संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि उनका नाम विष्णुवर्धन नहीं बल्कि सुरेश है। आवेदन में दर्ज EPIC विवरण की जांच करने पर वह विष्णुवर्धन नाम के मतदाता से जुड़ा पाया गया।अखबार ने इन भौतिक Form-7 आवेदनों की तस्वीरें भी प्राप्त कीं। इनमें आपत्तिकर्ता के रूप में विष्णुवर्धन का विवरण हाथ से लिखा हुआ था, जबकि जिन मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई थी, उनके विवरण पहले से प्रिंटेड दिखाई दिए। इसी तरह संतोष ईश्वर के नाम से भी 170 से अधिक Form-7 आवेदन दाखिल किए जाने की जानकारी सामने आई। हालांकि, Form-10 के ऑनलाइन उपलब्ध आंकड़ों से मिलान करने पर विष्णुवर्धन का नाम आपत्ति दाखिल करने वालों की सूची में नहीं मिला, जबकि संतोष का नाम दर्ज था। बीडर के अधिकारियों ने बताया कि बड़ी संख्या में आवेदन ऑफलाइन दाखिल किए गए थे और संभव है कि उनमें से कुछ अभी तक डिजिटल रिकॉर्ड में शामिल नहीं हुए हों।
22 सितंबर से पहले इतने बड़े पैमाने पर आवेदन नहीं
रिपोर्ट के मुताबिक, 22 सितंबर से पहले किसी मतदाता के दूसरी जगह चले जाने के आधार पर Form-7 आवेदन आम तौर पर बहुत कम संख्या में आते थे। एक मतदान केंद्र पर ऐसे दो-तीन आवेदन मिलना सामान्य था। इनमें भी अक्सर मतदाता खुद अपना नाम हटाने के लिए आवेदन करते थे क्योंकि वे किसी दूसरी जगह चले गए थे। लेकिन 22 सितंबर से अचानक बड़ी संख्या में सामूहिक Form-7 आवेदन सामने आने लगे, जबकि 23 सितंबर दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख थी। इसके बाद 24 सितंबर तक भी कुछ क्षेत्रों में बड़ी संख्या में आपत्तियां दाखिल की गईं।अधिकारियों का क्या कहना है?
बीदर और विजयपुरा के चुनाव अधिकारियों ने कहा है कि इन सभी आपत्तियों की जांच की जाएगी और किसी भी योग्य मतदाता का नाम हटाने से पहले सत्यापन किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, बड़े पैमाने पर आपत्तियां दाखिल करने वाले लोगों को यह भी बताया गया है कि यदि जांच में यह साबित होता है कि उन्होंने बिना वैध आधार के दावे या आपत्तियां दाखिल की हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई या दंड का प्रावधान हो सकता है।यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में Form-7 आपत्तियों की भूमिका अहम है। कर्नाटक में सामने आए इन मामलों में एक सीमित संख्या में लोगों द्वारा बहुत बड़ी संख्या में आवेदन दाखिल किए जाने और उनमें मुस्लिम मतदाताओं के नामों की बड़ी हिस्सेदारी ने मतदाता सूची की प्रक्रिया और सत्यापन को लेकर सवाल खड़े किए हैं।