मोदी सरकार की नीतियों के आलोचक रहे अभिनेता प्रकाश राज ने बेंगलुरु में वोटर लिस्ट से नाम काटे जाने पर कहा है, 'आप कुछ नागरिकों के वोटिंग अधिकार चुन सकते हैं या उन्हें नकार सकते हैं... लेकिन क्या आप हमें आपको आपकी गद्दी से हटाने से रोक सकते हैं?'
मोदी सरकार और बीजेपी की नीतियों के मुखर आलोचक रहे प्रकाश राज ने दावा किया है कि कर्नाटक में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR प्रक्रिया के दौरान बेंगलुरु की मतदाता सूची से उनका नाम हटा दिया गया है। प्रकाश राज ने कहा कि वह उन क़रीब 65 लाख मतदाताओं में शामिल हैं, जिनका वोटिंग अधिकार कथित तौर पर खत्म कर दिया गया है।
प्रकाश राज ने मंगलवार को एक्स और इंस्टाग्राम पर वीडियो संदेश जारी कर इस मुद्दे पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनका जन्म इसी निर्वाचन क्षेत्र में हुआ, उन्होंने यहीं पढ़ाई की, कॉलेज किया और थिएटर से जुड़े रहे। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि वह इसी क्षेत्र से लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार रह चुके हैं। उन्होंने एक्स पर वीडियो साझा करते हुए एक पोस्ट में लिखा, 'आप कुछ नागरिकों के वोटिंग अधिकार चुन सकते हैं या उन्हें नकार सकते हैं, जो शायद आपको दोबारा सत्ता में न लाएं... लेकिन क्या आप हमें आपको आपकी गद्दी से हटाने से रोक सकते हैं?'
‘मैं उन 65 लाख मतदाताओं में से एक हूं’
प्रकाश राज ने वीडियो में कहा कि वह उन 65 लाख मतदाताओं में से एक हैं, जिनका वोटिंग अधिकार SIR के बाद बेंगलुरु निर्वाचन क्षेत्र से कथित तौर पर हटा दिया गया है। उन्होंने इसे व्यंग्यात्मक अंदाज में ‘अच्छा मजाक’ बताया और कहा कि अब वह यह पता लगाएंगे कि अपना वोटर आईडी या नाम वापस दर्ज कराने के लिए उन्हें किस प्रक्रिया से गुजरना होगा और कौन-कौन से दस्तावेज देने होंगे। प्रकाश राज ने कहा कि उन्हें यह देखना है कि अपना मताधिकार वापस पाने के लिए उन्हें कितने कागज दिखाने पड़ेंगे।
प्रकाश राज 2019 में लड़ चुके हैं लोकसभा चुनाव
प्रकाश राज का बेंगलुरु से राजनीतिक जुड़ाव भी रहा है। उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव में बेंगलुरु सेंट्रल सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि उनका इस निर्वाचन क्षेत्र से लंबे समय से संबंध रहा है। उनके बयान के बाद SIR और मतदाता सूची में नामों की स्थिति को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।मोदी सरकार के आलोचक रहे हैं प्रकाश राज
प्रकाश राज मोदी सरकार की कई नीतियों और फैसलों की लगातार आलोचना करते रहे हैं। उन्होंने नोटबंदी को अर्थव्यवस्था को तबाह करने वाला सबसे बड़ा ब्लंडर बताया। उन्होंने GST को आम लोगों पर टैक्स का बोझ बताया और हाथ से बने उत्पादों पर ज्यादा टैक्स और अमीरों-कॉरपोरेट्स को फायदा पहुँचाने का आरोप लगाया। 2 करोड़ नौकरियाँ, हर खाते में 15 लाख रुपये, 100 स्मार्ट सिटीज, मेक इन इंडिया आदि वादों के न पूरे होने पर बार-बार सवाल उठाए। उन्होंने आम लोगों से 'गब्बर सिंह टैक्स' वसूली जबकि अमीर दोस्तों के टैक्स माफ करने का आरोप लगाए। हाल ही में पेट्रोल-डीजल बचाने और खर्च कम करने की अपील पर भी सरकार को नाकाम बताया।
उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर का विरोध किया। प्रदर्शनों में शामिल हुए और कहा कि बेरोजगार युवाओं व अशिक्षित बच्चों का रजिस्टर बनाओ, न कि नागरिकता का। उन्होंने गौ रक्षकों द्वारा लिंचिंग, अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने, हिंदुत्व एजेंडे का विरोध किया। किसान मुद्दों का समर्थन करते रहे हैं। छात्र व नीट मामले में कॉकरोच जनता पार्टी का भी समर्थन करते रहे हैं।बेंगलुरु में ASDDO मामले बड़ी चिंता
कर्नाटक में मतदाता सूची की SIR प्रक्रिया के दौरान बेंगलुरु में बड़ी संख्या में मतदाताओं को ASDDO यानी 'अनुपस्थित, स्थानांतरित, डुप्लीकेट, मृत और अन्य' की श्रेणी में रखा गया है। उपलब्ध आधिकारिक आँकड़ों के मुताबिक़, कर्नाटक में कुल 5,54,32,314 मतदाताओं में से 1,09,83,901 यानी 19.81 प्रतिशत मतदाता ASDDO श्रेणी में पाए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा मामले बेंगलुरु अर्बन में दर्ज किए गए हैं। बेंगलुरु अर्बन में कुल 40,21,039 मतदाताओं में से 17,74,626 मतदाता ASDDO श्रेणी में पाए गए। यह कुल मतदाताओं का क़रीब 44.13 प्रतिशत है।
इसी तरह बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका साउथ में 21,44,784 मतदाताओं में से 10,87,829 ASDDO श्रेणी में दर्ज किए गए। यह कुल मतदाताओं का 50.72 प्रतिशत है। इन आंकड़ों ने बेंगलुरु में SIR प्रक्रिया को लेकर विशेष चिंता पैदा की है। हालाँकि, ASDDO श्रेणी में शामिल होना अपने आप में मतदाता का अंतिम रूप से नाम मतदाता सूची से हट जाना नहीं है।
प्रकाश राज के वोटर आईडी से जुड़ा पुराना विवाद
प्रकाश राज के बयान की पृष्ठभूमि में उनके खिलाफ चल रहा एक अलग मतदाता पहचान पत्र से जुड़ा मामला भी अहम है। पिछले महीने बेंगलुरु की एक अदालत ने उनके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट के मामले में उन्हें सशर्त जमानत दी थी। मामला इस आरोप से जुड़ा है कि प्रकाश राज के पास कथित तौर पर चार वोटर आईडी कार्ड थे। शिकायतकर्ता का आरोप था कि इनमें एक-एक वोटर आईडी कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु की थी।चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक एक व्यक्ति का नाम केवल एक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में होना चाहिए। हालाँकि, इस मामले में आरोप व अदालत की कार्यवाही और प्रकाश राज के एसआईआर में मतदाता सूची से नाम हटने के दावे को लेकर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि दोनों मामले एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
कर्नाटक में SIR की समयसीमा बढ़ी
इस बीच, कर्नाटक में SIR की प्रक्रिया की समयसीमा बढ़ाई गई है। नए कार्यक्रम के अनुसार राज्य में घर-घर जाकर गणना का चरण 17 अगस्त तक चलेगा। इसके बाद 24 अगस्त को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। ड्राफ्ट सूची पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि 24 अगस्त से 23 सितंबर तक होगी। दावों और आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया 24 अगस्त से शुरू होकर 22 अक्टूबर तक चलेगी। इसके बाद 27 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।SIR के दौरान नाम को लेकर क्या होगा?
मतदाता सूची की इस तरह की पुनरीक्षण प्रक्रिया में किसी मतदाता का नाम संदिग्ध या ASDDO श्रेणी में आने के बाद संबंधित प्रक्रिया के तहत दावे और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकती हैं। इसलिए प्रकाश राज का यह दावा कि उनका नाम SIR के कारण मतदाता सूची से हटा दिया गया है, अंतिम रूप से तभी स्पष्ट होगा जब संबंधित ड्राफ्ट और अंतिम मतदाता सूची तथा चुनाव अधिकारियों की प्रक्रिया सामने आएगी। फिलहाल उनके आरोप ने कर्नाटक में SIR को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
एक तरफ चुनाव संबंधी आंकड़े बेंगलुरु में बड़ी संख्या में ASDDO मामलों की ओर इशारा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रकाश राज जैसे सार्वजनिक चेहरे का नाम कथित तौर पर मतदाता सूची में नहीं होने का दावा इस प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रहा है। अब निगाहें 24 अगस्त को जारी होने वाली ड्राफ्ट मतदाता सूची और उसके बाद दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया पर रहेंगी। यही प्रक्रिया यह स्पष्ट करने में मदद करेगी कि कितने नाम वास्तव में हटाए जाते हैं, कितने नाम वापस जोड़े जाते हैं और कितने मामलों में मतदाता अपने दस्तावेजों के आधार पर अपना नाम सूची में बनाए रखने में सफल होते हैं।