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कर्नाटक: बाग़ी विधायकों पर सस्पेंस जारी, सुप्रीम फ़ैसला आज

कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के बाग़ी विधायकों को सुप्रीम कोर्ट से मंगलवार को भी राहत नहीं मिली ओर कोर्ट ने बुधवार तक के लिए फ़ैसला सुरक्षित रख लिया। यानी इस मामले में सस्पेंस बरकरार है। स्पीकर की भूमिका पर सवाल उठाते हुए दायर की गई अर्जी में बाग़ी विधायकों ने कहा था कि वे इस्तीफ़ा दे चुके हैं, लेकिन स्पीकर उसे जानबूझकर स्वीकार नहीं कर रहे हैं। इस पर मंगलवार को बाग़ी विधायकों और स्पीकर की ओर से पैरवी कर रहे वकीलों ने अपनी-अपनी दलीलें दीं। बता दें कि कोर्ट का बुधवार को यह फ़ैसला तब आएगा जब एक दिन बाद ही यानी गुरुवार को कर्नाटक विधानसभा में जारी सियासी ड्रामे का फ़ैसला 18 जुलाई को होना है। विधानसभा में 11 बजे इस पर बहस शुरू होगी और उसके बाद फ़्लोर टेस्ट होगा। इस फ़्लोर टेस्ट में तय होगा कि कांग्रेस-जेडीएस सरकार बचेगी या गिरेगी।

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कोर्ट में सुनवाई के दौरान कांग्रेस के बाग़ी विधायकों की ओर से पेश मुकुल रोहतगी ने विधायकों की दलीलें रखीं। उन्होंने कहा कि बाग़ी विधायक इस्तीफ़ा दे चुके हैं, वे विधानसभा नहीं जाना चाहते हैं लेकिन उनका इस्तीफ़ा स्वीकार न कर ज़बरदस्ती की जा रही है। उन्होंने कहा कि स्पीकर विधायकों को सदन में बैठने के लिए फ़ोर्स कर रहे हैं जबकि वह ऐसा नहीं कर सकते हैं, वह विधायकों को सरकार के पक्ष में वोट करने के लिए धमका रहे हैं।

मुकुल रोहतगी ने कहा, 'स्पीकर इतने दिनों तक इस्तीफ़ा रोककर नहीं रख सकते। नियम भी यही कहता है कि इस पर जल्द फ़ैसला किया जाना चाहिए।' बाग़ी विधायकों के वकील ने कहा कि यह विधायकों के इस्तीफ़े को टालने की कोशिश है। स्पीकर एक ही समय में इस्तीफ़े और अयोग्यता दोनों मुद्दों पर फ़ैसला करने का प्रयास कर रहे हैं।

‘स्पीकर को ऐसे निर्देश नहीं दे सकते’

स्पीकर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट से कहा कि स्पीकर से समयबद्ध तरीक़े से मामले को तय करने के लिए नहीं कहा जा सकता है। सिंघवी ने कोर्ट से पूछा, ‘विशेष तरीक़े से निर्णय लेने के लिए स्पीकर को कैसे निर्देशित किया जा सकता है? इस तरह के आदेश एक ट्रायल कोर्ट को भी नहीं दिए जाते हैं।’

कर्नाटक के सीएम एच. डी. कुमारस्वामी का कहना है कि सरकार को अस्थिर करने के लिए बाग़ी विधायकों को निशाना बनाया जा रहा है, वे एक साथ होटल गए। कुमारस्वामी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन का कहना है कि स्पीकर को समयबद्ध तरीक़े से निर्णय लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पास विधायकों के इस्तीफ़े, अयोग्यता पर स्पीकर को यथास्थिति बनाए रखने के लिए कहने वाले अंतरिम आदेशों को पारित करने का अधिकार क्षेत्र नहीं है। धवन ने कोर्ट को बताया कि यह स्पीकर बनाम कोर्ट नहीं है; यह सीएम और किसी ऐसे व्यक्ति के बीच का मामला है जो सरकार को गिराकर सीएम बनना चाहता है।

कर्नाटक में सियासी हलचल

ग़ौरतलब है कि कर्नाटक में बीते कुछ दिनों से राजनीतिक हलचल काफी तेज़ है। राज्‍य के अब तक कुल 15 विधायक याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट से उनके इस्‍तीफ़े को स्‍वीकार करने की माँग कर रहे हैं। बाग़ी विधायकों ने विधानसभा स्पीकर रमेश कुमार द्वारा इस्तीफ़ा मंज़ूर न किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट का रुख़ किया था। शुरुआत में 10 कांग्रेसी विधायकों ने अर्जी लगाई थी। बाद में पाँच और विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष द्वारा इस्तीफ़ा स्वीकार नहीं किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। ये विधायक सुप्रीम कोर्ट से उनका इस्तीफ़ा स्वीकार करने के लिए कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष को निर्देश देने की माँग कर रहे हैं। 

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कब शुरू हुआ कर्नाटक संकट?

यह राजनीतिक संकट तब शुरू हुआ था जब कांग्रेस और जेडीएस के 13 विधायकों ने इस्तीफ़ा दे दिया था और बाद में कई और विधायकों ने भी इस्तीफ़ा दिया था। हालाँकि विधानसभा के स्पीकर ने इसे मंज़ूर नहीं किया। बाद में इस मामले को कोर्ट में ले जाया गया। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान राज्य में 16 जुलाई तक स्थिति को जस की तस बनाए रखने का आदेश दिया था। इस बीच कांग्रेस नेतृत्व ने बाग़ी विधायकों को मनाने की बहुत कोशिश की और अपने संकटमोचक डी.के. शिवकुमार को भी भेजा, लेकिन उससे बहुत ज़्यादा सफलता मिलती नहीं दिख रही है। 

बता दें कि 224 सदस्यीय सदन में कर्नाटक-जेडीएस गठबंधन में अध्यक्ष को छोड़कर कुल 116 विधायक हैं। इसमें कांग्रेस के 78, जेडीएस के 37 और बीएसपी का 1 विधायक है। लेकिन 16 विधायकों के इस्तीफे़ के बाद यह संख्या घटकर 100 हो गई है। दो निर्दलीय विधायकों के समर्थन के साथ बीजेपी के विधायकों की संख्या 107 है। 

कर्नाटक की सत्ता पर लंबे समय से बीजेपी की नज़र है। लोकसभा चुनाव में सबसे ज़्यादा सीटें जीतने के बाद भी वह सरकार बनाने में नाकामयाब रही थी। सरकार बनाने के लिए उसने ‘ऑपरेशन लोटस’ भी चलाया था और कांग्रेस-जेडीएस के विधायकों को तोड़ने की कोशिश की थी।

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