केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ (UDF) की शानदार जीत के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर पार्टी में हलचल शुरू हो गई है। चुनाव में यूडीएफ की जीत के बावजूद नए सीएम का मुद्दा अनसुलझा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के दिल्ली आवास पर बुधवार को केरल के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त मुकुल वासनिक, संचार प्रभारी जयराम रमेश, अजय माकन की बैठक हुई। तिरुवनंतपुरम में गुरुवार 7 मई को कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई गई है, जिसमें नेता का चयन यानी संभावित मुख्यमंत्री का फैसला हो सकता है। मुकुल वासनिक और अजय माकन बुधवार की रात को ही तिरुवनंतपुरम पहुंच जाएंगे।

नेता चयन को लेकर राहुल गांधी का निर्देश

पार्टी के सूत्रों का कहना है कि सबकुछ राहुल गांधी के फैसले पर निर्भर है, लेकिन विधायकों की राय लेने में समय लग सकता है। इस दौड़ में तीन प्रमुख नाम हैं - विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीशन, एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल और वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला। कांग्रेस में यह परंपरा रही है कि विधायक दल की बैठक के बाद घोषणा की जाती है कि सब कुछ शीर्ष नेतृत्व पर छोड़ दिया गया है, वो जो फैसला करेंगे, उन्हें मंजूर होगा। लेकिन केरल में इस बार इसकी संभावना कम है। सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी का निर्देश है कि विधायकों की राय ज़रूर पूछी जाए और फैसला भी उसी अनुसार लिया जाए। किसी की पसंद या नापसंद से नाम नहीं तय होगा।

मुकुल वासनिक का बयान

केरल के लिए कांग्रेस के पर्यवेक्षक मुकुल वासनिक ने कहा, "मुझे आज केरल के लिए रवाना होना है। केरल जाने से ठीक पहले हमने सोचा कि हमें कांग्रेस अध्यक्ष से मिलना चाहिए। हम वहां सीएलपी बैठक करेंगे, और तभी हमें पता चलेगा कि कांग्रेस विधायकों की क्या इच्छाएं हैं। इसके आधार पर हम पार्टी नेतृत्व को अपनी रिपोर्ट देंगे।" कांग्रेस नेता और केरल के प्रचार अभियान में खासतौर पर शामिल दीपा दास मुंशी ने भी बुधवार को बताया कि केरल में मुख्यमंत्री चयन के लिए सीनियर नेता मुकुल वासनिक और अजय माकन को एआईसीसी ने ऑब्जर्वर नियुक्त किया है। गुरुवार सुबह 10.30 बजे CLP की बैठक बुलाई गई है जहां विधायकों से राय लेने के बाद एक लाइन का प्रस्ताव पारित कर फैसला कांग्रेस आलाकमान पर छोड़ा जाएगा।
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रमेश चेन्निथला का बयान

मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार और वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने बुधवार को कहा कि सोशल मीडिया अभियान और फ्लेक्सबोर्ड लगाने से केरल के मुख्यमंत्री का फैसला नहीं होगा। चेन्निथला ने दिल्ली में पत्रकारों के उन सवालों के जवाब में यह टिप्पणी की, जो वी डी सतीशन के पक्ष में चल रहे ज़ोरदार सोशल मीडिया अभियान से संबंधित थे। सतीशन का मानना ​​है कि उन्होंने ही यूडीएफ के चुनाव अभियान का नेतृत्व किया था।

वीडी सतीशन भी हैं दावेदार

वीडी सतीशन को सीएम रेस में सबसे आगे माना जा रहा है। उन्होंने पांच साल विपक्ष में रहकर यूडीएफ को एकजुट रखा और भारी जीत दिलाई। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के 22 विधायकों का समर्थन भी उनके पक्ष में है, जिससे वे आम सहमति के चेहरे के रूप में उभर रहे हैं। हालांकि आईयूएमएल नेताओं का कहना है कि कांग्रेस आलाकमान का जो भी फैसला होगा, उस पर उनकी सहमति रहेगी। लेकिन अगर उनकी राय पूछी जाती है तो वे वीडी सतीशन के पक्ष में ज्यादा हैं। उनका कहना है कि वेणुगोपाल और चेन्निथला ज्यादातर दिल्ली में रहते हैं और वहां शीर्ष नेताओं से जुड़े हुए हैं। जबकि सतीशन केरल में हर समय मौजूद रहते हैं।

वेणुगोपाल और चेन्निथला

दोनों राहुल गांधी के नज़दीकी और पुराने वफादार कांग्रेसी हैं। केसी वेणुगोपाल के समर्थक दावा कर रहे हैं कि काफी संख्या में विधायक और सांसद उनके साथ हैं। वे संगठनात्मक ताकत और केंद्रीय समर्थन का हवाला दे रहे हैं। इसी तरह रमेश चेन्निथला अनुभव और वरिष्ठता के आधार पर दावेदारी पेश कर रहे हैं। वे विपक्ष का पुराना चेहरा और कई बार के विधायक रह चुके हैं। उन्होंने कहा है कि नेतृत्व चयन में वरिष्ठता को महत्व दिया जाना चाहिए।
कांग्रेस के पास 140 सदस्यीय विधानसभा में 63 सीटें हैं, जो यूडीएफ की कुल 102 सीटों में सबसे बड़ी संख्या है। इससे पहले सीपीएम के नेतृत्व वाले एलडीएफ की दो टर्म की सरकार को हटाया गया है। एलडीएफ केवल 35 सीटों पर सिमट गई।
पार्टी में सहमति बनाने पर जोर है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी की एक बैठक देर रात हो सकती है। हालांकि, तीन चेहरे होने से पार्टी में काफी पसोपेश देखा जा रहा है। अगर मुख्य दावेदारों के बाहर कोई समझौता नाम चुना गया तो सतीशन और चेन्निथला दोनों गुट कैबिनेट गठन में कम भूमिका स्वीकार नहीं करेंगे। सहयोगी दलों की राय भी सुनी जाएगी, हालांकि कांग्रेस अपनी संख्या के आधार पर किसी दबाव में नहीं है। केरल का फैसला कांग्रेस के लिए आसान नहीं है।