केरल में एक दलित मेडिकल छात्र की मौत के बाद मामला गरमा गया है। परिवार का आरोप है कि कॉलेज के शिक्षकों ने जाति और रंग के आधार पर अपमानित किया। तो क्या रोहित वेमुला घटना के बाद भी कॉलेजों में दलित छात्रों का उत्पीड़न रुका नहीं है?
केरल में एक दलित मेडिकल छात्र की मौत ने हैदराबाद के रोहित वेमुला मामले की याद ताज़ा करा दी। केरल शिक्षित, प्रगतिशील और सामाजिक न्याय वाले राज्य के रूप में जाना जाता है, लेकिन कन्नूर डेंटल कॉलेज में 22 वर्षीय दलित छात्र नितिन राज की मौत ने राज्य की इस छवि पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। छात्र की मौत पर परिवार के आरोप, ऑडियो क्लिप और विरोध प्रदर्शनों से जो बात निकलकर आई है, वह बेहद गंभीर है। आरोप लग रहे हैं कि कॉलेज के शिक्षकों ने छात्र को उसकी जाति और रंग के कारण लगातार अपमानित किया। इसने छात्र का इतना मानसिक उत्पीड़न किया कि वह इसे सह नहीं सका।
घटना शुक्रवार यानी 10 अप्रैल को हुई थी। कन्नूर के अंजराकंडी स्थित डेंटल कॉलेज में पढ़ने वाला 22 साल का दलित छात्र नितिन राज आर.एल. कॉलेज कैंपस में एक इमारत से गिर गये। उन्हें तुरंत कन्नूर मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। परिवार का कहना है कि नितिन ने खुदकुशी नहीं की, बल्कि इसमें कुछ गड़बड़ी हो सकती है। वे पूरी सच्चाई जानना चाहते हैं।
परिवार के आरोप
नितिन तिरुवनंतपुरम जिले के उझामलक्कल गांव के रहने वाले थे। उन्होंने सितंबर 2025 में सेल्फ-फाइनेंसिंग डेंटल कॉलेज में दाखिला लिया था। उनके पिता दिहाड़ी मजदूर हैं और परिवार बहुत साधारण है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार नितिन की बहन निकिता ने बताया कि भाई को बार-बार उसके काले रंग, जाति और माता-पिता के काम के लिए ताने दिए जाते थे। उन्होंने आरोप लगाया, "विभागाध्यक्ष उसे 'पागल कुत्ता' कहकर बुलाते थे। क्लास में दूसरों के सामने उसे अपमानित किया जाता था और बाकी छात्रों के सामने उसकी खिल्ली उड़ाई जाती थी।'
रिपोर्ट के अनुसार निकिता ने कहा, 'मौत से दो घंटे पहले भी नितिन हमसे बात कर रहा था। वह मेडिकल कॉलेज की इमारत से गिरा, न कि अपने डेंटल कॉलेज की बिल्डिंग से। हमें साज़िश की आशंका है।'
इस बीच एक एक ऑडियो क्लिप भी सामने आई है, जिसमें नितिन की आवाज़ बताई जा रही है। क्लिप में उन्हें कहते सुना जा सकता है, 'शिक्षक ने खुलेआम मुझे अपमानित किया। मेरी आंसर शीट क्लास में सबको दिखाई गई और स्पेलिंग मिस्टेक पर मजाक उड़ाया गया।'
वीडियो क्लिप में उनको यह कहते सुना जा सकता है, "कल क्लास में मेरी मां का मजाक उड़ाया गया। शिक्षक ने स्टाफ रूम से निकलकर मुझे इडियट कहा। मैंने जवाब दिया 'सेम टू यू'। स्टाफ रूम में गैंग अटैक होता है। शिक्षक ने कहा अगर बोला तो हाथ-पैर काट दूंगा।" नितिन ने यह भी बताया कि शिक्षक ने धमकी दी कि अगर वह कुछ बोला तो उसके हाथ-पैर काट दिए जाएँगे।
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने पहले अननेचुरल डेथ का केस दर्ज किया था। बाद में रविवार को आत्महत्या के लिए उकसाने यानी बीएनएस की धारा 108 और एससी-एसटी अत्याचार निवारण कानून की धाराएं जोड़ी गईं। दो शिक्षकों- डेंटल एनाटॉमी विभाग के हेड डॉ. एम.के. राम और एसोसिएट प्रोफेसर के.टी. संगीता नाम्बियार के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
पुलिस ने एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनाई है। पुलिस ने कहा है कि शुरुआती जाँच में कहा गया है कि नितिन ने एक ऑनलाइन लोन ऐप से लोन लिया था। चुकाने में देरी होने पर लोन एजेंट्स फोन पर धमकियां देते थे। ये एजेंट्स कॉलेज के शिक्षकों से भी संपर्क में थे। साइबर पुलिस ने लोन ऐप के खिलाफ अलग केस दर्ज किया है।
कॉलेज प्रशासन की कार्रवाई
विवाद गहराने के बाद अब कॉलेज मैनेजमेंट ने भी कार्रवाई की है। रविवार को विभागाध्यक्ष और एक एसोसिएट प्रोफेसर को सस्पेंड कर दिया गया। आरोपों की जांच के लिए आंतरिक जांच समिति बनाई गई है। प्रिंसिपल विनोद मोनी ने मीडिया को कोई जवाब नहीं दिया।
राज्य में विरोध प्रदर्शन
इस घटना से पूरे केरल में आक्रोश फैल गया है। कई छात्र संगठनों, राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। केरल स्टेट ह्यूमन राइट्स कमीशन ने कन्नूर सिटी पुलिस कमिश्नर से रिपोर्ट मांगी है। कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने कहा कि केरल खुद को प्रगतिशील राज्य कहता है, लेकिन यहां जातिगत भेदभाव अभी भी है। उन्होंने कहा, 'पिछले दस साल में एलडीएफ सरकार के दौरान एससी-एसटी समुदाय पर हमले बढ़े हैं।' उन्होंने हाई-लेवल जांच की मांग की। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी घटना पर दुख जताया और पूरी जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि कैंपस में जहर की संस्कृति फैली है।
केरल जैसे शिक्षित राज्य में भी गंभीर भेदभाव?
केरल साक्षरता, स्वास्थ्य और सामाजिक सुधारों के लिए जाना जाता है। यहां जातिवाद नहीं होता, ऐसा दावा किया जाता है। लेकिन नितिन जैसी घटनाएं दिखाती हैं कि शिक्षा संस्थानों में भी पुरानी सोच हावी है। इस मामले में शिक्षकों पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। शिक्षक छात्रों को प्रोत्साहित करने वाले होते हैं, न कि तोड़ने वाले। अगर आंसर शीट शेयर करके अपमानित किया जाता है, मां-बाप का मजाक उड़ाया जाता है, तो छात्र का आत्मविश्वास कैसे बचेगा? कई छात्र पहले भी विभागाध्यक्ष के खिलाफ शिकायत कर चुके थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
नितिन जैसे छात्र बिना किसी सपोर्ट के मेरिट से आते हैं। लेकिन कॉलेज में अगर रंग, जाति और पैसे के आधार पर भेदभाव होता है, तो वे टूट जाते हैं। लोन का बोझ भी बढ़ जाता है।
रोहित वेमुला के साथ क्या हुआ था?
इधर, रोहित वेमुला ने 17 जनवरी 2016 को हैदराबाद विश्वविद्यालय के एक होस्टल कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा था, जो बहुत चर्चित हुआ। रोहित वेमुला के सुसाइड नोट में लिखा था, "मेरा जन्म एक भयंकर हादसा था। मैं अपने बचपन के अकेलेपन से कभी उबर नहीं पाया। बचपन में मुझे किसी का प्यार नहीं मिला। इस क्षण मैं आहत नहीं हूं, मैं दुखी नहीं हूं। मैं बस खाली हूं। मुझे अपनी भी चिंता नहीं है। ये दयनीय है और यही कारण है कि मैं ऐसा कर रहा हूं। मुझे हमेशा अपनी आत्मा और शरीर के बीच बढ़ता हुआ अंतर महसूस होता है। मैं एक राक्षस बन गया हूं। किसी को भी मेरी इस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार न ठहराएं। कोई भी मुझे भड़काने या उकसाने के लिए जिम्मेदार नहीं है। यह मेरा अपना फैसला है।"
रोहित आंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन से जुड़े थे। उन पर और उनके चार साथियों पर एबीवीपी के एक नेता से झड़प का आरोप लगा था। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें सस्पेंड कर दिया, होस्टल से बाहर कर दिया, और फेलोशिप रोक दी। वे कई दिनों तक कैंपस में तंबू लगाकर विरोध कर रहे थे। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि यह जातिगत भेदभाव, संस्थागत उत्पीड़न और राजनीतिक दबाव से जुड़े आरोप का नतीजा था। उनकी मौत को 'संस्थागत हत्या' कहा गया।क्या सीख मिलनी चाहिए?
यह घटना सिर्फ एक कॉलेज की नहीं है। यह पूरे समाज को सोचने पर मजबूर करती है कि शिक्षा संस्थानों में एंटी-रैगिंग और एंटी-डिस्क्रिमिनेशन कमेटी कितनी सक्रिय हैं? छात्र शिकायत करें तो सुनवाई होती है या दबा दी जाती है? शिक्षकों को संवेदनशीलता की ट्रेनिंग क्यों नहीं दी जाती? नितिन होनहार छात्र थे। उन्होंने मेहनत से डॉक्टर बनने का सपना देखा था। लेकिन अगर अपमान और तनाव ने उसे तोड़ दिया, तो यह सिर्फ उनकी मौत नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी है।