मध्य प्रदेश में मूँग की 100% सरकारी खरीदी (MSP), ई-टोकन व्यवस्था हटाने और खाद संकट को लेकर हजारों किसान भोपाल पहुंच गए हैं। आज बुधवार को वो सीएम आवास तक मार्च कर रहे हैं।
भोपाल में हज़ारों किसान आ पहुंचे हैं
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की सड़कें किसानों के नारों और प्रदर्शन से गूंज रही हैं। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले नर्मदापुरम (होशंगाबाद) से शुरू हुई 'किसान क्रांति पदयात्रा' कई सुरक्षा बैरिकेड्स को तोड़ती हुई भोपाल की दहलीज पर पहुँच गई है। हजारों की संख्या में किसान होशंगाबाद रोड (वीर सावरकर सेतु व 11 मील क्षेत्र) पर डटे हुए हैं। बुधवार को उन्होंने सीएम आवास तक जाने की घोषणा की है।
एक हफ्ते का राशन-पानी साथ लाए किसान
किसानों की तैयारी किसी लंबे आंदोलन जैसी दिखती है। अपने साथ एक हफ्ते का राशन, पानी, चूल्हा और तिरपाल लेकर आए किसान मंगलवार रात खुले आसमान के नीचे सड़कों पर ही डटे रहे। कई जगहों पर किसानों को भजन और हनुमान चालीसा का पाठ करते देखा गया। किसान नेताओं का साफ कहना है कि जब तक मुख्यमंत्री उनकी माँगों पर लिखित गारंटी नहीं देते, वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।क्या है मूंग आंदोलन
यह मध्य प्रदेश के किसानों द्वारा ग्रीष्मकालीन मूँग (Summer Moong) की 100% सरकारी खरीदी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर कराने, ई-टोकन व्यवस्था खत्म करने और खाद वितरण में सुधार की माँग को लेकर किया जा रहा एक बड़ा प्रदर्शन है। किसान नर्मदापुरम से पैदल मार्च करते हुए ओबेदुल्लागंज, बरखेड़ा होते हुए भोपाल पहुंचे हैं।
मध्य प्रदेश के किसान मूंग आंदोलन क्यों कर रहे हैं
- सीमित सरकारी खरीद (25%-40% कैप): केंद्र/राज्य सरकार के मौजूदा नियमों के अनुसार कुल अनुमानित उत्पादन की केवल 25% (या अधिकतम 40%) फसल ही MSP पर खरीदी जा रही है।
- भारी आर्थिक नुकसान: इस साल मूँग का MSP ₹8,768 प्रति क्विंटल तय हुआ है। सरकारी कोटा सीमित होने के कारण किसानों को अपनी बाकी 60-75% मूँग खुले बाजार/मंडी में केवल ₹6,000 से ₹7,000 में बेचनी पड़ रही है, जिससे उन्हें प्रति क्विंटल 1,500 से 2,500 रुपये का सीधा घाटा हो रहा है।
- ई-टोकन और पोर्टल की समस्या: खरीदी पोर्टल पर स्लॉट न मिलना, सर्वर डाउन रहना और ई-टोकन की जटिल प्रक्रिया के कारण किसानों को स्लॉट नहीं मिल पाते।
- खाद की किल्लत और वितरण में धांधली: खरीफ सीजन के दौरान डीएपी और यूरिया खाद की भारी किल्लत है; किसान माँग कर रहे हैं कि खाद का वितरण जमीन के रकबे (Land Records) के आधार पर पारदर्शी तरीके से हो।
मूँग पर 100% MSP गारंटी की माँग क्योंः किसान तर्क दे रहे हैं कि जब सरकार ने तुअर (अरहर), उड़द और मसूर की 100% उपज MSP पर खरीदने की नीति बनाई है, तो मूँग के साथ भेदभाव क्यों? इसके अलावा, सरकार ने खुद किसानों को ग्रीष्मकालीन मूँग उगाने के लिए प्रोत्साहित किया था, लेकिन फसल तैयार होने पर खरीदी का कोटा सीमित कर दिया।
किसानों के भोपाल में प्रवेश करने और होशंगाबाद रोड पर धरना देने से कई मुख्य मार्गों पर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। रानी कमलापति स्टेशन, 11 मील और एमपी नगर को जोड़ने वाले रास्तों पर गाड़ियाँ रेंगती नजर आईं। भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। देर रात कृषि मंत्री ने किसान प्रतिनिधियों से वार्ता की और केंद्र सरकार से मूँग खरीदी का लक्ष्य बढ़ाने की अपील की है, लेकिन किसान ठोस आदेश मिलने तक टस से मस होने को तैयार नहीं हैं।
मध्य प्रदेश की मंडियों में बदहाली
मध्य प्रदेश की मंडियों में अराजकता का माहौल है। सिर्फ व्यापारियों और आढ़तियों की चल रही है। मंडियों में व्यापारी और बिचौलिए किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी कम कीमत (प्रायः ₹1,000 से ₹2,000 प्रति क्विंटल कम) पर मूँग खरीदने का दबाव बना रहे हैं। सरकार पंजीकरण (Registration) के माध्यम से मूँग तो खरीदती है, लेकिन प्रति एकड़/प्रति किसान एक सीमित कोटा तय कर देती है। इससे किसान की बची हुई 30% से 50% फसल खुले बाजार में औने-पौने दाम पर बिकती है।
खाद की ब्लैकमार्केटिंग
मूँग आंदोलन के साथ-साथ किसान खाद (डीएपी और यूरिया) की किल्लत और उसकी वितरण व्यवस्था से भी बुरी तरह परेशान हैं। बुआई के सीजन में किसानों को खाद के लिए सोसाइटियों और गोदामों के बाहर कई-कई दिनों तक लाइनों में लगना पड़ता है। किसानों का कहना है कि खाद वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाया जाए, सोसाइटियों में समय पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराया जाए और कालाबाजारी पर रोक लगाई जाए।
किसानों का कहना है कि वे किसी खोखले आश्वासन पर लौटने वाले नहीं हैं। यदि सरकार मूँग की पूरी फसल की खरीद और खाद संकट के ठोस समाधान की लिखित गारंटी नहीं देती है, तो यह आंदोलन और अधिक तीव्र रूप ले सकता है। फिलहाल भोपाल प्रशासन और पुलिस बल अलर्ट पर हैं और किसानों को CM हाउस की ओर बढ़ने से रोकने के लिए सुरक्षा बढ़ा दी गई है।