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क्या सीएम शिवराज को ‘लापरवाही’ भारी पड़ी...? 

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कोरोना पाॅजिटिव पाये गये हैं। रिपोर्ट पाॅजिटिव आते ही वे हॉस्पिटलाइज्ड हो गये हैं। शिवराज ने प्रदेश की जनता से अपना ख्याल रखने की अपील करते हुए स्वयं के संपर्क में आये मंत्री-अफ़सरों और अन्य मुलाकातियों से क्वारेंटीन होने का आग्रह किया है।

शिवराज सिंह चौहान ने बीती 23 मार्च को चौथी बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री का पद संभाला था। सत्ता संभालने के बाद से देखने में आया कि मुख्यमंत्री सतत रूप से लोगों के बीच आते-जाते रहे। कोरोना को लेकर वे निरंतर बैठकें करते रहे। कई अफ़सर कोरोना पाॅजिटिव मिले। विधायकों में कोरोना मिला। दो दिन पहले एक सहयोगी मंत्री का ‘कोविड-19’ टेस्ट पाॅजिटिव आया।

आसपास रहे लोगों के कोरोना संक्रमित होने के बाद भी मुख्यमंत्री बिना रुके कामकाज करते रहे। वे क्वारेंटीन नहीं हुए। पार्टी की बैठकों में शामिल होते रहे।

कई बार भारी भीड़ की वजह से सोशल डिस्टेंसिंग के पैमाने टूटते नजर आये। चौहान राज्यपाल लालजी टंडन की लखनऊ में अंत्येष्टि में शामिल हुए थे। हालांकि कई बार उन्होंने स्वयं और परिवारजनों का कोरोना का टेस्ट कराया। पूर्व में कराये गये टेस्ट निगेटिव आते रहे।

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सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया के कोरोना पाॅजिटिव पाये जाने के बाद सीएम ने फिर से टेस्ट कराया। इसकी रिपोर्ट पाॅजिटिव आयी। सीएम को कोरोना होने की भनक लगते ही हड़कंप मच गया। सबसे ज्यादा चिंतित वे लोग हैं जो नियमित तौर पर सीएम के बेहद निकट बने रहते हैं। खास तौर पर सीएम की सुरक्षा में रहने वाले कर्मी खासे भयभीत हैं।

कोरोना होने की सूचना स्वयं मुख्यमंत्री शिवराज ने एक ट्वीट के जरिये दी। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से एहतियात बरतने का अनुरोध किया है। सीएम ने उनके बेहद निकट रहने वालों से क्वारेंटीन होने और जांच कराने का आग्रह भी किया है।

'डॉक्टर्स के निर्देश मानें'

मुख्यमंत्री ने कहा है, ‘मुझे डॉक्टर्स ने अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी है, मैं #COVID19 डेडिकेटेड चिरायु अस्पताल में भर्ती होने जा रहा हूँ। कोरोना के मरीज को ज़िद नहीं करनी चाहिए कि हम होम क्वारेंटीन ही रहेंगे या अस्पताल नहीं जायेंगे। हमें डॉक्टर्स के निर्देश का पालन करना चाहिये।’

इस बीच मुख्यमंत्री के निवास और कार्यालय को सेनेटाइज्ड करने का काम भी शुरू हो गया है। सीएम के परिजनों की जांच करने की भी सूचनाएं हैं। उधर, बीजेपी के साथ विपक्ष के नेताओं ने भी शिवराज के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है।

मंत्री-नेता और अफ़सर भी करायेंगे टेस्ट

मुख्यमंत्री के साथ कैबिनेट की बैठकों में शिरकत करने वाले सभी सहयोगी मंत्री, हाल ही में मिलने वाले सांसद-विधायक और अफ़सर भी कोरोना की जांच कराने जा रहे हैं। पार्टी के वे नेता भी अपने नमूने दे रहे हैं, जो मुख्यमंत्री के साथ कार्यक्रमों में शामिल रहे या जिन्होंने सीएम से मुलाकात की।

सांसद के भाई-भाभी को भी कोरोना

इंदौर के बीजेपी सांसद शंकर लालवानी के भाई और भाभी भी कोरोना संक्रमित निकले हैं। पिछले दिनों इंदौर सांसद ने ट्वीट कर बताया था कि उनके पड़ोसी कोरोना से संक्रमित हुए हैं। यह ख़बर भी सुर्खियों में रही थी कि पड़ोसियों के संक्रमित निकलने के बाद सांसद के कथित दबाव और रसूख़ के मद्देनजर कोविड-19 प्रोटोकाॅल का पालन नहीं किया गया। क्षेत्र को सील ना करने को लेकर सवाल उठाये गये थे। कोरोना अब सांसद लालवानी के घर पहुंच गया है।

भोपाल में मार्च महीने में कोरोना का पहला पाॅजिटिव केस सामने आया था। इसके बाद संक्रमण के मामले सामने आते रहे। राजधानी में पिछले दस-बारह दिनों से रोगी तेज गति से बढ़ रहे हैं। भोपाल में दस दिनों का टोटल लॉकडाउन लागू किया गया है।

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भोपाल में लॉकडाउन के पहले दिन शनिवार को पिछले 24 घंटों में सबसे ज्यादा 221 रोगी मिले। यह अब तक का एक दिन का सबसे बड़ा आंकड़ा है। सीएम भी नये रोगियों में शामिल हैं।

भोपाल में अब कोरोना संक्रमितों की संख्या साढ़े पांच हजार पार हो गई है। मृतकों की संख्या 150 पार है। करीब साढ़े तीन हजार रोगी ठीक होकर घरों को भी लौटे हैं।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह भोपाल के जिस निजी अस्पताल में भर्ती हुए हैं, उस अस्पताल के संचालक डाॅक्टर के चार परिजन भी कोरोना संक्रमित पाये गये हैं। भोपाल में इस निजी अस्पताल को सरकार ने ‘कोविड-19’ के उपचार के लिए अप्रैल माह में चिन्हित किया था। पिछले तीन महीनों में अस्पताल ने दो हजार से ज्यादा रोगियों का उपचार किया है।

कई बार पीते थे काढ़ा

शिवराज कोरोना से बचने के लिए दिन भर में कई बार आयुर्वेदिक काढ़ा पीते थे। अनेक अवसरों पर उन्होंने काढ़ा पीने सलाह राज्य की जनता को भी दी। शिवराज सरकार ने काढ़े के करोड़ों पैकेट जनता को मुफ्त वितरित भी कराये।

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संजीव श्रीवास्तव
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