मध्य प्रदेश में मॉब लिंचिंग के 14 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाने वाली जज तबस्सुम खान को धमकियां मिलने के मामले में पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह कार्रवाई उस फैसले के बाद हुई, जिसमें अदालत ने वर्ष 2022 में एक मुस्लिम ट्रक चालक की पीट-पीटकर हत्या के मामले में सभी 14 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद से जज के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर धमकियाँ मिलने लगीं और उनको उनकी धार्मिक पहचान को लेकर निशाना बनाया जाने लगा। इन धमकियों की वजह से उनकी सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है।

यह मामला महाराष्ट्र के अमरावती निवासी नजीर अहमद की हत्या से जुड़ा है। 3 अगस्त 2022 को नजीर अहमद अपने दो साथियों के साथ मवेशियों को लेकर महाराष्ट्र लौट रहे थे। जब उनका वाहन मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के सिवनी मालवा के पास बराखड़ गांव पहुंचा, तब करीब 50 से 60 लोगों की भीड़ ने उन्हें रोक लिया। प्रत्यक्षदर्शी और घटना में घायल बचे शेख लाला के अनुसार, भीड़ ने बिना कोई सवाल पूछे तीनों पर हमला कर दिया। इस हमले में नजीर अहमद की मौत हो गई, जबकि उनके दो साथी गंभीर रूप से घायल हुए। उनकी जान बच गई।
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14 लोगों को मिली उम्रकैद

पुलिस जांच के बाद 14 लोगों के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, दंगा और गलत तरीके से रोकने समेत कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया। करीब तीन साल तक चली सुनवाई के बाद 12 जून 2026 को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश तबस्सुम खान ने दोनों संबंधित मामलों में सभी 14 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

सजा पाने वालों में दीपक उर्फ बाबा केवट, अजय उर्फ अज्जू राठौर, प्रकाश कौशल, पवन बाथव, अमर उर्फ भोला बाथव, कन्हैया बाथव, बल्लू उर्फ अनुज रघुवंशी, राजू उर्फ राजेंद्र कौशल, आकाश उर्फ पिंटोली बाथव, गौरव यादव, आकाश सराठे, चेतन मराठा, देवेंद्र उर्फ छोटू कोरी और संदीप उर्फ राजा कौशल शामिल हैं। सभी आरोपी सिवनी मालवा क्षेत्र के रहने वाले हैं।

फ़ैसले के बाद कोर्ट परिसर में प्रदर्शन

फ़ैसला आने के तुरंत बाद दोषियों के परिजनों ने अदालत परिसर के बाहर प्रदर्शन किया। आरोप है कि उन्होंने दोषियों को जेल ले जा रहे पुलिस वाहन को रोकने की भी कोशिश की।

फ़ैसले के कुछ समय बाद सोशल मीडिया पर न्यायाधीश तबस्सुम खान के खिलाफ कई पोस्ट, वीडियो और संदेश वायरल होने लगे, जिनमें उनकी धार्मिक पहचान को निशाना बनाया गया।

जज को मिली धमकियां, सांप्रदायिक अभियान शुरू

फ़ैसले के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने न्यायाधीश तबस्सुम खान के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। कुछ पोस्ट में उन्हें सांप्रदायिक भाषा का इस्तेमाल करते हुए निशाना बनाया गया, जबकि कुछ वीडियो में कथित तौर पर हिंसा और जान से मारने जैसी धमकियां दी गईं। इन पोस्टों में अदालत के फैसले को न्यायिक निर्णय के बजाय जज की धार्मिक पहचान से जोड़कर पेश करने की कोशिश की गई।

पुलिस ने दर्ज की एफआईआर

सिवनी मालवा पुलिस ने इस पूरे मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 यानी समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने और धारा 302 यानी सार्वजनिक शांति भंग करने और नफरत फैलाने से जुड़े आरोपों वाली धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है।

पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर साझा की गई सामग्री की जांच की जा रही है और जिन लोगों ने धमकी भरे या भड़काऊ संदेश पोस्ट किए हैं, उनकी पहचान की जा रही है।

सोशल मीडिया पर जज को धमकियाँ

फैसले के बाद कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए। इनमें कुछ लोगों ने दोषियों की रिहाई की मांग की, जबकि कुछ वीडियो में जज तबस्सुम खान के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल किया गया।

ऑल्ट न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार जो वीडियो ज्यादातर लोगों तक पहुँचा वह ठाकुर विशाल सिंह नाम के शख्स का था। रिपोर्ट के अनुसार अपने फोन कैमरे में उसने एक मौजूदा न्यायाधीश को धमकी देते हुए खुलेआम अपशब्दों और सांप्रदायिक गालियों का इस्तेमाल किया। इसने गालियों का इस्तेमाल करते हुए धमकी दी, 'यदि 14 दिन में हमारे 14 भाइयों को रिहा नहीं किया गया तो पूरे देश में खून-खराबा हो जाएगा। ...उसने हमारे 14 भाइयों को आजीवन कारावास में डाल दिया है। सोचो जब एक मुल्ला पीएम बन जाएगा तो क्या होगा।' रिपोर्ट के अनुसार वीडियो वायरल होने के बाद उसे पोस्ट करने वाले व्यक्ति ने अपना इंस्टाग्राम कंटेंट हटा दिया। उसके अन्य वीडियो भी सोशल मीडिया पर साझा किए जाते रहे। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके बाद कई सोशल मीडिया खातों ने इसको शेयर किया।

कई इन्फ्लूएंसर गौरक्षकों ने भी इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई। 2023 में नासिर और जुनैद की हत्या के आरोपी मोहित 'मोनू' मानेसर ने एक वीडियो जारी करके इस फ़ैसले की निंदा की और हिंदुओं से एकजुट होने की अपील की।

ऑल्ट न्यूज़ के अनुसार विवादित चैनल सुदर्शन न्यूज़ टीवी के सुरेश चव्हाणके ने दोषियों के प्रति लगातार समर्थन दिखाया। उन्होंने अपने दर्शकों से 'आवाज़ उठाने' को कहा और कहा कि 'आपके परिवार के जो सदस्य गौ माता को बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं, उन्हें भी उम्रकैद हो सकती है'। उनके एक शो में टिकर पर यह संदेश चल रहा था- "हम पीड़ितों के परिवार के साथ खड़े हैं"। सुदर्शन न्यूज़ टीवी के आधिकारिक हैंडल से ट्वीट किया गया- "हम मुस्लिम जज के फ़ैसले का खुलकर विरोध करते हैं"।

कई संगठनों ने किया विरोध

फ़ैसले के बाद कुछ दक्षिणपंथी संगठनों और गौ-रक्षा से जुड़े समूहों ने दोषियों की रिहाई की मांग को लेकर प्रदर्शन किए। ऑल्ट न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार पंजाब के पीर मुच्छल्ला में गौ रक्षा परिषद ने प्रदर्शन करते हुए जज का पुतला फूंका। उत्तर प्रदेश के ललितपुर में राष्ट्रीय बजरंग दल के नेताओं ने भी प्रदर्शन कर उम्रकैद की सजा रद्द करने की मांग उठाई।
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कुछ सोशल मीडिया पोस्ट और सार्वजनिक बयानों में फैसले को न्यायिक प्रक्रिया के बजाय जज की धार्मिक पहचान से जोड़कर पेश किया गया, जिसे लेकर व्यापक आलोचना भी हुई।

किसी न्यायाधीश को उसके न्यायिक फैसले के कारण धमकाना या डराने की कोशिश करना न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा हमला माना जाता है। ऐसे मामलों में न्यायालय की अवमानना, आपराधिक धमकी और सार्वजनिक शांति भंग करने जैसी धाराएं भी लागू हो सकती हैं, यदि जांच में संबंधित आरोप सही पाए जाते हैं।

फिलहाल, पुलिस सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट और वीडियो की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि सभी डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।