मोदी सरकार में मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का अपने गृह शहर ग्वालियर में ही जबरदस्त विरोध हुआ। काफी संख्या में लोगों ने काले झंडे दिखाए और नारेबाजी की। इसमें गुटबाज़ी की ख़बरें आ रही है। तो क्या पार्टी सिंधिया से दूरी बना रही है? भोपाल से संजीव श्रीवास्तव की रिपोर्ट।
क्या ज्योतिरादित्य सिंधिया से भारतीय जनता पार्टी का मोह भंग हो गया है? क्या वे अब बीजेपी के लिए बोझ हो गए हैं? क्या ऐसे हालात पैदा किए जा रहे हैं, जिससे सिंधिया खुद होकर पार्टी से किनारा कर लें? ये और ऐसे सवालों की गूंज, उनके अपने राज्य मध्य प्रदेश में सिंधिया से जुड़े, कई ताज़ा घटनाक्रमों के कारण तेज़ है।
मोदी सरकार में मंत्री, ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ उनके अपने गृह शहर ग्वालियर में, सोमवार को फिर एक चौंकाने वाला घटनाक्रम हुआ। ग्वालियर के बेला बावड़ी क्षेत्र में कुशवाहा छात्रावास के भूमिपूजन के लिए सिंधिया पहुंचे हुए थे। इस कार्यक्रम में जबरदस्त हंगामा हुआ।
सिंधिया जब भाषण दे रहे थे तब काफी संख्या में लोगों ने जमकर विरोध किया। काले झंडे दिखाए। नारेबाजी की। सिंधिया समर्थक, ये सब देखकर हक्का-बक्का रह गए। टकराव की नौबत के मद्देनजर - सिंधिया ने चलते भाषण में कहा, ‘उन्हें (काले झंडे लहराने और नारे लगाने वालों को) अपना काम करने दीजिए।’
मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार है। सिंधिया के दाहिना हाथ माने जाने वाले मोहन सरकार में मंत्री, तुलसी सिलावट ग्वालियर के प्रभारी हैं। सिंधिया के एक अन्य कट्टर समर्थक प्रद्युम्न सिंह तोमर, जो ग्वालियर स ही आते हैं भी, मोहन सरकार में मंत्री हैं। इनके होते हुए भी सिंधिया की बेइज्जती वाला सीन क्रिएट हुआ।
जब विरोध नहीं थमा तो सिंधिया समर्थक अपना आपा खो बैठे। वे ‘एक्शन’ में आ गए। नारे लगाते लोगों को खदेड़ा गया। झूमा-झटकी हुई। जमकर गाली-गलौज हुई। झड़प को बड़े घटनाक्रम में बदलने से रोकने के लिए पुलिस को भारी मशक्कत करना पड़ी।
बताया गया है कि सरकारी आयोजन से स्थानीय बीजेपी सांसद भारत सिंह कुशवाहा को जान-बूझकर दूर रखा गया था। कुशवाहा बीजेपी के दिग्गज नेता एवं मध्य प्रदेश राज्य विधानसभा के अध्यक्ष, नरेन्द्र सिंह तोमर के कृपापात्र हैं। चर्चा के अनुसार, सिंधिया गुट ने राज्य सरकार में मंत्री और पुराने बीजेपी नेता नारायण सिंह कुशवाहा के ‘कंधे पर रखकर बंदूक’ चलाई थी, मगर दांव उल्टा पड़ गया।
आरोपों के अनुसार, पूरा बवाल बीजेपी सांसद की ‘अनदेखी’ एवं अपमान की वजह से हुआ। अत्यधिक शर्मनाक एवं भाजपा में गुटबाजी-जूतमपैजार वाला पूरा घटनाक्रम, मौके पर मौजूद मीडिया के कैमरों में कैद हुआ है। मोबाइल पर रिकॉर्ड हुआ। फुटेज वायरल हुए। हरेक चेहरा कैमरे में नजर आ रहा है।
घटना के कई घंटों के बाद, मंगलवार दोपहर तक ग्वालियर पुलिस ने किसी भी तरह का मामला मुकदमा दर्ज नहीं किया था।
बीजेपी राज में मोदी सरकार के मंत्री की सभा में पहुंचकर, सरेआम कोई काले झंडे दिखाये-नारे लगाये, फिर भी मुकदमा दर्ज न हो, इसकी वजह क्या होगी? बताने की जरूरत नहीं है। पुलिस अब कह रही है, ‘वीडियो फुटेज खंगाले गए हैं। बारीकी से इन्हें देखा जा रहा है। पहचान करने का प्रयास चल रहा है।’
मुख्यमंत्री मोहन यादव के पास गृह महकमा है। ग्वालियर के एसपी धर्मवीर यादव हैं। इनकी पोस्टिंग नरेन्द्र सिंह तोमर के खाते से होना बताई जाती रही है।
काले झंडे ‘जैसे को तैसा’
सिंधिया के कार्यक्रम में सोमवार को भारी हंगामे को, ग्वालियर के डबरा में आयोजित भाजपा के एक कार्यक्रम में सिंधिया समर्थक महिला नेता के बवाल का ‘जवाब’ करार दिया जा रहा है। दरअसल बीते सप्ताह ग्वालियर सांसद कुशवाहा का डबरा में एक कार्यक्रम हुआ था। कार्यक्रम में उस समय हंगामा मचा गया था, जब सिंधिया की कट्टर समर्थक इमरती देवी ने असहज स्थिति पैदा कर दी थी।इमरती देवी ने मंच शेयर करने से ये कहते हुए इनकार कर दिया था कि ‘मंच पर हत्यारे मौजूद हैं, उनके संग बैठना मुझे मंजूर नहीं है।’ इस आशय की बाइट भी इमरती देवी ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को दी थी। अखबारों में बयान दिए थे। दावा है कि इस पूरे मामले की शिकायत पार्टी से हुई है।
यहां बता दें कि इमरती देवी कांग्रेस में रहते हुए सिंधिया कोटे से विधायक बनीं। मंत्री पद पाया। शानदार महकमे पाये। जब दलबदल किया तो भाजपा ने हाथों-हाथ लिया। उपचुनाव में टिकिट दिया। मंत्री बनाया। बाद में चुनाव हारीं तो मंत्री पद के दर्जे वाली राजनीतिक पोस्टिंग दी। शिवराज की छुट्टी होते ही सिंधिया और उनके समर्थकों का राजनीतिक नूर उतर गया। गिने-चुनों को ही सिंधिया कोटे से कुर्सी मिली है। बाकी हाशिये पर हैं।
वोटर ने सिंधिया को गुना में खरी-खोटी सुनाई थी
ग्वालियर के इस घटनाक्रम के ठीक दो दिन पहले गुना में बवाल हुआ था। गुना में जनता से मुलाकात के कार्यक्रम में वोटरों ने 500 मीटर की एक सड़क के लिए सिंधिया का खुला विरोध किया था। नारेबाजी हुई थी। पट्टिकाएँ लेकर विरोधकरने वाले पहुंचे थे। लिखा था, ‘सड़क नहीं तो वोट नहीं।’एक वीडियो भी वायरल हुआ था। सड़क की मांग करने वाला वोटर, सिंधिया से मुंहजोरी करता रहा था। उसे वीडियो में कहता सुना जा सकता है, ‘इस बार सड़क न डाल (बना) पाये तो वोट मांगने मत आना। हम वोट नहीं देंगे।’
सिंधिया फट पड़े थे। वायरल वीडियो में वे जवाब देते नजर आये थे, ‘मुझसे ऐसी बात नहीं करना। निवेदन करो। सड़क बनायेंगे।’
विरोध करने वाले का जवाब रहा था, ‘दस बार आवेदन कर चुके हैं। कितनी बार करें?’
कलेक्टर-एसपी पर झल्लाये थे
गुना के इसी दौरे में एक अन्य वायरल वीडियो में ज्योतिरादित्य सिंधिया कलेक्टर किशोर कान्याल पर कई बार झल्लाते नज़र आये थे। महिला एसपी हितिका वासल से भी पंगा हुआ था। मार्च 26 में हितिका को एसपी बनाया गया है। वायरल वीडियो में झल्लाते सिंधिया को कार में बैठे कलेक्टर के आने का इंतज़ार करना पड़ा था। वे कहते दिखे थे, ‘कलेक्टर साहब-एसपी महोदया, कार में न बैठें, मेरे साथ रहें। मेरी ड्यूटी करें।’
ये पहला मौका नहीं था। लंबे वक्त से पदस्थ, कलेक्टर कान्याल पर पहले भी कई बार ऐसे कार्यक्रमों (जनता दरबार या जनदर्शन) में सिंधिया झल्लाते या गुस्सा दिखाते नजर आये हैं।
नितिन नवीन ने किया ‘आउट’
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीती 17 एवं 18 सितंबर को मध्य प्रदेश के दौरे पर थे। मध्य प्रदेश में होते हुए इस कार्यक्रम में सिंधिया की गैर मौजूदगी चर्चा का विषय रही। सिंधिया का मालवा-निमाड़ अंचल में भी प्रभाव माना जाता था। मगर अब तवज्जो नहीं दी जाती। नवीन का दौरा चल रहा था और सिंधिया गुना में थे, सवाल पूछा तो समर्थकों ने दलील दी, ‘महाराज का कार्यक्रम पहले से तय (गुना का जनदर्शन कार्यक्रम) था, यहां रहना ज्यादा जरूरी था।’ यहां बता दें कि बीजेपी में आने के बाद उन्हें राज्य के अन्य हिस्से या देश में प्रचार-प्रसार के अवसर छोड़िए, ग्वालियर-चंबल संभाग में भी अपने गुना-शिवपुरी निर्वाचन क्षेत्र तक सीमित कर दिया गया है।
गुना के सीनियर जर्नलिस्ट ने अपना नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘भाजपा में आने, और 2024 का लोकसभा चुनाव जीतने के कुछ महीनों तक सिंधिया धरातल पर रहे। बीजेपी के भाई साहब वाली छवि में रहने का प्रयास किया। मगर बाद में बेपटरी हो गए। हवा में उड़ने लगे। महाराज वाली छवि में लौट आये। बीजेपी-संघ निष्ठ ये सब पसंद नहीं करते हैं। इसी वजह से लकीर ज्यादा गहरी हो गई है।’
उन्होंने ये भी बताया, ‘शिवपुरी में बीजेपी की पुरानी कार्यकारिणी के पदाधिकारी (आज तो सिंधिया गुट के पास पूरे जिले की कमान है) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम में अपना खोमचा अलग सजाते हैं। हरेक आयोजन में 250-300 की भीड़ जुटती है। कार्यक्रम को सुना जाता है। अच्छा काम करने वालों को इस कार्यक्रम में सम्मानित भी किया जाता है।’
मध्य प्रदेश के सीनियर जर्नलिस्ट एवं पांच दशक से ज़्यादा वक़्त से ग्वालियर में जर्नलिज्म कर रहे राकेश अचल ने ‘सत्य हिन्दी’ से कहा, ‘सिंधिया, ठसक नहीं छोड़ सकते। ताकत बची नहीं है। टकराते हैं। मुंह की खाते हैं।’
अचल का कहना है, ‘ग्वालियर तो छोड़िए, गुना-शिवपुरी में सिंधिया की हालत बेहद खस्ता है। मोहन यादव के चक्रव्यूह में फंस गए हैं। इससे निकलना मुमकिन नहीं है। साल 2029 के चुनाव में साल 2019 जैसा (कांग्रेस के टिकट पर सिंधिया गुना सीट हार गए थे) परिणाम, जनता पुनः दोहरा दे तो आश्चर्य न कीजियेगा।’