इंदौर में गंदा पानी पीने से मौतों पर 'घंटा' कहकर विवादों में रहे कैलाश विजयवर्गीय अब विधानसभा में अपशब्द कहकर विवादों में फँस गए हैं। इस बार उन्होंने सदन में ऐसी असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया कि मुख्यमंत्री को माफ़ी मांगनी पड़ी और विधानसभा स्पीकर को भी खेद जताना पड़ा। दरअसल, विजयवर्गीय ने ये अपशब्द तब कहे जब सदन में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि बिजली खरीदने के नाम पर बीजेपी सरकार अडानी ग्रुप को 1.25 लाख करोड़ रुपये देने वाली है। इस पर हंगामा हुआ और इसी दौरान विजयवर्गीय ने ग़ुस्से में गलत और अपमानजनक शब्द का इस्तेमाल कर दिया। इस पर हंगामा हुआ तो स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस घटना पर अफसोस जताया और माफी मांगी।

यह सब राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान हुआ। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार गुरुवार को सदन में बोल रहे थे। उन्होंने सिंगरौली में सरकार और अडानी ग्रुप के बीच हुए समझौते का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार 25 साल में बिजली खरीदने के नाम पर अडानी कंपनी को 1.25 लाख करोड़ रुपये देने वाली है। इस पर स्वास्थ्य मंत्री विश्वास सारंग ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सदन में मौजूद न होने वाले व्यक्ति का नाम नहीं लेना चाहिए। कैलाश विजयवर्गीय ने उमंग सिंघार पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। सिंघार ने जवाब दिया कि वे सबूत देने को तैयार हैं।
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इस बीच, दोनों पक्षों के बीच बहस और तेज हो गई। दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप होने लगे। इसी दौरान कैलाश विजयवर्गीय ने ग़ुस्से में आकर उमंग सिंघार पर असंसदीय शब्द कह दिया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने विपक्षी नेता को 'औकात में रहो..' कहकर धमकी तक दे डाली।

विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग

विपक्षी कांग्रेस के सदस्यों ने तुरंत कैलाश विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग की। हंगामा बढ़ने पर स्पीकर ने सदन की कार्यवाही कुछ देर के लिए स्थगित कर दी। जब सदन फिर शुरू हुआ तो स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, 'आज बहुत असहज स्थिति बनी। हंगामा दोनों तरफ़ से हुआ। मुझे इस बात का दुख है। सदन में गुस्सा दिख सकता है, लेकिन वह गुस्सा बाहर नहीं आना चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा अक्सर कहते थे कि बोलते समय गुस्सा दिखे, लेकिन दिल में न आए। आज ऐसा नहीं हुआ। संसदीय कार्य मंत्री बहुत अनुभवी हैं, फिर भी सीमा लांघ गए। यह सबके लिए चिंता की बात है।' उन्होंने दोनों पक्षों से विवाद सुलझाने की अपील की।

सीएम ने माफी मांगी

इस पूरे घटना पर विवाद के बीच मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सदन से माफी मांगी। उन्होंने कहा, 'जाने-अनजाने जो शब्द निकल गए, उसके लिए मैं सदन से माफी मांगता हूं।' उमंग सिंघार ने कहा कि वे मुख्यमंत्री के इस भाव का सम्मान करते हैं और संसदीय मर्यादा का ख्याल रखते हैं। उन्होंने कहा, 'अगर मेरी तरफ से भी कुछ गलती हुई है, तो मैं भी खेद व्यक्त करता हूं।'

विजयवर्गीय ने बाद में क्या कहा?

बाद में कैलाश विजयवर्गीय ने भी खुद पर अफसोस जताया। उन्होंने कहा, 'मेरे पास 37 साल का राजनीतिक अनुभव है, लेकिन आज मेरे व्यवहार से मुझे दुख है। अगर जिम्मेदार पद पर बैठे लोग संसदीय मर्यादा नहीं निभाएंगे, तो बाकी सदस्य कैसे निभाएंगे? मुझे नहीं पता आज ऐसा कैसे हो गया। उमंग की बॉडी लैंग्वेज थोड़ी अलग थी... मैं उमंग से प्यार करता हूं... मेरे व्यवहार से मुझे बहुत दुख है।'

बाद में उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा कि वे हमेशा अपनी सीमा में रहते हैं। उन्होंने लिखा, 'मेरी औकात मध्य प्रदेश की 7.5 करोड़ जनता के सवालों को आपकी अहंकारी सरकार के सामने बेबाकी से रखने की है। इसी औकात ने आपको इतना छोटा कर दिया कि आपका असली चेहरा सामने आ गया।' उन्होंने कहा कि विजयवर्गीय के अपशब्द मध्य प्रदेश की जनता का अपमान हैं।
सिंघार ने कहा, "मंत्री विजयवर्गीय जनता को कीड़े समझते हैं। 35 परिवार बर्बाद हुए, लोग बेघर हुए - और सवाल पूछने पर कहा जाता है 'अपनी औकात में रहो'!"

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पाटवारी ने इसे अहंकार की हद बताया। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'नए भारत' का नया रूप है। कांग्रेस ने विजयवर्गीय के पुतले जलाने का ऐलान किया और जल्द ही भोपाल में युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनके निवास के बाहर पोस्टर जलाया।
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'घंटा' कहने पर विवादों में थे विजयवर्गीय

हाल ही में दिसंबर 2025 में कैलाश विजयवर्गीय इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों से जुड़े सवाल पर एक पत्रकार से 'घंटा' कहकर विवाद में आए थे।

यह विवाद तब शुरू हुआ था जब इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से कई मौतें हुईं और सैकड़ों लोग बीमार पड़े। एक टीवी पत्रकार ने उनसे इस मुद्दे पर सवाल किया। विजयवर्गीय ने गुस्से में पत्रकार के सवाल को खारिज करते हुए इसे 'फोकट' का सवाल बताया और फिर 'घंटा' शब्द का इस्तेमाल किया। वीडियो वायरल होने के बाद विपक्षी कांग्रेस ने जमकर विरोध किया, इस्तीफे की मांग की। बाद में विजयवर्गीय ने माफी मांगी।

विधानसभा की यह ताज़ा घटना सदन की गरिमा पर सवाल खड़े करती है। दोनों पक्षों ने माफी मांगकर स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन राजनीतिक बयानबाजी जारी है।