बंगले का मासिक किराया 1100 रुपये फिक्स था। साल 2014 तक किराया यही रहा। इसके बाद किराया राशि 6000 रुपये महीना कर दी गई। आशा फ़ाउंडेशन ने साल 2010 तक तो नियमित किराया भरा। बाद में किराया भरना बंद कर दिया। पिछले दस सालों से किराया नहीं भरा गया है। किराया लाखों में पहुँच चुका है।
इसी क्रम में इंदौर के पलासिया क्षेत्र स्थित बंगला नंबर दो खाली करने के लिए लोक निर्माण विभाग के पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा को नोटिस दिया गया। खतो-खिताबत और घर खाली कराने की कार्रवाई के बीच वर्मा ने बंगला नंबर तीन का मसला उठाया।
‘सत्य हिन्दी’ ने मामले पर कैलाश विजयवर्गीय से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया, लेकिन टिप्पणी के लिए वह उपलब्ध नहीं हो सके। उनके फ़ोन से निरंतर नो-रिप्लाॅय आता रहा।