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फ़्लोर टेस्ट से पहले ही कमलनाथ ने दिया इस्तीफ़ा

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्यपाल लालजी टंडन से मिल कर इस्तीफ़ा सौंप दिया है। इसके पहले उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और उसमें अपनी सरकार की उपलब्धियों के बारे में बताया। 
थोड़ी देर बाद यानी दो बजे सदन में शक्ति परीक्षण होना था। लेकिन उसके पहले ही मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को इस्तीफ़ा सौंप दिया। 
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि बीजेपी ने 22 विधायकों को बंधक बनाया और पूरा देश यह जानता है। उन्होंने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये खर्च कर खेल खेला जा रहा है।

कमलनाथ का दावा

कमलनाथ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वे प्रदेश में भयमुक्त और सुरक्षित वातावरण बनाना चाहते थे। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनकी सरकार ने बीते 15 महीनोें में प्रदेश को माफ़िया से मुक्त कराया है। बीजेपी के शासनकाल में यहाँ माफ़िया पनपे। 
कमलनाथ ने कहा कि बीजेपी ने राज्य की 7.5 करोड़ जनता के साथ छल किया है। वह शुरू से ही साजिश करती रही कि किस तरह सरकार को गिराया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि करोड़ों रुपए खर्च कर विधायकों की खरीद-फ़रोख़्त की गई। हमारे विधायकों को बंधक बना कर रखा गया है।  

बीजेपी पर हमला

कमलनाथ ने कहा कि राज्य की जनता ने कांग्रेस को 5 साल काम करने का जनादेश दिया था। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के द्वारा किये गये लोकहितकारी काम बीजेपी को पसंद नहीं हैं। 
बता दें कि पहले कांग्रेस के 22 विधायकों ने इस्तीफ़ा दे दिया था, जिसमें से 6 विधायकों का इस्तीफ़ा स्पीकर ने स्वीकार कर लिया था। लेकिन दूसरे 16 विधायकों का इस्तीफ़ा स्वीकार नहीं किया गया था। बीजेपी ने सरकार से सदन में बहुमत साबित करने की मांग की थी, लेकिन मांग को दरकिनार करते हुए स्पीकर ने 26 मार्च तक सदन को स्थगित किया गया था।
बीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की और तुरंत फ्लोर टेस्ट की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को स्पीकर को फटकार लगाई थी और 16 बागी विधायकों के इस्तीफे ना स्वीकारने का कारण पूछा और आज शाम 5 बजे तक फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश दिया था। इसके बाद स्पीकार ने सभी 16 विधायकों का इस्तीफा स्वीकार कर लिया।
फ्लोर टेस्ट से पहले कमलनाथ ने इस्तीफे का ऐलान कर दिया। इस तरह 15 महीने चली कांग्रेस सरकार गिर गई। 
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