मध्य प्रदेश में जिन नरोत्तम मिश्रा की शिवराज सिंह चौहान से कभी नहीं पटी, उनका नाम उपचुनाव में उम्मीदवारी के लिए नहीं आया। 2023 के चुनाव में बीजेपी ने 164 सीटें जीती थीं लेकिन नरोत्तम मिश्रा की दतिया सीट बीजेपी साढ़े सात हजार वोटों से हार गई थी।
अमित शाह के बेहद करीबियों में शुमार किए जाने वाले एमपी बीजेपी के बड़े चेहरे नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने पर बवाल मच गया है। विरोध में दतिया में बीजेपी जिलाध्यक्ष की पूरी कार्यकारिणी ने इस्तीफा दे दिया। नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटे जाने के विरोध में दतिया में भारी विरोध प्रदर्शन हुआ। नरोत्तम मिश्रा के समर्थन में बीजेपी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने हाईवे जाम किया। नरोत्तम मिश्रा का टिकट पार्टी ने आखिर क्यों काटा? इस सवाल की गूंज दतिया से लेकर पूरे मध्य प्रदेश और देश के सियासी गलियारों में हो रही है।
दरअसल, दतिया विधानसभा सीट के लिए होने जा रहे उपचुनाव में स्वभाविक दावेदार माने जा रहे, नरोत्तम मिश्रा का टिकट बीजेपी ने काट दिया है। दतिया उपचुनाव के लिए (दिल्ली ने शिवराज सिंह चौहान की मुख्यमंत्री पद की चौथी पारी के समय मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष रहे) आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित किया गया है। उपचुनाव के लिए उम्मीदवार की घोषणा होते ही भारी विरोध शुरू हो गया।
दतिया बीजेपी में इस्तीफ़ों की झड़ी
नरोत्तम मिश्रा की टिकट कटने के बाद दतिया में बगावत हो गई है! बीजेपी के ज़िलाध्यक्ष एडवोकेट रघुवीर सिंह कुशवाहा सहित विभिन्न प्रकोष्ठों के अध्यक्षों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। सभी 291 बूथों के अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी भी इस्तीफा देने वालों में शामिल हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को भेजे गए पत्र में इस्तीफा देने वाले नेताओं ने साफ कर दिया है, ‘24 घंटों में फैसला बदलिए। नहीं बदला गया तो खुला विरोध करेंगे।’ समाचार लिखे जाने के समय तक पूरे घटनाक्रम पर बीजेपी प्रदेश नेतृत्व अथवा प्रवक्ता की किसी तरह की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।दतिया सीट से कांग्रेस विधायक राजेन्द्र भारती को बैंक फ्राड के एक मामले में दोषी करार दिया गया है। कोर्ट ने उन्हें सजा सुनाई है। दिल्ली हाईकोर्ट के फ़ैसले के कुछ ही घंटों के बाद मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने दतिया सीट को रिक्त घोषित कर दिया था। इसी वजह से उपचुनाव की नौबत पैदा हुई।
भारत निर्वाचन आयोग द्वारा हाल ही में चुनाव का कार्यक्रम घोषित किया गया। कार्यक्रम घोषित होते ही नरोत्तम मिश्रा ने चुनाव की तैयारियाँ शुरू कर दी थीं। साल 2023 के चुनाव में हार की वजहों को लेकर मिश्रा पूरी जमावट कर रहे थे। रूठों को मनाने और खेद जताने जैसी ख़बरें भी मीडिया में छप रही थीं। ये भी सामने आया था, उन्होंने नामांकन फार्म खरीद लिया है।
उधर, राजेन्द्र भारती ने अपील कर रखी थी। वे दिल्ली में सक्रिय बने हुए थे। सजा पर स्टे के लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार 9 जुलाई 2026 को इस मसले पर आखिरी सुनवाई की। कांग्रेस के दिग्गज नेता और ख्यातनाम वकील पी.चिदंबरम ने भारती की ओर से दलील दी थी। लंबी जिरह हुई थी। शुक्रवार 10 जुलाई के लिए फैसला सुरक्षित रखा गया था। नरोत्तम मिश्रा और उनके समर्थकों ने एड़ी-चोटी का जोर लगा रखा था। शुक्रवार दोपहर बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने राजेन्द्र भारती की याचिका को खारिज करते हुए सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
हाईकोर्ट का फ़ैसला आने के बाद मिश्रा खेमे में जश्न का माहौल बना। खुशियां मनाईं गईं। शाम होते-होते बाजी पूरी तरह से पलट गई। दिल्ली ने टिकट का एलान करते हुए न केवल मिश्रा और उनके समर्थकों, बल्कि राजनीतिक हलकों को भी अवाक कर दिया।
नरोत्तम मिश्रा के निकटवर्ती, टिकट कटने के तरीके को नरोत्तम मिश्रा की पार्टी के प्रति समर्पण, पुरानी उधेड़बुनों और शिद्दत वाले कामों को नजरअंदाज करना एवं अत्यधिक बड़ा अपमान करार दे रहे हैं। नाम न छापने की शर्त पर बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘टिकट काटना ही था तो - पार्टी उन्हें विश्वास में ले लेती।’
नेता ने यह भी कहा, ‘बेशक, मिश्रा मुगालते में रहते हैं। मध्य प्रदेश के मौजूदा नेतृत्व को बहुत कुछ नहीं समझते हैं। उनसे जुड़े विवाद हैं। करप्शन के आरोप भी उन पर लगे हैं। लेकिन करप्शन के आरोपों वाले नेताओं की पार्टी में लंबी पांत है। खुद मुख्यमंत्री कठघरे में हैं। टिकट काटते, पहले बता देते तो ठीक होता।’
आरएसएस की आंखों के तारे हैं तिवारी
आशुतोष तिवारी का बैकग्राउंड राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का है। शिवराज को प्रमोट करते रहने वाले, संघ के कई पदाधिकारियों के वे कृपापात्र हैं। ऐसे ही पदाधिकारियों के आशीर्वाद से उन्हें टिकट मिला है।शिवराज सिंह से कभी नहीं पटी
शिवराज सिंह चौहान मध्य प्रदेश के चार बार सीएम रहे। माना जाता है कि पहले कार्यकाल के बाद वाले कार्यकलों में न चाहते हुए भी शिवराज सिंह को नरोत्तम मिश्रा को हर बार अपनी कैबिनेट में रखना पड़ा। लगातार दोनों के बीच खटपट की खबरें सामने आती रहीं। मिश्रा ने कभी भी शिवराज सिंह को मन से मुख्यमंत्री के तौर पर सम्मान नहीं दिया। दोनों के बीच डॉजिंग चलती रही।
साल 2023 के विधानसभा चुनाव में दतिया में करारी हार के पीछे भी इसी अदावत को देखा जाता रहा। यहां बता दें कि राज्य में 230 विधानसभा सीटें हैं। शिवराज सिंह द्वारा चुनाव के ऐन पहले लागू की गई, लाडली बहना योजना स्कीम के बाद चुनावी खेल बदला था। यद्यपि अन्य समीकरण भी साथ थे। भाजपा ने 164 सीटें जीतीं थीं। मगर दतिया नहीं जीत सकी थी। साढ़े सात हजार वोटों के अंतर से मिश्रा की सीट पर भाजपा हार गई थी।
कांग्रेस बेहद गदगद
दतिया उपचुनाव में बीजेपी में टिकट को लेकर जो कुछ हुआ, उससे कांग्रेस खेमा बेहद गदगद है। कांग्रेस मानकर चल रही है, दतिया की लड़ाई अब ज्यादा आसान हो सकती है। हालाँकि कांग्रेस ने अभी तक अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। नामों को लेकर माथा-पच्ची काफी वक्त से वो कर रही है।
कांग्रेस राजेन्द्र भारती की पत्नी अथवा बेटे को टिकट देना चाहती थी, लेकिन दोनों ने ही मना कर दिया था। संभवतः नरोत्तम मिश्रा से पुनः फाइट कठिन मान रहे होंगे। मगर आशुतोष तिवारी की टिकट के बाद कई उम्मीदवार सामने आने लगे हैं, ऐसा बताया जा रहा है।