देवास में अवैध शराब से भरे ट्रक ने इंस्पेक्टर दिलीप पुरी को कुचलकर मार डाला। जहरीली शराब कांड और तस्करी नेटवर्क को लेकर मोहन यादव सरकार घिरी। पंजाब में अमित शाह के नशा मुक्त अभियान पर भी सवाल।
मध्य प्रदेश में इसी ट्रक से इंस्पेक्टर दिलीप पुरी को कुचला गया
मध्य प्रदेश में शराब माफिया के बीच का कथित टकराव, क्या मध्य प्रदेश की सरकार, मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव और यादव के ‘आका’, मोदी-शाह के लिए नई मुसीबत बन रहा है? इस सवाल की गूंज, मध्य प्रदेश के साथ-साथ दिल्ली हुकूमत के गलियारों में भी हो रही है। दरअसल, मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस एक नवंबर के जश्न के ठीक बाद, दो नवंबर की रात देवास जिले में फिर एक बड़ा कांड हो गया। अवैध रूप से शराब ले जा रहे, एक मिनी ट्रक ने जिले के खातेगांव क्षेत्र में थाने के इंस्पेक्टर दिलीप पुरी को कुचल दिया। जिससे पुरी की दर्दनाक मौत हो गई।
खबर सामने आते ही हड़कंप मच गया। टीआई को कुचलकर भागे ट्रक चालक एवं ट्रक के मालिक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। सरकार ने एसआईटी जांच बैठाई है। डीजी स्तर के सीनियर आईपीएस अधिकारी को एसआईटी का चीफ बनाया गया है। उधर मृतक इंस्पेक्टर के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया है। अपना पति खोने वाली, मृतक इंस्पेक्टर की पत्नी को सब इंस्पेक्टर के पद पर सीधी नौकरी दिए जाने का ऐलान भी किया गया है।
इस हृदय विदारक कांड के बाद मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार एक बार फिर राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियां बना है। दरअसल लगभग 10 दिन पहले, देवास जिले के दो गांवों चंदाना एवं बिंजाना में जहरीली शराब से 13 मौतें होने संबंधी सनसनीखेज खुलासा हुआ था। हालांकि खबरें सामने आने के बाद, सरकार ने इन दावों के साथ खबर को खारिज करने का प्रयत्न किया था, जहरीली शराब से मौतें फेक न्यूज है।
घटनाक्रम पर परदा डालने का प्रयास करते हुए ये भी दावा किया गया था, ‘दोनों गावों में मौतें दूषित पानी से हुई हैं।’ जिन लोगों ने अपनों को खोया, उन्होंने ऑनकैमरा कहा ‘शराब पीने के बाद तबियत बिगड़ने और अस्पताल ले जाने या घर पर ही उनके अपने मारे गये। कइयों की आंखों की रोशनी गई। अपाहित जो गए।’
पीड़ित परिवार वालों ने जवाबी सवाल किए थे। पूछा था, ‘पानी दूषित है, तो मौतें केवल शराब का सेवन करने वालों की ही क्यों हो रहीं हैं? शराब न पीने वाले कैसे बचे हुए हैं? बच्चे-बूढ़े एवं महिलाएं कैसे पानी पीकर भी जीवित हैं? प्रशासन और सरकार, जवाब नहीं दे पाए थे। एसपी-कलेक्टर पर एक्शन के बाद, पुलिस सूत्रों ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया था, ‘मौतों का कारण, शराब का जहरीला होना ही है।’ इसके बाद हंगामा बढ़ गया था। विपक्ष और हमलावार हो उठा था। रविवार-सोमवार को इंस्पेक्टर को कुचलकर मारने के बाद हंगामा और बढ़ गया है।
पंजाब ने बोला हमला
केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने तीन दिन पहले पंजाब में चुनावी कैम्पेनिंग के दौरान कहा है, ‘भाजपा को मौका दीजिये। हम पंजाब के माथे से उड़ता पंजाब का बदनुमा दाग मिटा देंगे। नशे से मुक्त पंजाब बनायेंगे।’ पंजाब की मान सरकार और केजरीवाल की आप पार्टी, अब मध्य प्रदेश के इस ताजा कांड का हवाला देते हुए अमित शाह से पुनः सवाल कर रही है। मशविरा भी दे रही है।
मान सरकार पूछ एवं फरमा रही है, ‘भाजपाशासित मध्य प्रदेश राज्य के इंस्पेक्टर मर्डर कांड को लेकर, अमित जी - अब आपका क्या कहना है? पहले आप अपना सूबा संभाल लीजिये, फिर पंजाब में लफ्फाजी कीजियेगा।’ यहां बता दें, देवास में जहरीली शराब से दर्जन भर से ज्यादा मौतों संबंधी सनसनीखेज खोजी रपट के बाद भी पंजाब सरकार ने अमित शाह से सवाल पूछे थे। गिरेबां में झांकने और भाजपाशासित सूबों को सुधारने का मशविरा दिया था। बाद में जिले के एसपी और कलेक्टर को बदला गया था। तीन आबकारी अधिकारियों पर निलंबन एक्शन हुआ था।
इस तरह टीआई को कुचलकर मारा।
पुलिस से मिली खबरों में सामने आया, ट्रक हरदा जिले के टिमरनी से निकला था। ट्रक में स्पेशल तौर पर बनाये गये गुप्त कैज में रखकर अवैध शराब का परिवहन किया जा रहा था। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ट्रक का पीछा कर रही थी। जिस मार्ग पर ट्रक भाग रहा था, उसके थानों को भी सूचित किया गया था। खातेगांव थाना के इंचार्ज इंस्पेक्टर दिलीप पुरी ने खातेगांव के निकट ट्रक की घेराबंदी कर ली थी। भागता ट्रक एक डिवाइडर से टकराकर रूक गया था। पुरी जब अपने एक सहयोगी आरक्षक के साथ ड्राइवर एवं क्लीनर को पकड़ने प्रयास करने बढ़े थे, तब ड्राइवर ने यूटर्न लेकर ट्रक को भगाया था। चढ़ा दिया था। पुरी चपेट में आकर बुरी तरह जख्मी हो गए थे। जबकि आरक्षक छलांग लगाकर अलग होकर बाल-बाल बच गया था।
इसके बाद टीम के साथी घबरा गए थे। भागते ट्रक की बजाय, पुरी को बचाने में लग गए। अस्पताल लेकर गए। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। सोमवार को ही राजकीय सम्मान के साथ पुरी का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
सागर-भावनगर में हुए कांड
अक्टूबर के पहले, सागर में जहरीली शराब कांड हुआ। उसमें भी दो दर्जन के लगभग लोग मारे गये। कांग्रेस का दावा रहा था, मृतकों की संख्या 50 के ऊपर है। सागर कांड के महीने भर पहले शराब बंदी वाले गुजरात राज्य के भावनगर में जहरीली शराब से दर्जन भर लोगों के मारे गए थे। भावनगर एसपी ने मध्य प्रदेश का नाम लिया था। उज्जैन आबकारी की सीलों वाली शराब भावनगर में पायी गई थी। उज्जैन के नाम सामने आये थे। गुजरात पुलिस मध्य प्रदेश से कुछ लोगों को पकड़कर ले भी गई थी। सागर शराब कांड में यूपी की भूमिका सामने आई थी।
माफिया के वर्चस्व की लड़ाई?
एक एवं दो नवंबर की दरमियानी रात खातेगांव कांड को लेकर पुलिस सूत्रों ने बताया, टिमरनी से चली शराब गुजरात ले जाई जा रही थी। यदि ये सही है तो इसके पहले भावनगर एसपी का बयान कड़ी को जोड़ने वाला माना जा सकता है। मध्य प्रदेश से बड़ी मात्रा में अवैध शराब गुजरात एवं अन्य राज्यों में जाती है, ये आरोप आम है। बात आरोपों तक ही सीमित नहीं है। पूर्व में पकड़ी गई खेप एवं पकड़े गए लोगों ने नाम उगले हैं। सिंडीकेट के छुटभैयों को पकड़कर मामलों को रफा-दफा किया जाता रहा है।
नये कांड के बाद राजनीति उफान पर है। मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष ने तमाम सवाल उठाये हैं। पटवारी ने तंज कसते हुए कहा है, ‘केवल बयान और मगरमच्छों पर कार्रवाई के दावों से काम नहीं चलेगा। तस्करी के नेटवर्क पर ईमानदारी से काम करें। जनता को प्रमाण दें, सरकार जिन्दा है।’
शिवराज की टाइमिंग और ट्वीट सुर्खियों में!
पूर्व मुख्यमंत्री एवं मोदी सरकार में मंत्री शिवराज सिंह चौहान की टाइमिंग और घटनाक्रम से जुड़ा ट्वीट, बेहद सुर्खियों में है। घटना सामने आने के कुछ ही देर बाद एवं मुख्यमंत्री मोहन यादव के बयान या एक्शन के पहले, चौहान ने ट्वीट (एक्स) कर कहा है, ‘देवास जिले के खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी ने पूर्ण निष्ठा, साहस और समर्पण से अपने कर्त्तव्यों का निर्वहन करते हुए कर्त्तव्य वेदी पर अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके असामयिक निधन का समाचार अत्यंत दुःखद एवं पीड़ादायक है।’ एक्स में श्रद्धासुमन अर्पित करने के साथ परिवार को ढांढस भी शिवराज सिंह ने दिलाया है।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस घटना को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर घटना को प्रदेश की कानून-व्यवस्था की हत्या की खुली घोषणा बताया। उन्होंने ने टीआई दिलीप पुरी को श्रद्धांजलि दी और शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदनाएं जताईं।
भोपाल में ड्रग्स की बड़ी खेप भी पकड़ी गई
डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) ने रविवार तड़के दिल्ली से आई बस से उतरे दो तस्करों को गिरफ्तार किया। इनके पास साढ़े तीर किलोग्राम के करीब हाई-ग्रेड मेथामफेटामाइन जब्त की गई, जिसकी अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में कीमत करीब 3.45 करोड़ रुपए आंकी गई।
बीते एक पखवाड़े में आईएसबीटी पर डीआरआई की यह तीसरी बड़ी कार्रवाई थी। इससे पहले 14 और 20 अक्टूबर को भी इसी बस स्टैंड पर करोड़ों की ड्रग्स पकड़ी गई थी। इन 18 दिनों में दिल्ली रूट की बसों से 14 किलोग्राम के लगभग सिंथेटिक ड्रग्स जब्त हुई है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में कुल कीमत लगभग 14 करोड़ बताई गई।
तीन दुकानों के लाइसेंस निलंबित
इस कांड के बाद अब तक हरदा जिले की तीन दुकानों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। सहायक जिला आबकारी अधिकारी और दो आरक्षकों को निलंबित किया गया है। शराब तस्करी नेटवर्क के मुख्य किरदार के तौर पर राहुल जायसवाल का नाम आया है। तार कांग्रेस पार्टी से जुड़े होने के प्रमाण मिल रहे हैं। ये घटना के पहले दिल्ली महारैली में गया था। वापसी में इंदौर एयरपोर्ट से इसे पकड़ा गया है। पूछताछ हो रही है।ट्रक का ड्राइवर और क्लीनर फ़रार है। तस्करी के दौरान पायलटिंग कर रहे किरदारों को भी पुलिस तलाश रही है। नेटवर्क के फाइनेन्सर के तौर पर मोहिन जायसवाल का नाम सामने आया है। ये शख्स गुजरात के अहमदाबाद का निवासी है। पेट्रोल पंप है। मध्यप्रदेश में इसके ठेके भी हैं। झाबुआ के अलीराजपुर निवासी कैरम नामक शख्स ट्रक का संचालक बताया गया है। इंस्पेक्टर की हत्या के समय ये कार से पायलटिंग कर रहा था। कैरम को हिरासत में लिया गया है। पूछताछ हो रही है। ट्रक का असली मालिक कोई और बताया जा रहा है।