petrol pumps dealers protest UPI- पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन ने 16 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान नहीं लेने का ऐलान किया है। एसोसिएशन का दावा है कि नए चार्ज से पंप संचालकों पर हर महीने ₹17,700 तक का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
पेट्रोल पंप अब 2000 रूपये से ऊपर पैसा कैश लेंगे
मोदी सरकार द्वारा यूपीआई ट्रांजेक्शन्स को टैक्स के दायरे में लाये जाने का भारी विरोध शुरू हो गया है। पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन ने शनिवार 19 सितंबर को एक बयान में कहा कि ‘आने वाली 16 अक्टूबर से 2 हजार रुपयों के ऊपर के भुगतान यूपीआई से नहीं, कैश लेंगे।’ एसोसिएशन का बयान आते ही फौरन असर दिखा। मध्य प्रदेश समेत तमाम बीजेपी शासित राज्यों में राज्यस्तरीय एसोसिएशनों ने भी इसी तरह की घोषणाएं शुरू कर दी हैं।
मध्य प्रदेश पेट्रोलियम डीजर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह ने इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए ‘सत्य हिन्दी’ को बताया है, ‘पूर्व से ही संकटों के दौर से गुजर रहे मध्य प्रदेश के पेट्रोल-डीजल पंप मालिक-संचालक, यूपीआई ट्रांजेक्शन पर लगने वाले 5 रुपये प्रति ट्रांक्जेशन के नए बोझ को सहने की स्थिति में नहीं है। इसलिए फैसला लिया गया है। राज्य के पंप ऑनर्स/संचालकगण 16 अक्टूबर से 2 हजार के ऊपर वाला भुगतान, नकद में लेंगे।’
देशभर में 2 हजार रुपयों से ऊपर वाले यूपीआई ट्रांजेक्शन 15 अक्टूबर से टैक्स के दायरे में आने जा रहे हैं। सरकार ने टैक्स की जो स्लैब्स तय की हैं। उनमें पेट्रोल पंपों पर होने वाले 2 हजार रुपयों के ऊपर वाले यूपीआई ट्रांजेक्शन पर 5 रुपये फिक्स चार्ज तय किया गया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह का कहना है, ‘हर यूपीआई ट्रांजेक्शन पर 5 रुपये तय चार्ज के अलावा 90 पैसे प्रति ट्रांजेक्शन जीएसटी भी देय होगा।’
उन्होंने बताया, मध्य प्रदेश में 4 हजार 700 पेट्रोल पंप है। हरेक पंप से औसतन हर दिन, 100 यूपीआई ट्रांजेक्शन हो रहे हैं। इस एवरेज से, हरेक पंप ऑनर को एक दिन में 590 रुपये और पूरे महीने भर में 17 हजार 700 रुपयों का अतिरिक्त टैक्स बोझ आयेगा। सिंह का कहना है, ‘ईरान-इसराइल एवं अमेरिका युद्ध के चलते तेल का संकट बना हुआ है। दाम बढ़े हैं। सप्लाई प्रॉपर नहीं है। डिमांड के अनुरूप तेल मिल नहीं रहा है। इन हालातों में बीते तीन-चार महीनों में हर महीने 40 से 50 हजार रुपये का नुकसान पहले से हो रहा है। अब 17 हजार 700 रुपयों का नया बोझ सहना संभव नहीं होगा।
एसोसिएशन अध्यक्ष का कहना है, ‘पंपों के स्थायी खर्च सुनिश्चित हैं। आय का एकमात्र माध्यम, सुनिश्चित कमीशन है। लंबे वक्त से कमीशन बढ़ा नहीं है। मध्य प्रदेश, देश का तीसर ऐसा सूबा है जहां सर्वाधिक टैक्स है। टैक्स ज्यादा होने से बिक्री कम होती है। पहले ही मुनाफा कम है और अब नया टैक्स, इसे और कम कर देगा।’
एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह ने 18 सितंबर को इंडियन ऑयल कार्पोरेशन तेल उद्योग के सीजीएम एवं राज्य स्तरीय समन्वय, अजय श्रीवास्तव को चार पेज का एक पत्र लिखा है। पत्र में तमाम कठिनाइयों का जिक्र है। इनके मद्देनजर मांग की गई है कि 2 हजार से अधिक के यूपीआई लेन-देन पर पेट्रोल पपों से एमडीआर एवं अन्य ट्रांजेक्शन चार्ज से पंप संचालकों को पूरी तरह से मुक्त किया जाये।
अजय सिंह ने ‘सत्य हिन्दी’ से यह भी कहा, ‘केन्द्र की सरकार अथवा मध्य प्रदेश की सरकार, यूपीआई के प्रत्येक ट्रांजेक्शन पर आने वाला बोझ खुद की जेब से देने का लिखित भरोसा दे दे तो एसोसिएशन 16 अक्टूबर से 2 हजार रुपये के ऊपर के भुगतान यूपीआई से नहीं लेने संबंधी अपनी घोषणा को वापस ले लेगा।
जब उनसे पूछा गया कि एसोसिएशन की घोषणा तय नियमों का उल्लंघन नहीं है? सरकार की न सुनने पर एक्शन नहीं हो जाएगा? अजय सिंह ने कहा, ‘हमें इसकी परवाह नहीं है। हम अतिरिक्त बोझ सहने की स्थिति में नहीं है। फैसला यथावत रहेगा। सरकार, चाहे जो करे। एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने यह भी कहा, ‘सरकार अथवा प्रशासन की ओर से अब तक हमसे किसी भी तरह का संपर्क नहीं किया गया है। कोई बात भी नहीं हुई है। कंपनी का नया कोई फरमान भी अब तक नहीं आया है।’
कितना घाटा होगा हर राज्य को
पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिशन अगर अड़ी रहती है तो अकेले मध्य प्रदेश में यूपीआई टैक्स से 8 करोड़ 31 लाख से ज्यादा की हानि सरकार को हर माह संभावित मानी जा रही है। कुल 4700 पंप है। हर महीने एवरेज हर पंप पर 17700 टैक्स बनने की संभावना है। इस हिसाब से पूरे साल में ये आंकड़ा 100 करोड़ के लगभग बैठेगा। यह एक राज्य का आंकड़ा है। ऐसा ही कदम अन्य राज्य एवं केन्द्रशासित प्रदेशों में उठाया गया तब क्या हाल होंगे। कुल 28 राज्य एवं 8 केन्द्रशासित प्रदेश हैं। ये मसला अकेले ईंधन का है। पेट्रोल पंपों के अलावा तमाम अन्य कारोबारियों को भी सरकार का यह कदम पसंद नहीं आ रहा है। वहां भी विरोध के स्वर उठे हैं।
ज्यादा टैक्सः हिमाचल पहला, एमपी का नंबर तीसरा
देश में सबसे ज्यादा टैक्स वसूलने वाले सूबों में मध्य प्रदेश तीसरे क्रम पर है। मध्य प्रदेश में पेट्रोल पर 29 और डीजल पर 19 फीसदी (वैट/सेस आदि) टैक्स वसूले जा रहे हैं। देश में सबसे ज्यादा टैक्स हिमाचल प्रदेश में है। हिमाचल में हाल ही में 5 रुपए प्रति लीटर के इजाफे के बाद पेट्रोल पर 33 फीसदी और डीजल पर 25 प्रतिशत टैक्स वसूला जा रहा है। जबकि पश्चिम बंगाल दूसरे क्रम पर है। बीजेपी शासित राज्य बंगाल में पेट्रोल पर 31 फीसदी और डीजल पर 22 प्रतिशत राज्य के टैक्सेस हैं।
सबसे कम टैक्स गोवा में
देश में पेट्रोल-डीजल पर सबसे कम टैक्स गोवा में है। गोवा में पेट्रोल पर 15 और डीजल पर 12 फीसदी टैक्स है। गोवा के बाद हरियाणा में पेट्रोल पर 28 और डीजल पर 16 फीसदी टैक्स हैं। अजय सिंह के अनुसार, ‘हरियाणा राज्य मध्य प्रदेश से चौथाई है, लेकिन कम टैक्स की वजह से उसकी सेल मध्य प्रदेश से दुगना है।’ उन्होंने बताया, एमपी की तुलना में यूपी में पेट्रोल 7 रुपये प्रति लीटर और डीजल 3 रुपये प्रति लीटर कम है। इसके चलते मध्य प्रदेश की सीमा से लगे लोग, ईंधन के लिए यूपी चले जाते हैं।उन्होंने कहा, ‘मध्य प्रदेश देश का हृदय प्रदेश है। बड़ी संख्या में वाहनों का यहां से आवागमन होता है। डीजल हमारे सूबे से वाहन नहीं भरवाते हैं।’ सिंह ने कहा, ‘यही वजह है हम 1200 किलोलीटर पेट्रोल और 1600 किलोलीटर डीजल बेच पाते हैं। पड़ोसी सूबे हमसे कई गुना ज्यादा बेचते हैं। सूबे को टैक्स मिलता है।