कांग्रेस ने एमपी सीएम मोहन यादव के परिवार की जमीन खरीद मामले में बड़ा भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है और सुप्रीम कोर्ट जज की निगरानी में इसकी जाँच कराने की मांग की है। कांग्रेस ने इस मामले को उठाते हुए मोहन यादव को 'भ्रष्टाचारी मुख्यमंत्री' क़रार दिया है। कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्यमंत्री से 15 कड़े सवाल पूछे और कहा कि उनको जनता को जवाब चाहिए।

कांग्रेस ने इस मामले को लेकर मोहन यादव से क्या मांग की और कैसे-कैसे सवाल पूछे हैं, यह जानने से पहले यह जान लीजिए कि आख़िर सीएम मोहन यादव पर कितने गंभीर आरोप लगे हैं। दरअसल, कांग्रेस ने ये आरोप तब लगाए जब द इंडियन एक्सप्रेस की पड़ताल में दावा किया गया कि मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव, उनके परिवार और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने उज्जैन और आसपास के इलाकों में 137 भूखंड खरीदे हैं, जिनका कुल क्षेत्रफल लगभग 168 एकड़ है। उनके परिवार के लोगों द्वारा खरीदी गई ज़मीनों की पूरी डिटेल दी गई है। इसको लेकर एमपी कांग्रेस ने एक्स पर पोस्ट किया, 'भ्रष्टाचारी मुख्यमंत्री'।

मोहन यादव परिवार के पास कितनी जमीन?

एमपी कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुल जमीन मालिकाना हक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि मोहन यादव परिवार और रिश्तेदारों के पास 245 प्लॉट में 335 एकड़ जमीन है। उन्होंने इसकी पूरी डिटेल दी है-
  • नीलेश यादव: 108 एकड़
  • गोविंद यादव: 47 एकड़
  • नारायण यादव: 19 एकड़
  • मोहन यादव: 17 एकड़
  • नंदलाल यादव: 17 एकड़
  • अभय यादव: 16 एकड़
  • सीमा यादव: 11 एकड़
  • वैभव यादव: 17 एकड़
  • शालिनी यादव: 10 एकड़
  • अन्य रिश्तेदार: बाकी जमीन
4 रियल एस्टेट कंपनियों में सीमा यादव और मोहन यादव की बहुमत हिस्सेदारी बताई गई है। आरोप लगाए गए कि मोहन यादव के मंत्री रहते और फिर मुख्यमंत्री बनने के दौरान इन जमीनों के आसपास कई रोड प्रोजेक्ट्स आए।

कांग्रेस का कहना है कि पहले जमीन खरीदी गई और फिर उसी क्षेत्र में विकास परियोजनाएं शुरू की गईं। पार्टी पूछ रही है कि क्या विकास योजनाएं जनता के हित में हैं या परिवार के हित में? मुख्यमंत्री मोहन यादव या बीजेपी की तरफ़ से इस मामले पर जवाब नहीं आया है।

कांग्रेस की मुख्य मांगें

  • पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में गठित समिति से कराई जाए।
  • मुख्यमंत्री मोहन यादव प्रदेश की जनता के सामने आएं और आरोपों पर अपना बयान दें।
  • सिंहस्थ कुंभ के नाम पर हो रहे कथित भ्रष्टाचार में कौन-कौन सी कंपनियां शामिल हैं और उनका सत्ता से क्या संबंध है, यह जानकारी सार्वजनिक की जाए।
  • प्रदेश के लाखों-करोड़ों रुपये कहाँ और किसके हित में खर्च हो रहे हैं, इसका पूरा हिसाब दिया जाए।

जीतू पटवारी के 15 बड़े सवाल

जीतू पटवारी ने कहा कि आज हम प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं, प्रश्न कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं। उन्होंने धर्मनगरी उज्जैन को इस जमीन गोरखधंधे का हिस्सा बताते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव से सीधे सवाल पूछे-
  • क्या आपके मुख्यमंत्री बनने के बाद आपके परिवार और जुड़ी कंपनियों ने 137 प्लॉट खरीदकर 168 एकड़ जमीन हासिल की?
  • क्या 111 एकड़ जमीन उन जगहों पर खरीदी गई जो सरकारी परियोजनाओं से प्रभावित क्षेत्र हैं? क्या यह महज संयोग है?
  • सरकार उन सभी परियोजनाओं की लैंड यूज चेंज की सूची सार्वजनिक करेगी जहां आपके परिवार ने जमीन खरीदी?
  • क्या आप घोषणा करेंगे कि इस भूमि सौदे की न्यायिक जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से कराई जाए?
  • क्या मुख्यमंत्री कार्यालय ने यह सुनिश्चित किया कि जिन क्षेत्रों में परिवार की जमीन है, वहां के सरकारी फैसलों से खुद को अलग रखा?
  • क्या कैबिनेट या विभागीय बैठकों में परिवार के निजी लाभ की चर्चा हुई?
  • रिपोर्ट में मुख्यमंत्री की पत्नी, पुत्रवधु और रिश्तेदारों से जुड़ी 4 रियल एस्टेट कंपनियों का जिक्र है। सरकार इन कंपनियों का पूरा विवरण साझा करेगी?
  • क्या पत्नी सीमा यादव की कंपनियों से परिवार के अन्य सदस्यों को जमीन हस्तांतरित की गई?
  • क्या परिवार की सभी कंपनियों का फॉरेंसिक ऑडिट कराने को तैयार हैं?
  • जमीन खरीदने के कुछ समय बाद ही हाउसिंग प्रोजेक्ट और बिल्डर एग्रीमेंट शुरू हो गए- क्या यह पहले से प्लान किया गया था?
  • कुछ प्रोजेक्ट्स में भूमि मालिकों को 60-70% विकसित संपत्ति का हिस्सा मिला- अनुमानित आर्थिक लाभ सरकार बताएगी?
  • पहले सड़क बनी या पहले जमीन खरीदी गई?
  • ‘ना खाऊंगा, न खाने दूंगा’ कहने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मामले की जांच कराएंगे?
  • क्या मुख्यमंत्री यह घोषणा करेंगे कि उनके परिवार की 2023 की भूमि खरीदी की जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से जांच कराई जाए?
  • जनता सिर्फ यह जानना चाहती है कि क्या विकास योजनाएं पहले बनीं, फिर जमीन खरीदी गई या फिर पहले जमीन खरीदी गईं और फिर विकास योजनाएं बनाईं गईं?
यह विवाद मध्य प्रदेश की राजनीति में गरमा गया है। कांग्रेस इसे भ्रष्टाचार का मामला बता रही है, जबकि सत्ता पक्ष इसे राजनीतिक साजिश करार दे सकता है।

मुख्यमंत्री ने नहीं दी प्रतिक्रिया: रिपोर्ट

द इंडियन एक्सप्रेस ने कहा है कि इस मामले पर मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके कार्यालय को विस्तृत सवाल भेजे गए थे, लेकिन उनकी ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली। हालाँकि राज्य सरकार के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने अंग्रज़ी अखबार से नाम न छापने की शर्त पर कहा कि मुख्यमंत्री के रिश्तेदारों के व्यावसायिक लेन-देन को सीधे मुख्यमंत्री के पद से जोड़ना सही नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार एक अधिकारी ने कहा कि यादव परिवार लंबे समय से रियल एस्टेट कारोबार में सक्रिय है और उनकी जमीन खरीद को केवल राजनीतिक नज़रिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
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परिवार ने किया बचाव

अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार मुख्यमंत्री के चचेरे भाई गोविंद यादव के पुत्र अनंत यादव ने कहा कि उनका 'परिवार 2010 से रियल एस्टेट व्यवसाय में है जब मेरे पिता ने 100 बीघा की प्रॉपर्टी बनाई'। उन्होंने कहा कि कई जमीन सौदे ऐसे हैं जिनकी प्रक्रिया 2020 में शुरू हो गई थी, जब मोहन यादव मुख्यमंत्री तो दूर मंत्री भी नहीं थे। अनंत यादव ने कहा, 'अगर परिवार का कोई सदस्य मुख्यमंत्री बन गया है तो क्या बाकी लोगों को अपना व्यवसाय बंद कर देना चाहिए?'

उज्जैन के गंगेड़ी में चल रहे प्रोजेक्ट के बारे में उन्होंने कहा, 'मेरे पिता इसके अकेले मालिक नहीं हैं। उनके छह-सात बिज़नेस पार्टनर हैं। भले ही यह 2023 में रजिस्टर हुआ हो, लेकिन ज़मीन खरीदने की डील 2020 में ही हो गई थी, जब वे मंत्री भी नहीं थे। हाईवे का काम 2019 में ही मंज़ूर हो गया था। यह ज़मीन हाईवे से 100 मीटर दूर है।'