भारतीय जनता पार्टी, मध्य प्रदेश में बिहार और उड़ीसा ‘दोहराने’ के लिए कमर कस तैयार हो गई है। मध्य प्रदेश में राज्यसभा की कुल तीन रिक्त सीटों के लिए भाजपा ने ‘खेल’ की तैयारी की है। इसी ‘गेम’ के तहत भाजपा ने अब उस सीट पर भी दांव खेल दिया है, जो नंबर गेम के मान से कांग्रेस के खाते में जाना तय प्रतीत हो रही है।
बता दें, मध्य प्रदेश में राज्यसभा की कुल तीन सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं। इन तीन सीटों में नंबरों के हिसाब से तयशुदा, दो सीटों के लिए भाजपा ने तरूण चुघ और रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया है। उधर कांग्रेस ने पूर्व सांसद और राहुल गांधी टीम की अहम सदस्य मीनाक्षी नटराजन को टिकट दिया है।
भाजपा के दोनों उम्मीदवार, तरूण चुघ और रजनीश अग्रवाल परचा भर चुके हैं। जबकि मीनाक्षी नटराजन सोमवार दोपहर को परचा भरने वाली हैं। मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी घोषित होने के बाद, कांग्रेस खेमे में असंतोष की आवाजें उठीं हैं। कतिपय कांग्रेसजनों ने खुलकर बोला है, तो कुछ - लगागतार दबी जुबान में फरमा रहे हैं, ‘दिल्ली का दांव गलत है। फैसला भारी पड़ सकता है।’
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तमाम उठापटक और गुणा-भाग के बीच रविवार देर शाम भाजपा ने तीसरी सीट के लिए भी अपना उम्मीदवार उतारने का फैसला ले लिया है। तीसरी सीट के लिए भाजपा खेमे से महेश केवट का नाम आगे बढ़ाया गया है। भाजपा ‘गाजे-बाजे’ के साथ सोमवार दोपहर महेश केवट का परचा भरवाने जा रही है।
राज्य विधानसभा में सदस्यों की कुल संख्या 230 है। दतिया सीट (कांग्रेस के पास थी) बीते दिनों रिक्त घोषित किया गया है। बची कुल 229 सीटों में 164 सीटें सत्तारूढ़ दल भाजपा, 64 सीटें कांग्रेस और एक सीट अन्य पार्टी के पास है।
कांग्रेस के पास कुल 64 विधायकों में श्योपुर जिले की विजयपुर सीट के पार्टी विधायक, मुकेश मल्होत्रा की सदस्यता का मामला कोर्ट में लंबित है। हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ उन्हें अयोग्य घोषित करते हुए, रनरअप रहे भाजपा के रामनिवास रावत को विधायक घोषित कर चुकी है।
मल्होत्रा अपर कोर्ट गए हुए हैं। उन्हें वोटिंग का अधिकार नहीं है। इसके अलावा सागर जिले की बीना सीट को कांग्रेस के लिए जीतने वाली, एडवोकेट निर्मला सप्रे भाजपा का दामन थामे हुए हैं। उनसे जुड़ा मसला भी कोर्ट और विधानसभा सचिवालय के बीच लटका हुआ है। इस स्थिति में कांग्रेस के पास कुल 62 का नंबर बच रहा है।

विधानसभा में सीटों के नंबर गेम के मान से हरेक सीट के लिए 58 वोट जरूरी हैं। इस मान से कांग्रेस का नंबर तय नंबरों से ज्यादा है, लेकिन वोटिंग तक सारे साथ रहेंगे, इसे लेकर संशय बना हुआ है। दरअसल भाजपा के पास दो सीटों के लिए कुल वोटों के बाद, 48 अतिरिक्त वोट बच रहे हैं। तीसरी सीट पाने के लिए उसे 10 नंबरों का जोड़तोड़ करना है। भारत आदिवासी पार्टी के विधायक कमलेश्वर डोडियाल को साधना भाजपा के लिए ज्यादा कठिन नहीं होगा, ऐसा माना जा रहा है।

यदि ‘बाप’ (बीएपी) के विधायक भाजपा का साथ दे देते हैं तो उसका नंबर 50 हो जायेगा। इसके बाद मात्र 8 विधायकों की जरूरत होगी। भाजपा के सूत्र दावा कर रहे हैं, ‘कांग्रेस के एक दर्जन से ज्यादा विधायक संपर्क में हैं। संपर्क वाले विधायक बिना ‘लोभ-लालच’ के भाजपा के साथ देंगे।’ सूत्र ये भी दावा कर रहे हैं, ‘दो दर्जन के करीब विधायक कांग्रेस की रीति-नीतियों से परेशान हैं। इनका साथ मिलेगा और तय नंबरों से ज्यादा सीटों से भाजपा का तीसरा उम्मीदवार राज्यसभा सीट को जीतेगा।’
उधर, मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी और राज्यसभा के मौजूदा सदस्य दिग्विजय सिंह (मीनाक्षी को इसी सीट से उम्मीदवार बनाया गया है) ने अलग-अलग बयानों में कहा है, ‘भाजपा के मंसूबे ध्वस्त होंगे। कांग्रेस विधायक एकजुट हैं। आसानी से कांग्रेस सीट को जीतेगी। काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ेगी।’
दो दर्जन कांग्रेस विधायक भविष्य को लेकर चिंतित: भाजपा का दावा गलत नहीं है। कांग्रेस के मौजूदा 64 विधायकों में दो दर्जन से कुछ ज्यादा ऐसे विधायक हैं, जो ‘भविष्य’ की राजनीति को लेकर साफ तौर पर चिंतित नजर आते हैं। इनकी बांडी लेंग्वेज और चेहरों को आसानी से पढ़ा जाता है। कई सारे ऐसे भी हैं, जिनके खिलाफ पैंचीदा मामले-मुकदमे हैं। इनके ‘बिजनेस’ भी भाजपा राज में निरंतर प्रभावित हुए हैं।
सीनियर जर्नलिस्ट अरूण दीक्षित ने ‘सत्य हिन्दी’ से कहा, ‘कांग्रेस के दर्जन भर या इससे ज्यादा विधायकों को तोड़ना कठिन नहीं है। यह नहीं भूलना चाहिए कि मोदी-शाह ने कमल नाथ की सरकार को तोड़ा था। ज्योतिरादित्य सिंधिया सरीखे के विश्वासपात्र गद्दारी कर गए थे। दो दर्जन के लगभग विधायक साथ ले गए थे।’
कांग्रेस से भाजपा में गए ज्यादातर चेहरे हाशिए पर होने की और ध्यान दिलाए जाने पर - दीक्षित ने कहा, ‘चुनाव राजनीति से अलग-थलग होना, टिकिट न मिलना या सत्ता में सीधी भागीदारी न होना, और बात है। बिजनेस का फलना-फूलना और सल्तनत बने रहना-उसमें इजाफा होना खास बात है। यही बात, पार्टी से बगावत का मन बनाने वाले विधायकों को, क्लिक कर सकती है।’

कौन हैं महेश केवट

भाजपा के तीसरे उम्मीदवार महेश केवट (52 वर्ष) निवाड़ी जिले के ओरछा के मूल निवासी हैं। वर्तमान में मध्य प्रदेश मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष हैं। कैबिनेट मंत्री का दर्जा उन्हें प्राप्त है। बीएससी तक शिक्षित केवट का व्यावसाय कृषि और व्यापार है। वे 1984 से आरएसएस से जुड़ हुए हैं। एबीवीपी-वीएचपी के अलावा 1995 से भाजपा की सक्रिय राजनीति में बने हुए हैं। केवट को मछुआरा, केवट, निषाद और माझी समाज की आवाज माना जाता है।

क्रास वोटिंग से बचने के लिए बाड़ाबंदी

कांग्रेस भले ही कठिनाई से इनकार करे, लेकिन सच यही है कि भाजपा की ओर से उम्मीदवार उतारने के बाद उसकी चिंता बढ़ गई है। पार्टी अपने विधायकों की बाड़ाबंदी पर विचार कर रही है। कांग्रेस अपने सभी विधायकों को तेलंगाना भेज सकती है। हालांकि इसकी किसी ने पुष्टि नहीं की है।
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन तेलंगाना की प्रदेश प्रभारी भी हैं। ऐसे में वहां राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। तेलंगाना के मुख्यमंत्री अनुमुला रेवंत रेड्डी भी मध्य प्रदेश के राज्यसभा चुनाव पर नजर बनाए हुए हैं।
आलाकमान मध्य प्रदेश के विधायकों की बाड़ा बंदी के लिए कर्नाटक राज्य की मदद भी ले सकता है। खबरों के अनुसार कई पुराने दिग्गजों को मध्य प्रदेश भेजने का निर्णय भी हुआ है। मध्य प्रदेश कांग्रेस के पुराने प्रभारी और कर्नाटक के बड़े नेता बीके हरिप्रसाद के जल्दी भोपाल आने की सुगबुगाहट भी बनी हुई है।