मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के ‘घंटा’ वाले बयान को ‘तानाशाही’ बताने वाले उज्जैन के एसडीएम को निलंबित क्यों किया गया? अधिकारियों ने निलंबन के कारण क्या बताए?
कैलाश विजयवर्गीय के 'घंटा' वाले बयान से जुड़े मामले में सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट यानी एसडीएम पर बड़ी कार्रवाई हुई है। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के एसडीएम आनंद मालवीय को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई उनके द्वारा जारी किए गए एक आदेश के कारण हुई, जिसमें उन्होंने राज्य के शहरी विकास और आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विवादास्पद 'घंटा' वाले बयान को 'तानाशाही व्यवहार' की निशानी बताया था। यह मामला इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों से जुड़ा है। इसको लेकर कांग्रेस पार्टी विरोध प्रदर्शन कर रही है। कांग्रेस के इस विरोध प्रदर्शन को लेकर क़ानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए एसडीएम ने आदेश निकाला था और इसमें मंत्री के बयान का ज़िक्र था।
दरअसल, यह पूरा मामला इंदौर में हाल ही में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत से जुड़ा है। मीडिया रिपोर्टों में 14-16 लोगों की मौत और क़रीब 2800 लोगों के इलाज कराने का आँकड़ा बताया गया है, जबकि एमपी सरकार और स्वास्थ्य महकमे ने दूषित पानी से 4 लोगों की मौत की ही पुष्टि की है। आरोप है कि यह दूषित पानी बीजेपी शासित नगर निगम द्वारा सप्लाई किया गया था। इस मुद्दे पर कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई।
एसडीएम ने आदेश में क्या लिखा था?
एसडीएम आनंद मालवीय को जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक आदेश जारी करना था, जो कांग्रेस के इन प्रदर्शनों से जुड़ा था। लेकिन उनके आदेश में कुछ अजीब बातें शामिल हो गईं। आदेश में लिखा था, 'इंदौर में बीजेपी संचालित नगर निगम द्वारा सप्लाई किए गए दूषित और गंदे पानी पीने से 14 लोगों की मौत हो गई है और 2800 लोग इलाज करवा रहे हैं।'
इसके साथ ही, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान का जिक्र करते हुए कहा गया कि इस संवेदनशील मुद्दे पर 'घंटा' शब्द का इस्तेमाल 'अमानवीय और तानाशाही व्यवहार' की निशानी है। यह बयान बेहद आपत्तिजनक है। एसडीएम द्वारा जारी नोटिस में लिखा था, 'इस संवेदनशील मुद्दे पर राज्य सरकार के एक मंत्री द्वारा की गई आपत्तिजनक टिप्पणी, 'घंटा' शब्द का इस्तेमाल अमानवीय और तानाशाही व्यवहार की निशानी है। प्रदेश अध्यक्ष... जीतू पटवारी जी ने फ़ैसला किया है कि इस घटना के विरोध में बीजेपी सांसदों और विधायकों का घेराव किया जाएगा।'क्यों हुई गड़बड़ी?
जब इस आदेश की खबर फैली तो विवाद खड़ा हो गया। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों का कहना है कि ये हिस्से कांग्रेस द्वारा प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन से सीधे कॉपी-पेस्ट किए गए लगते हैं और यह कलर्क के स्तर पर ग़लती हो सकती है। एसडीएम मालवीय ने बाद में इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि आदेश के कुछ हिस्से कांग्रेस पार्टी के व्हाट्सएप ग्रुप से कॉपी हो गए थे। उन्होंने बताया, 'आदेश में कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के बारे में व्हाट्सएप ग्रुप से कुछ हिस्से उठा लिए गए। स्वास्थ्य संबंधी आंकड़े आधिकारिक स्रोतों से थे, लेकिन गलतियाँ नजर आने पर मैंने पुराना आदेश वापस ले लिया और नया जारी किया। लेकिन किसी ने पुराना आदेश वायरल कर दिया।'
निलंबन का आदेश कैसे जारी हुआ?
3 जनवरी को विरोध प्रदर्शन की जानकारी मिलने पर एसडीएम ने आदेश जारी किया था। लेकिन 4 जनवरी को देवास कलेक्टर के कार्यालय से एक प्रस्ताव आया, जिसमें कहा गया कि यह आदेश की प्रक्रिया और तथ्यों में गलती है। इसमें गलत आंकड़े इस्तेमाल किए गए और संवेदनशील मुद्दे पर बिना जांच के जारी किया गया। यह गंभीर लापरवाही, उदासीनता और कर्तव्य में अनियमितता दिखाता है।
उज्जैन संभाग के कमिश्नर ने 5 जनवरी को निलंबन का आदेश जारी किया। इसमें मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के तहत इसे कदाचार माना गया। इसके तहत आनंद मालवीय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। निलंबन के दौरान उनका मुख्यालय उज्जैन संभाग कमिश्नर कार्यालय में रहेगा।
क्या कहते हैं वरिष्ठ अधिकारी?
वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि यह एक 'कॉपी-पेस्ट' की गलती हो सकती है, लेकिन एसडीएम की जिम्मेदारी बनती है कि वे दस्तावेज की जांच करें। इस घटना से प्रशासनिक कामकाज में सावधानी की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है। कांग्रेस और भाजपा के बीच यह मुद्दा राजनीतिक रूप से गर्म हो सकता है, क्योंकि इंदौर में पानी की समस्या पर पहले से विवाद चल रहा है।
फिलहाल, एसडीएम मालवीय पर आगे की जाँच चल सकती है। इंदौर की पानी समस्या पर सरकार क्या कदम उठाती है, यह देखना बाक़ी है।