पवार ने कहा कि राज्यपाल की किसी मुद्दे पर अपनी अलग राय हो सकती है लेकिन जिस तरह की भाषा का उन्होंने इस पत्र में प्रयोग किया है और उसे मीडिया में सार्वजनिक किया है, वह बेहद दुःखद है।
कोश्यारी की टिप्पणी के बाद बड़ा सवाल यही खड़ा होता है कि एक संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति क्या धर्म के आधार पर फ़ैसला लेने के लिए सरकार को पत्र लिखकर और उसके मुखिया से सेक्युलर होने को लेकर सवाल पूछ सकता है?